सायरा बानो@82, दिलीप कुमार से शादी की भविष्यवाणी हुई सच:मेहमानों ने शादी से चुराए कांटे-छुरी, खाना कम पड़ा; शाहरुख को बेटा माना; जानिए किस्से
साल 1955 तमिलनाडु के कोयंबटूर में फिल्म 'आजाद' की शूटिंग चल रही थी। इसी दौरान फिल्म प्रोड्यूसर एस.एस. वासन ने दिलीप कुमार की मुलाकात एक मशहूर ज्योतिषी से कराई। ज्योतिषी ने दिलीप कुमार का चेहरा देखा, हाथ की रेखाएं पढ़ीं और फिर उनकी कुंडली बनाई। इसके बाद उन्होंने ऐसी भविष्यवाणी की, जिसे सुनकर खुद दिलीप कुमार भी हैरान रह गए। ज्योतिषी ने कहा कि दिलीप कुमार की शादी 40 साल की उम्र के बाद होगी। उनकी दुल्हन उनसे करीब आधी उम्र की होगी। इतना ही नहीं, वह भी फिल्मों से जुड़ी होगी। भविष्यवाणी यहीं खत्म नहीं हुई। ज्योतिषी ने यह भी कहा कि उस महिला को एक गंभीर बीमारी भी होगी। यह सुनकर दिलीप कुमार ने कहा था, “मैं तो कभी फिल्म वाली लड़की से शादी ही नहीं करूंगा।” उस वक्त दिलीप कुमार ने इस भविष्यवाणी को गंभीरता से नहीं लिया था, लेकिन करीब 11 साल बाद ज्योतिषी की कही लगभग हर बात सच हो गई। 1966 में 44 साल के दिलीप कुमार ने 22 साल की एक्ट्रेस सायरा बानो से निकाह किया। आज सायरा बानो के 82वें जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी और दिलीप कुमार के साथ उनकी प्रेम कहानी के कुछ अनसुने किस्से। दिलीप कुमार के चलते उर्दू सीखनी शुरू की सायरा बानो का जन्म 1944 में मशहूर अदाकारा नसीम बानो और प्रोड्यूसर मियां एहसान-उल-हक के घर हुआ था। दिलचस्प बात ये है कि जिस साल सायरा दुनिया में आईं, उसी साल दिलीप कुमार की पहली फिल्म ज्वार भाटा (1944) रिलीज हुई थी। सायरा करीब 6 साल की थीं, जब उनको पढ़ाई के लिए यूनाइटेड किंगडम भेज दिया गया। लंदन के मशहूर एलीट स्कूल क्वीन्स हाउस में उनकी पढ़ाई हुई। छुट्टियां होतीं, तो सायरा हिंदुस्तान आती थीं। ऐसी ही एक छुट्टी में 12 साल की सायरा अपनी मां के साथ घर पर फिल्म आन देख रही थीं। फिल्म महबूब खान ने बनाई थी और हीरो थे दिलीप कुमार। दिलीप साहब की अदाकारी ने सायरा के दिल पर ऐसा असर किया कि फिल्म खत्म होते ही उन्होंने मां के सामने अपनी ख्वाहिश जाहिर कर दी। सायरा ने साफ कह दिया- अगर शादी करेंगी, तो सिर्फ दिलीप कुमार से। लंदन में पढ़ाई के दौरान भी सायरा बानो के दिल में एक ही ख्वाब था- एक दिन वह मिसेज दिलीप कुमार बनेंगी। सायरा ने दैनिक भास्कर को दिए एक पुराने इंटरव्यू में यह बात बताई थी। सायरा की मां नसीम बानो उनसे कहती थीं कि अगर उन्हें दिलीप कुमार की पत्नी बनना है, तो पहले उनकी पसंद-नापसंद और शौक को समझना होगा। बस फिर क्या था, सायरा ने भी दिलीप साहब की पसंद की चीजें सीखना शुरू कर दिया। जब उन्हें मालूम हुआ कि दिलीप कुमार को उर्दू और शायरी बेहद पसंद है, तो सायरा ने बाकायदा मौलवी साहब से उर्दू पढ़ना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, दिलीप साहब को सितार पसंद था, तो सायरा ने सितार सीखने की कोशिश भी की। काम करने को लेकर दिलीप कुमार ने सफेद बाल दिखा दिए सायरा की मां नसीम एक एक्ट्रेस थीं, इसलिए दिलीप कुमार की नसीम बानो से मुलाकात होती रहती थी। वो सायरा के बारे में भी जानते थे। जब सायरा ने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने का फैसला किया और निर्माता एस. मुखर्जी ने यह बात दिलीप कुमार से कही तो उन्होंने कहा था कि सायरा को फिल्मों में करियर बनाने से रोका जाना चाहिए। 