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Shubman Gill ने Manav Suthar को बताया 'Team India का भविष्य', Galle में जीता दिल

भारत ने गाले में खेले गए अपने 600वें टेस्ट मैच में श्रीलंका पर 165 रनों से जीत हासिल की। ​​कप्तान शुभमन गिल ने स्पिनर मानव सुथार की तारीफ़ की, जिन्होंने मैच जिताने वाला प्रदर्शन करते हुए दस विकेट लिए। गिल ने सुथार को एक होनहार ऑलराउंडर बताया जो "लंबे समय तक भारत के लिए खेल सकते हैं"। सुथार के दस विकेट श्रीलंका की ज़मीन पर किसी भारतीय खिलाड़ी का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था और जीत में इनकी अहम भूमिका रही।
 

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स्पिन के दिग्गज खिलाड़ी हरभजन सिंह और रविचंद्रन अश्विन का ज़िक्र करते हुए गिल ने कहा कि अपने देश के लिए 600वां टेस्ट मैच जीतना वाकई बहुत खास है। यह हमारे लिए बहुत संतोषजनक जीत रही। मुझे लगता है कि हम अच्छी स्थिति में थे। लेकिन यहाँ आने के बाद, मौसम की वजह से मैच होगा या नहीं, इसे लेकर थोड़ी अनिश्चितता थी, जिससे हम पर थोड़ा दबाव बना। फिर भी, मुझे लगता है कि टीम ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया।

दूसरी पारी में बल्लेबाजी के लड़खड़ाने पर बात करते हुए, जब भारत 193 रन पर ऑल आउट हो गया था, उन्होंने बताया कि टीम का लक्ष्य लगभग 400 रनों की बढ़त हासिल करना था। उन्होंने कहा कि हम तीसरी पारी में थोड़ा और आक्रामक होकर खेलना चाहते थे क्योंकि हमें (आखिरी पारी के लिए) उतने ओवर चाहिए थे, और हमें पक्का नहीं पता था कि चौथे और पांचवें दिन हम कितने ओवर गेंदबाजी कर पाएंगे। तो, हमारी सोच यही थी। और इसी कोशिश में हमने शुरुआत में ही कुछ विकेट गंवा दिए। लेकिन मुझे लगता है कि कुल मिलाकर हम फिर भी अच्छी स्थिति में थे।
 

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गिल ने देवदत्त पडिक्कल की भी तारीफ़ की, जिन्होंने पहली पारी में 167 और दूसरी पारी में 44 रन बनाए और 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' का अवॉर्ड जीता। कप्तान ने कहा कि उन्हें खेलते हुए देखना शानदार था। शतक लगाना ज़रूरी है, लेकिन शतक बनाने के बाद भी... उन्होंने बड़ी पारी खेली। एक कॉम्पिटिटिव मैच में और आरामदायक स्थिति में होने के बावजूद... जिस तरह से उन्होंने दूसरी पारी में बैटिंग की और दबदबा बनाया, वह देखने लायक था। जीत के महत्व पर बात करते हुए गिल ने कहा कि टेस्ट मैच जीतना आसान नहीं होता और यह जीत बहुत सुखद है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फ़ाइनल में खेलना ही सबसे बड़ा लक्ष्य है।
 
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RAW Chief Parag Jain के Dhaka में कदम रखते ही Pakistani ISI की बढ़ गयी बेचैनी, Bangladesh पर पैनी नजर रख रहा है India

रॉ चीफ पराग जैन के ढाका पहुंचने की खबर सुनते ही पाकिस्तानी आईएसआई के पांव तले जमीन खिसक गयी है। हम आपको बता दें कि बांग्लादेश में पाकिस्तान की बढ़ती सक्रियता और ढाका के सैन्य व खुफिया तंत्र से उसके बढ़ते संपर्क के बीच भारत की खुफिया एजेंसी के प्रमुख का वहां पहुंचना बेहद अहम माना जा रहा है। भले ही इस यात्रा को नियमित सुरक्षा संवाद बताया जा रहा हो, लेकिन इसका समय और मौजूदा क्षेत्रीय हालात इसे खास बना देते हैं। भारत साफ तौर पर बांग्लादेश के बदलते राजनीतिक और सुरक्षा समीकरण पर नजर रख रहा है।

रिपोर्टों के मुताबिक रॉ प्रमुख पराग जैन रविवार को चार सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ ढाका पहुंचे। यह यात्रा बांग्लादेश की खुफिया एजेंसी डीजीएफआई के निमंत्रण पर हुई। सोमवार को जैन ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान के रक्षा मामलों के सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. एकेएम शम्सुल इस्लाम से मुलाकात की। भारतीय दल ने बांग्लादेश के अन्य कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों और गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद से भी मुलाकात की।

