UN में पहली बार महिला चीफ बन सकती है:रेस में अभी 8 दावेदार, इनमें 5 महिलाएं; गुयाना की बिर्केट सबसे आगे
UN के 80 साल के इतिहास में पहली बार कोई महिला महासचिव बन सकती है। फिलहाल इस रेस में कुल 8 दावेदार हैं। इनमें 5 महिलाएं हैं। शुक्रवार को हुई दूसरे दौर की अनौपचारिक वोटिंग में गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट सबसे आगे हैं। वहीं दूसरे पायदान पर कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन हैं। संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा पांच साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को खत्म होगा। इसलिए अगला महासचिव चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। UN महासचिव का चुनाव कैसे होता है? महासचिव बनने के लिए UNSC के स्थायी सदस्यों का साथ जरूरी वोटिंग की प्रक्रिया अनौपचारिक वोटिंग में UNSC के 15 सदस्य हर उम्मीदवार के लिए अपनी राय देते हैं। इसमें तीन विकल्प होते हैं: 1. समर्थन 2. विरोध 3. कोई राय नहीं इसका मतलब यह है कि हर देश को उम्मीदवार के पक्ष या विपक्ष में ही वोट देना जरूरी नहीं है। वह 'कोई राय नहीं' भी चुन सकता है। जैसे 30 जुलाई की पहली अनौपचारिक वोटिंग में रेबेका ग्रिन्सपैन को सबसे ज्यादा समर्थन मिला था। उन्हें 10 देशों का समर्थन, 1 का विरोध और 4 देशों ने कोई राय नहीं दी थी। 21 अगस्त की अनौपचारिक वोटिंग में कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट सबसे आगे रहीं। उन्हें 8 देशों का समर्थन, 3 का विरोध और 4 देशों ने कोई राय नहीं दी। हालांकि इन वोटिंग के ये आंकड़े अंतिम चुनाव के नतीजे नहीं होते। इनका मकसद सिर्फ यह पता लगाना होता है कि कौन उम्मीदवार सबसे मजबूत स्थिति में है और किसके नाम पर UNSC में सहमति बन सकती है। विकसित देशों से महासचिव क्यों नहीं बनता ? 1. हर इलाके को मौका देने की कोशिश संयुक्त राष्ट्र में यह कोशिश रहती है कि महासचिव का पद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के देशों को मिलता रहे। यानी हर बार एक ही इलाके के व्यक्ति को यह पद न मिले। इससे बाकी देशों को भी लगता है कि संयुक्त राष्ट्र सबका है। 1997 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भी कहा था कि महासचिव चुनते समय अलग-अलग क्षेत्रों को मौका देने और महिला-पुरुष बराबरी का ध्यान रखा जाना चाहिए। हालांकि, यह कोई पक्का नियम नहीं है। 2. महासचिव किसी एक बड़े देश का आदमी न लगे महासचिव को पूरी दुनिया का चेहरा माना जाता है। इसलिए अगर अमेरिका या चीन जैसी बड़ी ताकत के किसी बड़े नेता को यह पद मिल जाए, तो दूसरे देशों को डर हो सकता है कि संयुक्त राष्ट्र पर उस देश का असर बढ़ जाएगा। इसी वजह से ऐसे व्यक्ति को प्रायोरिटी मिलती है, जिसे किसी एक बड़ी ताकत के करीब न माना जाए। 3. एशिया-अफ्रीका के देशों की संख्या ज्यादा संयुक्त राष्ट्र में कुल 193 देश हैं। इनमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के बहुत से देश हैं। इन देशों की भी इच्छा रहती है कि संयुक्त राष्ट्र का मुखिया सिर्फ यूरोप या अमेरिका की सोच वाला न हो, बल्कि दुनिया के बाकी हिस्सों की आवाज भी समझता हो। लेकिन ऐसा नहीं है कि विकसित देशों के लोगों को कभी मौका ही नहीं मिला। 1991 में कनाडा, नीदरलैंड और नॉर्वे के उम्मीदवार भी महासचिव पद की दौड़ में थे। 2016 में पुर्तगाल के एंतोनियो गुटेरेस महासचिव बने। उस समय पूर्वी यूरोप से महासचिव बनाने की मांग भी काफी जोर पकड़ रही थी। 2006 में शशि थरूर भी भारत से दावेदार रहे भारत के सांसद शशि थरूर भी UN महासचिव पद के दावेदार रह चुके हैं। 2006 में मनमोहन सिंह सरकार ने उन्हें UN महासचिव पद के लिए उम्मीदवार बनाया था। थरूर 1978 से UN में काम कर रहे थे। भारत ने उनके लंबे UN अनुभव और अंतरराष्ट्रीय मामलों की समझ को उनकी ताकत बताया। साथ ही, भारत ने कहा कि अब अगला महासचिव एशिया से होना चाहिए। भारत ने दुनियाभर में थरूर के लिए समर्थन जुटाया। मनमोहन सिंह ने कई देशों के नेताओं को पत्र लिखे, जबकि थरूर ने खुद भी अलग-अलग देशों के नेताओं से मुलाकात की। हालांकि, वे अमेरिका के विरोध की वजह से महासचिव नहीं बन सके। 2006 में हुई हर अनौपचारिक वोटिंग में थरूर दक्षिण कोरिया के बान की-मून के बाद दूसरे नंबर पर रहे। 2 अक्टूबर की आखिरी वोटिंग में थरूर को 10 देशों समर्थन मिला, लेकिन 3 देशों ने उनके खिलाफ वोट दिया। इनमें अमेरिका भी शामिल था। अमेरिका सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और उसके पास वीटो पावर है। ------------------ यह खबर भी पढ़ें… UN में चीफ गुटेरेस की जगह किसे मिलेगी:आज दूसरे दौर की वोटिंग, रेस में 8 दावेदार, कोस्टा रिका की ग्रिन्सपैन सबसे आगे संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा पांच साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को खत्म होगा। उनके बाद अगला महासचिव चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस पद के लिए इस समय 8 उम्मीदवार मैदान में हैं। पूरी खबर पढ़ें…
‘अंडी बंडी’ में गूंजा कुमाऊंनी हिट, वीर पहाड़िया के एनर्जी से भरपूर डांस ने मचाई धूम
वीर पहाड़िया की अपकमिंग फिल्म ‘प्रेम कीटाणु’ का नया गाना ‘अंडी बंडी’ रिलीज होते ही चर्चा में आ गया है. खास बात यह है कि इस हाई-एनर्जी ट्रैक की शुरुआत कुमाऊंनी हिट गाने ‘हिट दगड़ी कमला, अल्मोड़ा में मेरो बंगला’ की धुन से होती है. पहाड़ की मिट्टी से जुड़े इस लोकप्रिय गीत की झलक मिलते ही गाने में देसी रंग और भी गहरा जाता है. इसके बाद वीर पहाड़िया अपने जबरदस्त डांस मूव्स और जोशीले अंदाज से डांस फ्लोर पर धमाल मचाते नजर आते हैं. मस्ती, युवा जोश और पहाड़ी कनेक्शन से सजा यह गाना फिल्म की कहानी और वीर के किरदार की चुलबुली दुनिया की झलक देता है. ‘प्रेम कीटाणु’ 2 अक्टूबर 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी.
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