1960 के दशक की शुरुआत में फिल्म ‘दिल दिया दर्द लिया’ की कास्टिंग शुरू होने वाली थी। इसी दौरान निर्माता एस. मुखर्जी ने दिलीप कुमार से कहा था, “यूसुफ, यह लड़की आपके साथ काम करने के लिए पागल है।” जिस पर दिलीप कुमार ने अपने सफेद-काले बालों में हाथ फेरकर सायरा से कहा था, “क्या तुमने मेरे ये सफेद बाल देखे हैं? मैं तुमसे बहुत ज्यादा उम्र का हूं और मैं सुअर की तरह खाता हूं!” शम्मी कपूर की डांट सुनकर सायरा रोने लगी थीं सायरा बानो की पहली फिल्म 1961 में रिलीज हुई ‘जंगली’ थी। हालांकि फिल्मों में कदम रखने का फैसला उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था। परिवार, खासकर उनकी मां नसीम बानो, इसके खिलाफ थीं, लेकिन सायरा ने अपने इस ख्वाब को छोड़ना मंजूर नहीं किया। उन्होंने स्कूल की छुट्टियों के दौरान ‘जंगली’ की शूटिंग शुरू की। कुछ महीने शूटिंग करने के बाद वह वापस लंदन चली गईं और अपनी पढ़ाई पूरी करने लगीं। लेकिन फिल्म की शूटिंग से लेकर रिलीज तक, कुछ ऐसे वाकये हुए, जिन्होंने सायरा को रुला दिया। दरअसल, सायरा बानो ने फिल्म ‘जंगली’ साइन तो कर ली थी, लेकिन उन्हें एक्टिंग का कोई तजुर्बा नहीं था। शूटिंग के पहले दिन वह कश्मीर के शालीमार बाग पहुंचीं। वहां हजारों लोग शूटिंग देखने के लिए जमा थे। सायरा वैसे भी काफी शर्मीली थीं। उन्हें ‘कश्मीर की कली’ गाने की एक लाइन पर घूमकर लिप-सिंक करना था, लेकिन वह बार-बार गलती कर रही थीं। लिप-सिंक पर ध्यान देतीं, तो गलत दिशा में घूम जातीं। घूमने पर ध्यान देतीं, तो गाने की लाइन छूट जाती। कई रीटेक के बाद शम्मी कपूर ने उन्हें डांटते हुए कहा कि अगर काम करना है, तो ठीक से करो। यह सुनकर सायरा बहुत शर्मिंदा हुईं और रोने लगीं। उनकी बहन ने भी कहा कि अभी वक्त है, चाहो तो एक्टिंग छोड़कर वापस चल सकते हैं, लेकिन सायरा ने हार नहीं मानी। उन्होंने दोबारा वही सीन किया और इस बार बिल्कुल सही कर दिया। लेकिन रिलीज से पहले एक और वाकये ने सायरा को परेशान कर दिया। एक दिन वह अपनी मां के साथ मुंबई की एक दुकान पर गई थीं। वहां एक सेल्समैन दिलीप कुमार का बड़ा फैन था। उसने सायरा की मां से पूछा कि बेटी की फिल्म कब आ रही है? मां ने बताया कि अगले महीने। यह सुनते ही सेल्समैन बोला कि अगले महीने दिलीप कुमार की ‘गंगा जमुना’ भी रिलीज हो रही है। दोनों फिल्में साथ आईं, तो सायरा की फिल्म कौन देखेगा? यह सुनकर सायरा घबरा गईं और वहीं रोने लगीं। उन्हें लगा कि उनकी फिल्म फ्लॉप हो जाएगी। लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा। ‘जंगली’ और ‘गंगा जमुना’ एक हफ्ते के अंतर से रिलीज हुईं और दोनों फिल्मों ने शानदार कामयाबी हासिल की। पार्टी में पहली बार दिलीप कुमार ने नोटिस किया जिस लड़की के साथ काम करने से दिलीप कुमार सालों तक बचते रहे, एक शाम उसी लड़की को देखकर उनका नजरिया हमेशा के