Vivo T5 Pro फिर हुआ महंगा: एक झटके में 7,000 रुपए तक बढ़ी कीमत, अब चुकाने होंगे इतने पैसे
Vivo T5 Pro Price Hike: Vivo T5 Pro खरीदने का प्लान बना रहे ग्राहकों के लिए बुरी खबर है। कंपनी ने भारत में अपने इस स्मार्टफोन की कीमत में एक बार फिर बड़ा इजाफा कर दिया है। इस बार फोन की कीमत 7,000 रुपये तक बढ़ाई गई है, जो अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। खास बात यह है कि कीमत बढ़ने के बावजूद फोन के हार्डवेयर और स्पेसिफिकेशंस में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
Vivo T5 Pro की नई कीमत
कीमत में बढ़ोतरी के बाद 8GB RAM + 128GB स्टोरेज वाला मॉडल अब 35,999 रुपये की जगह 41,999 रुपये में मिलेगा। वहीं, 8GB + 256GB वेरिएंट की कीमत 39,999 रुपये से बढ़कर 46,999 रुपये हो गई है। यानी दोनों वेरिएंट पर सीधे 6,000 रुपये और 7,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
दिलचस्प बात यह है कि रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल Amazon पर 8GB + 128GB वेरिएंट 39,999 रुपये में लिस्टेड देखा गया है। यानी कुछ समय के लिए यह नई कीमत लागू होने से पहले की कीमत पर मिल सकता है। हालांकि, विक्रेता की ओर से कीमत अपडेट किए जाने के बाद यह बदल सकती है।
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लॉन्च के बाद तीसरी बार बढ़ी कीमत
Vivo T5 Pro को भारत में अप्रैल में लॉन्च किया गया था। उस समय 8GB + 128GB मॉडल की शुरुआती कीमत 29,999 रुपये, जबकि 8GB + 256GB वेरिएंट की कीमत 33,999 रुपये थी। इसके बाद फोन की कीमत में लगातार तीन बार बढ़ोतरी हो चुकी है। जून में 3,000 रुपये, जुलाई में फिर 3,000 रुपये और अब तीसरी बार कीमत में 7,000 रुपये तक का इजाफा किया गया है।
इस तरह लॉन्च कीमत की तुलना में 128GB मॉडल अब कुल 12,000 रुपये महंगा हो चुका है। वहीं, 256GB वेरिएंट की कीमत में कुल 13,000 रुपये की बढ़ोतरी हो गई है।
क्यों बढ़ रही है Vivo T5 Pro की कीमत?
Vivo ने अभी तक कीमत में इस नए इजाफे की आधिकारिक वजह नहीं बताई है। हालांकि, मौजूदा समय में स्मार्टफोन इंडस्ट्री में DRAM और NAND मेमोरी की बढ़ती कीमतों को इसकी संभावित वजह माना जा रहा है। AI डेटा सेंटर की बढ़ती मांग के कारण मेमोरी कंपोनेंट्स की डिमांड बढ़ी है, जिसका असर स्मार्टफोन की कीमतों पर भी पड़ रहा है।
पहले Vivo T5 Pro की कीमत में हुई बढ़ोतरी अपेक्षाकृत कम थी, लेकिन इस बार 7,000 रुपये तक की बढ़ोतरी ने फोन को एक अलग प्राइस सेगमेंट में पहुंचा दिया है।
Delhi Master Plan 2047: टीओडी क्षेत्र के पट्टा भूखंड होंगे फ्रीहोल्ड, DDA ने तय किए नियम
दिल्ली मास्टर प्लान-2047 के तहत ‘ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट’ (टीओडी) के अंतर्गत आने वाले व्यक्तिगत भूखंडों को फ्रीहोल्ड में बदला जा सकेगा। इस पहल का मकसद निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने सहित अन्य लक्ष्यों को हासिल करना है। ‘फ्रीहोल्ड’ दर्जा मिलने के बाद संबंधित जमीन और उस पर बने ढांचे का पूर्ण तथा स्थायी स्वामित्व मालिक के पास होगा।
वहीं, पट्टा व्यवस्था में जमीन का स्वामित्व दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) जैसी सरकारी संस्था के पास रहता है और पट्टाधारक को केवल उसके इस्तेमाल का अधिकार मिलता है। मास्टर प्लान के अनुसार, पूरे टीओडी क्षेत्र को विकास क्षेत्र घोषित किया जाएगा, जिससे इस गलियारे में परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया में तेजी आएगी। दिल्ली मास्टर प्लान -2047 में कहा गया, ‘‘समेकित टीओडी भूखंड का हिस्सा पट्टे के आधार रहने वाले व्यक्तिगत भूखंड सभी बकाया राशि के भुगतान और मंजूरी की शर्त पर फ्रीहोल्ड माने जाएंगे।
हालांकि, पट्टे पर दिए गए संस्थागत भूखंडों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।’’ मास्टर प्लान के अनुसार, टीओडी परियोजनाओं की मंजूरी और भवन योजनाओं को स्वीकृति डीडीए नोडल एजेंसी देंगी। दिल्ली में वर्तमान में कई संपत्तियां पट्टा व्यवस्था के तहत हैं, जिसमें जमीन का स्वामित्व डीडीए के पास रहता है। लेकिन दिल्ली मास्टर प्लान-2047 पट्टा व्यवस्था से मुक्त होकर फ्रीहोल्ड स्वामित्व का रास्ता तैयार करता है।
डीडीए ने शनिवार को जारी बयान में कहा, ‘‘दिल्ली मास्टर प्लान-2047 में 30 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों को अधिसूचित कर उनका विकास सीधे डीडीए करेगा। नए शहरी क्षेत्रों को आत्मनिर्भर पड़ोस के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाएं, पार्क, हरित क्षेत्र, व्यावसायिक केंद्र और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
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