थरूर बोले- कांग्रेस को CJP से सीखने की जरूरत:जाति-वर्ग से ऊपर उठे; आम भारतीय और मिडिल क्लास के मुद्दों पर ध्यान दे
तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को कहा कि पार्टी को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को जाति और वर्ग से आगे बढ़कर सभी भारतीयों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। कांग्रेस नेतृत्व अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तक पहुंच और जाति आधारित प्रतिनिधित्व पर जोर बढ़ा रहा है। इसी बीच थरूर ने कहा कि पार्टी को जाति, धर्म, वर्ग और दूसरे समूहों से जुड़े हितों से आगे बढ़ने की जरूरत है। News18 को दिए इंटरव्यू में थरूर ने कहा कि कांग्रेस को आम भारतीयों, मध्यवर्गीय भारतीयों, शहरी लोगों और पेशेवरों से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दे जाति और धर्म से अलग सभी भारतीयों को प्रभावित करते हैं। सभी भारतीयों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत थरूर ने कहा, “मैं कुछ समय से कह रहा हूं कि हमें जाति, धर्म, पंथ, आदिवासी या किसी खास समूह जैसे अलग-अलग हितों से आगे बढ़ने की जरूरत है। इसके साथ ही हमें उस क्षेत्र पर भी ज्यादा ध्यान देना चाहिए, जिसे हम नजरअंदाज करते रहे हैं।” उन्होंने कहा, “हमें आम भारतीयों, मध्यवर्गीय भारतीयों, शहरी भारतीयों और पेशेवरों से उन मुद्दों पर बात करनी चाहिए, जो जाति और धर्म की परवाह किए बिना सभी भारतीयों को प्रभावित करते हैं।” थरूर ने कहा कि परीक्षाएं सभी को प्रभावित करती हैं। महंगाई, कीमतों में बढ़ोतरी और शहरों की खराब नागरिक सुविधाओं जैसी समस्याओं का सामना लोग रोज करते हैं। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी ने सही कहा है कि शिक्षा मध्यवर्ग के लिए महंगी हो गई है। हमें ऐसे मुद्दों तक भी पहुंचना होगा, जो हर व्यक्ति को प्रभावित करते हैं, चाहे उसका धर्म या जाति कुछ भी हो।” जंतर-मंतर पर CJP ने जाति-धर्म से अलग मुद्दा उठाया CJP के प्रदर्शनों पर थरूर ने कहा कि जंतर-मंतर पर पार्टी ने ऐसा मुद्दा उठाया, जिसका जाति, धर्म, भाषा, राज्य या पंथ से कोई संबंध नहीं था। इसके चलते उसे हर जगह से समर्थन मिला। उन्होंने कहा, “सभी राजनीतिक दलों को इससे सीखने की जरूरत है। मेरा निजी विचार है कि यह एक सीख है, जिसे हम अपना सकते हैं। मैं किसी पार्टी की ओर से नहीं बोल रहा हूं और न ही किसी पार्टी के खिलाफ बोल रहा हूं।” कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) व्यंग्य पर आधारित एक आंदोलन है। इसे अभिजीत दिपके ने CJI सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद शुरू किया था। CJP ने NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इसके बाद देशभर में प्रदर्शन हुए और अंत में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। थरूर ने कांग्रेस के प्रदर्शन में शामिल होने की वकालत की थी जब थरूर से पूछा गया कि क्या कांग्रेस को CJP के प्रदर्शन में आधिकारिक तौर पर शामिल होना चाहिए था, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी के प्रदर्शन में शामिल होने की वकालत की थी। उन्होंने कहा, “मैंने सुझाव दिया था कि हमें इसमें शामिल होना चाहिए। CJP का प्रदर्शन और सोनम वांगचुक का अनशन, दोनों ही लोगों की कल्पना और ध्यान खींचने में सफल रहे।” थरूर ने बताया कि उन्हें कहा गया था कि कांग्रेस के प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की वजह CJP नेतृत्व का एक पत्र था। यह पत्र कांग्रेस पार्टी को भेजा गया था और इसमें कुछ आपत्तिजनक बातें कही गई थीं। उन्होंने कहा, “इस वजह से कांग्रेस ने उनसे अलग रहने का फैसला किया। आप इसे समझ सकते हैं, हर संस्था का अपना संस्थागत हित होता है। अगर कांग्रेस को लगा कि ये लोग एक संस्था के तौर पर कांग्रेस के खिलाफ हैं, तो कांग्रेस उनके नाम के साथ क्यों जुड़े?”