लिए बदल गया। दिन आज का था यानी 23 अगस्त, लेकिन साल था 1966। सायरा बानो के जन्मदिन का मौका था और उनकी मां नसीम बानो ने अपने नए बंगले की हाउस वार्मिंग पार्टी भी रखी थी। उस वक्त सायरा फिल्म ‘प्यार मोहब्बत’ की शूटिंग कर रही थीं। शूटिंग खत्म करके जब वह पार्टी में पहुंचीं, तो वहां फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े सितारे मौजूद थे। इसी बीच सायरा की नजर दिलीप कुमार पर पड़ी। नसीम बानो ने उन्हें खास तौर पर पार्टी में बुलाया था। दिलीप साहब सायरा के जन्मदिन में शामिल होने के लिए मद्रास से फ्लाइट लेकर मुंबई पहुंचे थे। दिलीप कुमार ने अपनी ऑटोबायोग्राफी में इस शाम का जिक्र किया है। उन्होंने बताया था कि सायरा उस दिन साड़ी में बेहद खूबसूरत लग रही थीं। उन्हें देखकर पहली बार दिलीप साहब को महसूस हुआ कि जिसे वह अब तक एक छोटी लड़की समझते रहे, वह अब एक खूबसूरत और आत्मविश्वासी युवती बन चुकी है। दोनों ने हाथ मिलाया। यही वह पल था, जब दिलीप कुमार के दिल में सायरा को लेकर एक नया एहसास पैदा हुआ। पार्टी खत्म हुई और दिलीप साहब मद्रास लौट गए, लेकिन अब सायरा उनके जेहन से निकल नहीं रही थीं। इस तरह दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। आठ दिन तक चला रोमांस, फिर सीधे मां से मांगा हाथ सायरा बानो के लिए यह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। जिस दिलीप कुमार को वह बचपन से चाहती थीं, वही अब उनकी जिंदगी में करीब आ चुके थे। दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में सायरा ने बताया था कि दिलीप कुमार मद्रास से मुंबई आते थे। वह सायरा के घर डिनर करते और फिर अपनी शूटिंग के लिए निकल जाते। दोनों के बीच मुलाकातों का यह सिलसिला करीब आठ दिन तक चला। फिर एक दिन दिलीप कुमार ने ऐसा कदम उठाया, जिसकी सायरा ने शायद कभी कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने उनकी मां और दादी से जाकर कहा कि वह उनकी बेटी से शादी करना चाहते हैं। 44 साल के दिलीप कुमार घोड़ी पर सवार होकर पहुंचे थे निकाह के दिन दिलीप कुमार फूलों से सजी कार में सायरा बानो के घर जाना चाहते थे, लेकिन उनके भाइयों और बड़ी बहन सकीना ने उन्हें घोड़ी पर सवार होकर बारात ले जाने के लिए मना लिया। आमतौर पर घर से सायरा के घर तक पहुंचने में सिर्फ दो मिनट लगते थे, लेकिन उस दिन रास्ते में हजारों फैंस की भीड़ जमा थी। इसी वजह से दो मिनट का सफर करीब एक घंटे में पूरा हुआ। दिलीप कुमार घोड़ी पर सवार थे और आगे पृथ्वीराज कपूर, शशि कपूर और नासिर (दिलीप कुमार के छोटे भाई) घोड़ी को संभाल रहे थे। राज कपूर ने शादी में निभाया अपना पुराना वादा दिलीप कुमार और राज कपूर के बीच बेहद गहरी दोस्ती थी। राज कपूर ने कभी मजाक में कहा था कि जिस दिन दिलीप कुमार शादी करेंगे, वह उनके घर घुटनों के बल चलकर आएंगे। 