CJI Surya Kant ने Justice Sanjay Karol को दी विदाई, कार्यशैली व मानवीय दृष्टिकोण की प्रशंसा की
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को न्यायमूर्ति संजय करोल को उनके कार्यकाल के आखिरी दिन विदाई दी। उन्होंने न्यायमूर्ति करोल की एक ऐसे न्यायाधीश के तौर पर प्रशंसा की, जिनका करियर ‘‘कानून के प्रति गंभीरता, लोगों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रवैये और अपने पद के प्रति अटूट सम्मान’’ से भरा रहा। न्यायमूर्ति करोल, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की एक औपचारिक पीठ की अध्यक्षता करते हुए, प्रधान न्यायाधीश ने सेवानिवृत्त हो रहे न्यायाधीश के साथ अपने लंबे पेशेवर जुड़ाव का जिक्र किया।
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प्रधान न्यायाधीश ने याद किया कि वह उन्हें पहले बार के सदस्य के तौर पर, फिर साथी महाधिवक्ता के तौर पर, उसके बाद हिमाचल प्रदेश में साथी के तौर पर और आखिर में उच्चतम न्यायालय में साथी न्यायाधीश के तौर पर जानते थे। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘बार न्यायमूर्ति करोल को सिर्फ उनके फैसलों के लिए ही नहीं, बल्कि उनके धैर्य, विनम्रता, सुनने की इच्छा और अदालत कक्ष में उनकी मौजूदगी से मिलने वाले भरोसे के अहसास के लिए भी याद करती है। शायद, न्यायिक पद पर रहने वाले किसी व्यक्ति को दिए जा सकने वाला यह सबसे अच्छा सम्मान है।’’ न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने न्यायमूर्ति करोल के प्रशासनिक कामकाज के बारे में भी बात की।
प्रधान न्यायाधीश ने बताया कि त्रिपुरा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर, न्यायमूर्ति करोल ने अनुशासित वाद सूची, मुकदमों की फाइलों पर लगातार ध्यान देने और खुद कुछ अहम मुकदमे संभालने के जरिए, 10 महीनों के भीतर लंबित मामलों की संख्या 60,000 से घटाकर 27,000 से कम कर दी थी। वहीं, न्यायमूर्ति संजय करोल ने शनिवार को अपने विदाई भाषण में कहा कि न्यायाधीश भगवान नहीं होते और उनसे भी फैसले में गलती हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायाधीश के तौर पर काम करने के लिए कुछ हद तक विनम्रता और हर वादी के पीछे छिपे वास्तविक इंसान को देखने की क्षमता जरूरी है।
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न्यायमूर्ति करोल ने कहा, ‘‘संविधान हमसे सिर्फ कानून को सही ढंग से लागू करने के लिए नहीं कहता। वह हमसे इसे न्यायपूर्ण ढंग से लागू करने के लिए कहता है। शायद इसीलिए, फैसला करने की जिम्मेदारी मुझे हमेशा महज यह तय करने से कहीं बड़ी लगी है कि कानूनी तौर पर कौन सही है।
Murugan Temple में आदि उत्सव पर 1 करोड़ रुपये से अधिक नकद और सोना-चांदी चढ़ा
तमिलनाडु में तिरुत्तनी के अरुलमिगु सुब्रमण्यस्वामी मंदिर में हाल में हुए 11 दिवसीय ‘आदि’ उत्सव के दौरान भक्तों की ओर से दिए गए चढ़ावे में भारी बढ़ोतरी देखी गई। इस अवधि में मंदिर को एक करोड़ रुपये से अधिक नकदी और बड़ी मात्रा में कीमती धातुएं प्राप्त हुईं। एक अधिकारी ने बताया कि मंदिर को दान पेटियों से कुल 1,05,54,389 रुपये नकद, 293 ग्राम सोना और 7,153 ग्राम चांदी प्राप्त हुई है।
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उन्होंने कहा कि आदि कार्तिगई और नौका उत्सव के कारण चढ़ावे में यह बढ़ोतरी हुई। चढ़ावे में हुई इस अभूतपूर्व वृद्धि का कारण तमिलनाडु के विभिन्न जिलों और पड़ोसी राज्यों से आने वाले हजारों तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ को माना जा रहा है। भगवान मुरुगन को समर्पित एक प्रतिष्ठित वार्षिक उत्सव आदि कार्तिगई और थेप्पा थिरुविझा (नौका उत्सव) के शुभ अवसर के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई।
यह त्योहार तब मनाया जाता है जब तमिल महीने आदि (मध्य जुलाई से मध्य अगस्त) में कृत्तिका नक्षत्र का योग बनता है। हिंदू परंपरा के अनुसार, यह दिन भगवान मुरुगन की दिव्य उत्पत्ति के सम्मान में मनाया जाता है, जिनका जन्म के बाद छह कृत्तिका कन्याओं द्वारा पालन-पोषण किया गया था। चेन्नई से लगभग 93 किलोमीटर दूर तिरुवल्लूर जिले में स्थित तिरुत्तनी मंदिर राज्य का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, जहां तिरुपति जाने वाले तीर्थयात्री अक्सर आते हैं।
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यह प्राचीन मंदिर भगवान मुरुगन का पांचवां निवास स्थान है।
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