बांग्लादेश में 2 साल में 457 फैक्ट्रियां बंद:2026 में 62 हजार नौकरियां गईं, गैस संकट से 800 कंपनियों के बंद होने का खतरा
बांग्लादेश के उद्योगों पर संकट गहराता जा रहा है। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो साल में देश के 7 प्रमुख औद्योगिक इलाकों में 457 औद्योगिक इकाइयां स्थायी रूप से बंद हो चुकी हैं। इनमें 108 गारमेंट उद्योग से जुड़ी यूनिट्स शामिल हैं। फैक्ट्रियां बंद होने का सीधा असर रोजगार पर पड़ा है। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच 95 फैक्ट्रियां बंद हुईं और 61,881 लोगों की सीधी नौकरी चली गई। बंद फैक्ट्रियों का संकट सिर्फ कपड़ा उद्योग तक सीमित नहीं पिछले दो साल में बंद हुई 457 फैक्ट्रियों में कपड़ा और गारमेंट से जुड़ी फैक्ट्रियों के साथ दूसरे उद्योगों की इकाइयां भी शामिल हैं। इनमें 287 इकाइयां अन्य मैन्युफैक्चरिंग कारोबार से जुड़ी थीं। यानी बांग्लादेश में उद्योगों की मुश्किल किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है। बढ़ती लागत और ऊर्जा संकट का असर अलग-अलग तरह के कारखानों पर पड़ रहा है। गैस की कमी ने संकट और बढ़ाया सबसे बड़ी परेशानी ऊर्जा की कमी को लेकर है। अगस्त की शुरुआत में गाजीपुर में गैस का दबाव इतना कम हो गया कि 700 से 800 फैक्ट्रियों में काम रोकना पड़ा या कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजना पड़ा। गैस की कमी से बॉयलर और दूसरी मशीनें पूरी क्षमता से नहीं चल पातीं। इससे उत्पादन घटता है और फैक्ट्रियों के लिए विदेशी खरीदारों के ऑर्डर समय पर पूरा करना मुश्किल हो जाता है। दूसरे देशों का रुख कर सकते हैं विदेशी खरीदार गैस की कमी से अभी जो फैक्ट्रियां बंद हैं, उनके लिए ज्यादा दिन तक काम रोकना मुश्किल हो सकता है। फैक्ट्री बंद होने के बाद भी कर्मचारियों की तनख्वाह, बैंक का कर्ज और बाकी खर्च देने पड़ते हैं। गैस की जगह डीजल या एलपीजी से काम चलाने पर खर्च और बढ़ जाता है। ऐसे में अगर संकट लंबा चला तो कई फैक्ट्रियों के लिए दोबारा काम शुरू करना मुश्किल हो सकता है। ऊर्जा संकट का असर सिर्फ फैक्ट्रियों में कामकाज पर नहीं पड़ रहा है। इससे बांग्लादेश के लिए विदेशी कंपनियों से कारोबार हासिल करना भी मुश्किल हो रहा है। अगर फैक्ट्रियां समय पर ऑर्डर पूरा नहीं कर पाईं तो विदेशी खरीदार दूसरे देशों का रुख कर सकते हैं। इससे बांग्लादेश की फैक्ट्रियों की कमाई घटेगी और कर्मचारियों की तनख्वाह, कर्ज और बाकी खर्च संभालना और मुश्किल हो जाएगा। गैस नहीं मिली तो कपड़ा उद्योग पर और संकट बांग्लादेश के निर्यात कारोबार में कपड़ा और तैयार कपड़ों का बड़ा हिस्सा है। इनके लिए धागा बनाने, कपड़े की रंगाई और दूसरे शुरुआती काम करने वाली फैक्ट्रियां जरूरी हैं। अगर इन्हें पर्याप्त गैस नहीं मिली तो आगे तैयार कपड़े बनाने वाली फैक्ट्रियों का काम भी प्रभावित होगा। इसी वजह से उद्योग संगठनों ने इन इकाइयों को गैस सप्लाई में प्राथमिकता देने की मांग की है। उद्योग संगठनों ने सरकार से यह भी कहा है कि फैक्ट्रियों को रोजाना गैस की उपलब्धता और दबाव की जानकारी दी जाए, ताकि वे उसी हिसाब से उत्पादन की तैयारी कर सकें। इसके अलावा गैस संकट से परेशान छोटी और मझोली फैक्ट्रियों को बैंक कर्ज चुकाने में कुछ समय की राहत देने और मजदूरों से जुड़े विवाद जल्द सुलझाने की मांग की गई है। आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि गैस और बिजली का संकट कब तक बना रहता है। अभी कई फैक्ट्रियां कम क्षमता पर चल रही हैं। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे और विदेशी ऑर्डर भी कमजोर रहे, तो आर्थिक दबाव झेल रही कई और फैक्ट्रियां बंद हो सकती हैं। इसका असर सिर्फ रोजगार पर नहीं पड़ेगा। स्थानीय कारोबार और बांग्लादेश की निर्यात कमाई भी प्रभावित हो सकती है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 