11 अक्टूबर को जब राज कपूर दिलीप कुमार की शादी में पहुंचे तो परिवार ने उन्हें उनका पुराना वादा याद दिलाया। बस फिर क्या था, राज कपूर ने बिना देर किए घुटनों के बल बैठकर चलना शुरू कर दिया। यह देखकर वहां मौजूद मेहमानों के बीच हंसी और खुशी का माहौल बन गया। सायरा बानो ने अपनी 59वीं शादी की सालगिरह पर बताया था कि शादी की तैयारी बहुत कम वक्त में हुई थी। उनका शादी का जोड़ा किसी बड़े डिजाइनर ने नहीं, बल्कि एक लोकल दर्जी ने सिला था। यहां तक कि शादी के कार्ड भी नहीं छपे थे। शादी में मेहमानों की भीड़ इतनी ज्यादा थी कि खाना तक कम पड़ गया। हालात ऐसे हुए कि कुछ लोग शादी की छोटी-छोटी चीजें भी याद के तौर पर साथ ले गए। कोई चम्मच उठा रहा था, तो कोई कांटा अपनी जेब में रख रहा था। अखबार में दिलीप की दूसरी शादी की खबर पढ़ी दिलीप कुमार और सायरा बानो की शादी को 16 साल हो चुके थे। तभी 1982 में उनकी जिंदगी में ऐसा मोड़ आया, जिसने इस रिश्ते की बुनियाद हिला दी। सायरा ने एक समाचार पत्र (टैब्लॉयड ) में पढ़ा कि दिलीप कुमार ने हैदराबाद की अस्मा रहमान नाम की महिला से दूसरी शादी कर ली है। अस्मा दिलीप कुमार की बहनों की दोस्त थीं। जब दिलीप कुमार उनसे मिले थे, तब वह तीन बच्चों की मां थीं। यह खबर सायरा के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी। दिलीप कुमार ने बाद में अपनी आत्मकथा में इस रिश्ते को अपनी जिंदगी की ‘गंभीर गलती’ बताया। उन्होंने लिखा कि सायरा को पहुंची तकलीफ और उनके टूटे भरोसे के लिए वह खुद को कभी माफ नहीं कर सकते। इसके बावजूद सायरा ने रिश्ता खत्म करने का फैसला नहीं लिया। दिलीप कुमार ने अपनी गलती मानी और सायरा से कुछ वक्त मांगा। उन्होंने कहा कि वह अस्मा से कानूनी तौर पर रिश्ता खत्म करना चाहते हैं। 1983 की शुरुआत में अस्मा और दिलीप कुमार का रिश्ता खत्म हो गया। दिलीप कुमार ने अपनी आत्मकथा में सायरा बानो की प्रेग्नेंसी को लेकर भी एक अहम बात बताई थी। उन्होंने लिखा कि उस दौर में यह गलत बात फैलाई गई कि सायरा मां नहीं बन सकती थीं। जबकि सच्चाई कुछ और थी। गर्भवती सायरा बानो बाथरूम में गिर गई थीं दिलीप कुमार के मुताबिक, 1972 में सायरा प्रेग्नेंट हुई थीं, लेकिन जब वो आठ महीने की गर्भवती थीं, तब हाई ब्लड प्रेशर की समस्या के कारण बाथरूम में गिर गई थीं। डॉक्टर समय पर ऑपरेशन नहीं कर सके। इसी दौरान गर्भनाल में फंसने की वजह से बच्चे को बचाया नहीं जा सका। बाद में उन्हें पता चला कि उनका होने वाला बच्चा बेटा था। यह हादसा दोनों के लिए बेहद दर्दनाक था। इसके बाद सायरा ने दोबारा बच्चे की कोशिश नहीं की। उन्होंने इसे ऊपर वाले की मर्जी मानकर स्वीकार कर लिया। बकिंघम पैलेस ले जाकर सायरा को दिया सरप्राइज लंदन में एक दिन सायरा ने दिलीप कुमार से कहा कि काश वे बकिंघम पैलेस जाकर महारानी से मिल पातीं। संयोग से उसी सप्ताह दिलीप कुमार को महारानी की तरफ से एक टी पार्टी का न्योता मिला था। उन्होंने सायरा को कुछ नहीं बताया और उन्हें तैयार करके रोल्स रॉयस से बकिंघम पैलेस ले गए। जब गाड़ी महल के गेट के अंदर पहुंची, तो सायरा को पता चला कि वह सच में क्वीन एलिजाबेथ से मिलने जा रही हैं। दिलीप कुमार सायरा को डराने के लिए पत्थर मारते थे दिलीप कुमार गंभीर और शांत स्वभाव के लिए जाने जाते थे, लेकिन सायरा के साथ वे खूब शरारत करते थे। 