Cabinet Mega Approval: रेल और सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 13,000 करोड़ से अधिक की मंजूरी; मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला
देश के आर्थिक विकास को गति देने और 'पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान' के तहत मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार ने बुनियादी ढांचे में बड़ा निवेश किया है। लॉजिस्टिक्स लागत को घटाने, औद्योगिक कॉरिडोर को बंदरगाहों से जोड़ने और यात्री ट्रेनों के समयबद्ध संचालन के लिए रेल नेटवर्क के मल्टी-ट्रैकिंग और आधुनिक राजमार्गों के विस्तार की आवश्यकता लंबे समय से थी।
इसी रणनीति के तहत केंद्रीय कैबिनेट ने पूर्वी भारत, दक्षिणी राज्यों और भारत-नेपाल सीमावर्ती इलाकों के लिए कई बड़ी इंफ्रा परियोजनाओं पर अंतिम मुहर लगाई है।
ओडिशा, बंगाल और दक्षिण भारत में तीसरी और चौथी रेल लाइन की मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में रेल नेटवर्क के विस्तार और भारी ट्रैफिक वाले रेल मार्गों पर कंजेशन घटाने के लिए प्रमुख मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इसके तहत पश्चिम बंगाल और ओडिशा के बीच खड़गपुर-भद्रक (रणिताल) चौथी लाइन परियोजना 3,352 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगी। इसी क्रम में भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन के विस्तार पर 1,583 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
वहीं दक्षिण भारत में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए गुम्मडिपूंडी-गुडूर के बीच तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण पर 2,229 करोड़ रुपये का निवेश होगा।
पारादीप पोर्ट कनेक्टिविटी और माल ढुलाई क्षमता में बड़ा इजाफा
ओडिशा के प्रमुख औद्योगिक और तटीय क्षेत्रों को मजबूती देने के लिए कटक-पारादीप रेल खंड पर तीसरी और चौथी लाइन परियोजना को 2,286 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जाएगा। इस परियोजना से पारादीप बंदरगाह तक कोयला, कच्चा माल और औद्योगिक उत्पादों की आवाजाही बेहद सुगम होगी।
रेलवे लाइनों के इस चौगुनीकरण और मल्टी-ट्रैकिंग से मालगाड़ियों की औसत गति में उल्लेखनीय सुधार होगा और बंदरगाहों से अंतर्देशीय बाजारों तक माल ढुलाई की लागत में बड़ी कमी आएगी।
बिहार में मुजफ्फरपुर से सोनबरसा तक 3,591 करोड़ से बनेगा 4-लेन हाईवे
सड़क परिवहन के मोर्चे पर कैबिनेट ने बिहार में मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी होते हुए सोनबरसा (भारत-नेपाल सीमा) तक चार-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण को स्वीकृति प्रदान की है। इस रणनीतिक सड़क परियोजना पर कुल 3,591 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
यह फोर-लेन कॉरिडोर उत्तर बिहार के सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने के साथ-साथ भारत और नेपाल के बीच सीमा पार व्यापार और धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
लाखों नए रोजगार और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा
पीएम गति शक्ति के तहत स्वीकृत ये परियोजनाएं न केवल विभिन्न राज्यों के बीच निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करेंगी, बल्कि निर्माण और संचालन के दौरान लाखों मानव-दिवस के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर भी पैदा करेंगी। इसके अतिरिक्त, सड़क से रेल मार्ग पर माल ढुलाई के शिफ्ट होने से ईंधन की भारी बचत होगी और देश के कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी, जो भारत के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों को हासिल करने में मददगार साबित होगा।
तमिलनाडु सरकार का यू-टर्न: छात्रों के प्रदर्शनों पर रोक लगाने वाला विवादित आदेश कुछ ही मिनटों में वापस, जानें पूरा मामला
Tamil Nadu News: तमिलनाडु सरकार ने बुधवार, 19 अगस्त को बड़ा यू-टर्न लेते हुए छात्रों को राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने से रोकने वाला विवादित निर्देश को कुछ ही मिनटों के भीतर वापस ले लिया है। इस आदेश को लेकर सियासी गलियारों में काफी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
तमिलनाडु सरकार ने बुधवार को बड़ा यू-टर्न लेते हुए छात्रों को राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने से रोकने वाला विवादित निर्देश कुछ ही मिनटों के भीतर वापस ले लिया। इस आदेश को लेकर सियासी गलियारों में काफी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
सरकार ने वापस लिया विवादित निर्देश
कॉलेजिएट शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए उस आदेश को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया गया है, जिसमें छात्रों और युवाओं को राजनीतिक दलों के विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों में भाग लेने से रोकने के लिए समन्वित कार्रवाई करने को कहा गया था। इस अप्रत्याशित कदम से राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
The Directorate of Collegiate Education (DCE) has directed the School Education Department, Higher Education Department, Police Department, and district administration to coordinate and take joint measures to prevent students and youth from participating in protests and agitation… pic.twitter.com/xUOoHknoNB
— ANI (@ANI) August 19, 2026
क्या था पूरा मामला और क्यों मचा था बवाल?
यह निर्देश सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भेजा गया था, जिसमें स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन को मिलकर यह सुनिश्चित करने को कहा गया था कि छात्र किसी भी तरह के राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों या आंदोलनों में शामिल न हों।
इस निर्देश का उद्देश्य छात्रों को उन प्रदर्शनों में भाग लेने से रोकना था, जिनका आयोजन वाम दलों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा किया जा रहा था। सीजेपी ने हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनों का नेतृत्व किया था।
विपक्षी दलों की कड़ी आपत्ति
इस निर्देश के सामने आते ही सियासी गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। CJP ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए सरकार से इसे तुरंत वापस लेने की मांग की थी। शैक्षिक संस्थानों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को राजनीतिक गतिविधियों में छात्रों की भागीदारी पर नजर रखने के लिए झोंकने को लेकर भी तीखी आलोचना हुई थी।
कुछ ही मिनटों में आदेश हुआ रद्द
बढ़ते राजनीतिक विवाद और आलोचनाओं के बीच, कॉलेजिएट शिक्षा विभाग ने अपने इस पिछले निर्देश को आधिकारिक रूप से वापस ले लिया।
कॉलेजिएट शिक्षा विभाग की संयुक्त निदेशक सिंथिया सेल्वी पी द्वारा जारी एक नए आदेश में स्पष्ट किया गया कि पूर्व में जारी किया गया पत्र पूरी तरह से वापस ले लिया गया है। यह नया पत्र तमिलनाडु के सभी सरकारी कला और विज्ञान कॉलेजों के प्राचार्यों को भेजा गया, जिससे इस विवादित फैसले का अंत हो गया।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi










