Jharkhand: रांची यूनिवर्सिटी के नाम बड़ी उपलब्धि, 4 शोध परियोजनाओं को मिले 25.45 लाख रुपये
Jharkhand: झारखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार परिषद (जेसीएसटीआई) और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से राज्य के शैक्षणिक और शोध संस्थानों के लिए बड़ी घोषणा की गई है. 19 अगस्त को जारी स्वीकृति आदेश के तहत राज्य में कुल 45 शोध परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. इनमें रांची विश्वविद्यालय की चार शोध परियोजनाएं भी शामिल हैं.
रांची विश्वविद्यालय को मिली बड़ी उपलब्धि
रांची विश्वविद्यालय से जुड़े शोधकर्ताओं की चार परियोजनाओं के लिए कुल 25 लाख 45 हजार रुपये की राशि मंजूर की गई है. तकनीकी और इंजीनियरिंग संस्थानों को अलग रखने पर राज्य के सामान्य विश्वविद्यालयों में स्वीकृत शोध परियोजनाओं के लिए यह सबसे अधिक राशि है. विश्वविद्यालय के अनुसार, यह उपलब्धि यहां शोध, नवाचार और अलग-अलग विषयों को जोड़कर किए जा रहे अनुसंधान की बढ़ती संस्कृति को दिखाती है. रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने सभी परियोजना अन्वेषकों और शोध टीमों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने प्रतियोगी शोध परियोजनाओं के लिए सफलतापूर्वक प्रस्ताव तैयार किए हैं. इससे पता चलता है कि विश्वविद्यालय में शोध और नए प्रयोगों को बढ़ावा देने का माहौल मजबूत हो रहा है.
खनन प्रभावित पानी पर होगा शोध
रसायन शास्त्र विभाग की डॉ. स्मृति सिंह इस परियोजना में सह-अन्वेषक हैं. इस परियोजना के मुख्य अन्वेषक मारवाड़ी कॉलेज, रांची के रसायन शास्त्र विभाग के शिवनंदन राम हैं. इस शोध में झारखंड के खनन प्रभावित इलाकों के पानी से भारी धातुओं को हटाने के लिए नई नैनो सामग्री विकसित करने पर काम किया जाएगा. इसका उद्देश्य पानी को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में समाधान तलाशना है.
मुंह के कैंसर पर शोध
रांची विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग के डॉ. नीरज भी एक शोध परियोजना में सह-अन्वेषक हैं. इसके मुख्य अन्वेषक एनआईटी जमशेदपुर के रसायन शास्त्र विभाग के डॉ. तितास कुमार मुखोपाध्याय हैं. इस परियोजना में मुंह के कैंसर से जुड़े प्रोटीन लक्ष्यों का कंप्यूटर की मदद से अध्ययन किया जाएगा. साथ ही झारखंड में सुरक्षित और लक्षित कीमोथेरेपी के लिए नई नैनो तकनीक विकसित करने की रणनीति पर काम होगा.
परागण करने वाले कीटों की विविधता पर अध्ययन
जंतु विज्ञान विभाग के डॉ. आनंद कुमार ठाकुर इस परियोजना के मुख्य अन्वेषक हैं. इसमें रांची पठार के कृषि-पारिस्थितिकी तंत्र में रात के समय फूलों से मकरंद लेने वाले और परागण करने वाले कीटों का अध्ययन किया जाएगा. शोध में इन कीटों की विविधता, पर्यावरण में उनकी भूमिका, आपसी संबंध और आंत में मौजूद माइक्रोबायोटा का भी अध्ययन किया जाएगा.
हड्डियों के इलाज में उपयोगी सामग्री पर शोध
जंतु विज्ञान विभाग के डॉ. रोहित श्रीवास्तव इस परियोजना में सह-अन्वेषक हैं. इसके मुख्य अन्वेषक एनआईएएमटी, रांची के डॉ. रविंदर पाल सिंह हैं. इस शोध में ग्राफीन आधारित ऐसी जैव-अवशोषण योग्य सामग्री तैयार करने पर काम होगा, जिसका इस्तेमाल भविष्य में हड्डियों से जुड़े इलाज में किया जा सके. इन चार परियोजनाओं से रांची विश्वविद्यालय में शोध और नवाचार को नई दिशा मिलने की उम्मीद है.
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