1967 में फिल्म पन्हाला में शूटिंग के दौरान रात में बिजली चली जाती थी। ऐसे में दिलीप कुमार चुपचाप बाहर निकल जाते और खिड़की पर छोटे-छोटे पत्थर मारते। सुनसान माहौल में पत्थरों की आवाज सुनकर सायरा और उनका स्टाफ डर से चीखने लगता था। सायरा के लिए मनोज कुमार फिल्म को बंद करने के लिए तैयार थे फिल्म ‘पूरब और पश्चिम’ की शूटिंग के दौरान सायरा बानो की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। उन्हें अल्सरेटिव कोलाइटिस की समस्या हुई थी और इलाज के लिए लंदन जाना पड़ा। इस दौरान फिल्म के डायरेक्टर और एक्टर मनोज कुमार ने सायरा की जगह किसी दूसरी एक्ट्रेस को लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह सायरा के ठीक होने का इंतजार करेंगे। जरूरत पड़ी तो फिल्म को बंद कर देंगे। मनोज कुमार के इस व्यवहार से दिलीप कुमार काफी प्रभावित हुए। सालों बाद जब मनोज कुमार ने ‘क्रांति’ में दिलीप कुमार को काम करने का ऑफर दिया, तो उन्होंने पूरा स्क्रीनप्ले पढ़े बिना ही फिल्म के लिए हां कर दी। दिलीप कुमार ने इसे मनोज कुमार के पुराने एहसान का सम्मान बताया था। सायरा कहती हैं- बेटा होता तो शाहरुख जैसा होता दिलीप कुमार का निधन 7 जुलाई 2021 को हुआ। इसके साथ दोनों का करीब 55 साल का वैवाहिक साथ खत्म हुआ, लेकिन सायरा के लिए दिलीप साहब आज भी उनकी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा हैं। सायरा बानो अक्सर सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और उनसे जुड़ी यादें शेयर करती रहती हैं। सायरा बानो और एक्टर शाहरुख खान का रिश्ता बेहद खास और मां-बेटे जैसा है। सायरा और उनके दिवंगत पति दिलीप कुमार, शाहरुख को हमेशा अपने मुंह-बोले बेटे की तरह मानते थे। सायरा ने कई मौकों पर कहा कि शाहरुख को पहली बार देखने पर उन्हें उनमें दिलीप कुमार की झलक नजर आई थी। वह अक्सर कहती रही हैं कि अगर उनका और दिलीप साहब का बेटा होता, तो वह शाहरुख जैसा होता। दिलीप कुमार के निधन के बाद शाहरुख तुरंत सायरा बानो से मिलने पहुंचे और उन्हें सांत्वना दी। ………….. यह खबर भी पढ़ें… अमजद खान की पुण्यतिथि:डिलीवरी के बाद बीवी को घर लाने के पैसे नहीं थे; ₹1.27 करोड़ की फीस अटकी, परिवार ने अंडरवर्ल्ड की मदद ठुकराई ‘मैं वो आदमी था, जो रोज 4–5 घंटे कसरत करता था। बैडमिंटन खेलता था, फ्री-हैंड एक्सरसाइज करता था, वेट उठाता था... लेकिन फिर एक एक्सीडेंट हुआ और मैं तीन महीने तक बिस्तर पर पड़ा रहा।’ एक पुराने इंटरव्यू में दिवंगत एक्टर अमजद खान ने अपनी जिंदगी का सबसे दर्दनाक दौर याद करते हुए यह बात कही थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…
रेलवे कर्मचारी की बेटी, गायकी से संजय लीला भंसाली को बनाया मुरीद, 1 गाने से रातोंरात बदली किस्मत
हम जिस सिंगर की बात कर रहे हैं, उसके पिता रेलवे में काम करते हैं. उनके माता-पिता को भी गायकी से गहरा लगाव है. सिंगर ने तीन बार इंडियन आइडल में हिस्सा लिया था. मगर रियलिटी शो की ट्रॉफी नहीं जीत पाईं. उन्होंने अपने कुछ गानों से हर किसी को दीवाना बनाया. संजय लीला भंसाली भी उनकी गायकी के मुरीद हैं. उन्हें 1 गाने ने रातोंरात स्टार बना दिया था.
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