Murugan Temple में आदि उत्सव पर 1 करोड़ रुपये से अधिक नकद और सोना-चांदी चढ़ा
तमिलनाडु में तिरुत्तनी के अरुलमिगु सुब्रमण्यस्वामी मंदिर में हाल में हुए 11 दिवसीय ‘आदि’ उत्सव के दौरान भक्तों की ओर से दिए गए चढ़ावे में भारी बढ़ोतरी देखी गई। इस अवधि में मंदिर को एक करोड़ रुपये से अधिक नकदी और बड़ी मात्रा में कीमती धातुएं प्राप्त हुईं। एक अधिकारी ने बताया कि मंदिर को दान पेटियों से कुल 1,05,54,389 रुपये नकद, 293 ग्राम सोना और 7,153 ग्राम चांदी प्राप्त हुई है।
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उन्होंने कहा कि आदि कार्तिगई और नौका उत्सव के कारण चढ़ावे में यह बढ़ोतरी हुई। चढ़ावे में हुई इस अभूतपूर्व वृद्धि का कारण तमिलनाडु के विभिन्न जिलों और पड़ोसी राज्यों से आने वाले हजारों तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ को माना जा रहा है। भगवान मुरुगन को समर्पित एक प्रतिष्ठित वार्षिक उत्सव आदि कार्तिगई और थेप्पा थिरुविझा (नौका उत्सव) के शुभ अवसर के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई।
यह त्योहार तब मनाया जाता है जब तमिल महीने आदि (मध्य जुलाई से मध्य अगस्त) में कृत्तिका नक्षत्र का योग बनता है। हिंदू परंपरा के अनुसार, यह दिन भगवान मुरुगन की दिव्य उत्पत्ति के सम्मान में मनाया जाता है, जिनका जन्म के बाद छह कृत्तिका कन्याओं द्वारा पालन-पोषण किया गया था। चेन्नई से लगभग 93 किलोमीटर दूर तिरुवल्लूर जिले में स्थित तिरुत्तनी मंदिर राज्य का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, जहां तिरुपति जाने वाले तीर्थयात्री अक्सर आते हैं।
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यह प्राचीन मंदिर भगवान मुरुगन का पांचवां निवास स्थान है।
Karnataka IAS Officer ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार लापता, बेंगलुरु एयरपोर्ट पर मिली आखिरी लोकेशन
कर्नाटक के आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के कथित तौर पर लापता होने और उनके परिवार तथा अन्य लोगों से संपर्क में नहीं होने की जानकारी सामने आई है। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने शनिवार को इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि सरकार को मामले की जानकारी मिली है, लेकिन उनके परिवार या किसी अन्य व्यक्ति की ओर से अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।
उन्होंने कहा कि मिली जानकारी के अनुसार, अधिकारी की आखिरी ‘लोकेशन’ केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मिली थी और मामले की जांच की जा रही है। गंगवार फिलहाल उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। सूत्रों के मुताबिक, वह 20 अगस्त से संपर्क में नहीं हैं और उन्होंने दिल्ली जाने के लिए विमान का टिकट बुक कराया था।
खरगे ने संवाददाताओं से कहा, जानकारी कुछ दिन पहले मिली थी। उनके परिवार या किसी अन्य व्यक्ति की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। आज सुबह से मीडिया में भी इस संबंध में खबरें आ रही हैं।
उन्होंने कहा, उनसे संपर्क के सभी माध्यम बंद हैं और वह उपलब्ध नहीं हैं। फिलहाल हमें जानकारी है कि उनकी आखिरी ‘लोकेशन’ केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मिली थी। हवाई अड्डे से हमें कुछ जानकारी मिली है और हम इसकी जांच कर रहे हैं।
जांच जारी है और आगे की कार्रवाई के बारे में बाद में फैसला किया जाएगा। वर्ष 2016 बैच के आईएएस अधिकारी गंगवार इससे पहले कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) में परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्यरत थे। इस साल मार्च में उन्हें इस पद से हटा दिया गया था।
हालांकि, आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि उनके लापता होने की घटना को केपीएससी में उनके कार्यकाल के दौरान हुए घटनाक्रम से जोड़ने वाली खबरों की फिलहाल पुष्टि नहीं की जा सकती। एक अन्य सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को केपीएससी के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार को निलंबित करने और उनके खिलाफ जांच शुरू करने की सिफारिश राज्यपाल थावरचंद गहलोत से करने का फैसला किया है। साहूकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं।
उनकी बेटी का कथित तौर पर फर्जी आय प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी के लिए चयन किए जाने के मामले में उन पर भाई-भतीजावाद के भी आरोप हैं। खरगे ने कहा, राज्यपाल ने 13 जुलाई को उन्हें (साहूकार) निलंबित किया था, जिसके खिलाफ वह उच्च न्यायालय गए थे। अदालत ने राज्यपाल से सरकार की सहायता और सलाह के अनुसार फैसला करने को कहा था।
मंत्रिमंडल ने कल इस मामले पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि केपीएससी में भर्ती और उससे जुड़े बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के पूरे प्रकरण पर जनता में चर्चा हो रही है और इससे युवाओं के भविष्य पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि लोग इस मामले में जवाब मांग रहे हैं और भाजपा की भूमिका तथा केपीएससी अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
मंत्री ने कहा, लोगों की भावनाओं को समझते हुए हमने राज्यपाल के पहले के निलंबन के फैसले के अनुरूप चलने का निर्णय लिया है और राज्यपाल को इसी आशय की सहायता और सलाह दी है। हमने पूरे मामले की जांच पर भी चर्चा की है। राज्यपाल ने साहूकार को 13 जुलाई को महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा नहीं करने और दुर्व्यवहार के आरोपों में निलंबित किया था।
हालांकि, 18 अगस्त को उच्च न्यायालय ने उन्हें बहाल करने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि राज्यपाल का फैसला मंत्रिमंडल की सहायता और सलाह के आधार पर नहीं लिया गया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को केपीएससी, साहूकार, आयोग सदस्य शांता होसामणि और कुछ अन्य लोगों के परिसरों की तलाशी ली थी।
यह कार्रवाई पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती परीक्षा में कथित घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले की जांच के तहत की गई थी।
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