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इस दौरे का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि पिछले करीब डेढ़ साल में पाकिस्तान के सैन्य और खुफिया अधिकारियों ने ढाका के चक्कर तेजी से बढ़ाए हैं। जनवरी 2025 में आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल असीम मलिक की ढाका यात्रा दशकों बाद किसी पाकिस्तानी खुफिया प्रमुख की ऐसी पहली यात्रा बताई गई थी। इसके बाद बांग्लादेशी सैन्य प्रतिनिधिमंडल ने रावलपिंडी जाकर पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर समेत वायुसेना और नौसेना के प्रमुखों से मुलाकात की। अक्टूबर 2025 में पाकिस्तान के तत्कालीन ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी प्रमुख जनरल साहिर शमशाद मिर्जा के चार दिवसीय ढाका दौरे के बाद पाकिस्तान हाई कमीशन में आईएसआई की एक विशेष सेल बनाए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई।

इसी बीच, भारत के नए हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी की प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात भी बेहद अहम है। रहमान ने भारत के साथ रिश्ते सुधारने के लिए ‘अनुकूल माहौल’ बनाने की जरूरत बताई और ढाका ने भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज करने की मांग दोहराई। हालांकि नई दिल्ली ने कहा है कि वह प्रत्यर्पण अनुरोध को कानूनी और न्यायिक प्रक्रियाओं के तहत देख रहा है।

हम आपको बता दें कि यह मुलाकात ऐसे वक्त हुई जब शेख हसीना ने दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से सार्वजनिक रूप से अपनी पहली बड़ी राजनीतिक प्रतिक्रिया दी और दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का दावा किया। उन्होंने 2024 के सत्ता परिवर्तन को सुनियोजित घटनाक्रम बताया तथा अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा और दमन के गंभीर आरोप लगाए। जवाब में ढाका ने शेख हसीना को भारत से ऐसा मंच मिलने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और इसे बांग्लादेश की संप्रभुता के लिए अपमानजनक बताया। हालांकि भारत ने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम एक निजी संस्था ने आयोजित किया था और सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं थी।

इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी रणनीतिक चिंता पाकिस्तान की बढ़ती मौजूदगी है। विशेषज्ञों के हवाले से रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आईएसआई ने बांग्लादेश में क्षेत्रीय स्तर के कार्यालय जैसी संरचनाएं स्थापित करने की कोशिश की है। साथ ही पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच कराची-चटगांव सीधी समुद्री सेवा बहाल हुई, सीधी वाणिज्यिक उड़ानों का रास्ता खुला और राजनयिकों तथा सैन्य अधिकारियों के लिए वीजा-मुक्त व्यवस्था पर सहमति बनी।

भारत के लिए यह इसलिए गंभीर है क्योंकि दोनों देशों के बीच करीब 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा है। यदि बांग्लादेश में कट्टरपंथी या विदेशी खुफिया नेटवर्क गहराई से जड़ें जमाते हैं तो इसका सीधा असर पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, अवैध घुसपैठ, हथियार और आतंकी नेटवर्क पर पड़ सकता है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की ओर से बांग्लादेश को आतंकवादी खतरे के रूप में लेकर कोई सार्वजनिक ‘रेड फ्लैग’ सामने नहीं आया है।

यहीं रॉ प्रमुख की ढाका यात्रा का सामरिक महत्व सामने आता है। भारत संभवतः बांग्लादेश को किसी एक खेमे में धकेलने की बजाय उसके सुरक्षा तंत्र के साथ प्रत्यक्ष संवाद बनाए रखना चाहता है। देखा जाये तो भारत के लिए बांग्लादेश को नजरअंदाज करना संभव भी नहीं है। भौगोलिक निकटता, व्यापार, कनेक्टिविटी, चिकित्सा सुविधाएं और विकास सहयोग दोनों देशों को एक-दूसरे से जोड़े रखते हैं। दिल्ली बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और बांग्लादेश भारत से विकास सहायता पाने वाला सबसे बड़ा लाभार्थी भी है।

लेकिन चुनौती सिर्फ सुरक्षा की नहीं, बांग्लादेश की आंतरिक दिशा की भी है। रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने सेना और राजनीति में बढ़ते इस्लामी प्रभाव, जमात-ए-इस्लामी की वापसी और पाकिस्तान के साथ बढ़ते संपर्क को लेकर चिंता जताई है। दूसरी ओर, बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था भी उस दौर से गुजर रही है जिसमें शेख हसीना के समय की तेज आर्थिक वृद्धि, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और बढ़ती प्रति व्यक्ति आय के मुकाबले नई परिस्थितियां अधिक अनिश्चित दिखाई देती हैं।

ऐसे में रॉ चीफ का ढाका पहुंचना एक स्पष्ट रणनीतिक संदेश है कि दिल्ली बांग्लादेश के घटनाक्रम को दूर बैठकर नहीं देख रही। पाकिस्तान की आईएसआई हो या कट्टरपंथी नेटवर्क, भारत अपनी पूर्वी सीमा के बदलते सुरक्षा समीकरण पर सीधी नजर रख रहा है। अब असली परीक्षा तारिक रहमान सरकार की है कि वह ढाका को पाकिस्तान का मोहरा बनने देती है या भारत के साथ सुरक्षा, विकास और रणनीतिक हितों का संतुलित रास्ता चुनती है।

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  Sports

इमरान खान के लिए गावस्कर-कपिल देव ने फिर उठाई आवाज, इन 21 कप्तानों ने पाकिस्तान से की ये अपील

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