क्या एथेनॉल नीति की वजह से महंगी हुई चीनी? खरगे के आरोपों पर अमित मालवीय ने पेश किए यूपीए सरकार के आंकड़े
Sugar Price Hike: त्योहारी सीजन से ठीक पहले देश में चीनी की बढ़ती कीमतों और इसके गिरते स्टॉक को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को केंद्र की मोदी सरकार पर चीनी के मुद्दे और एथेनॉल नीति को लेकर तीखा हमला बोला था. अब इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने मोर्चा संभालते हुए कांग्रेस के सभी आरोपों का सिलसिलेवार तरीके से जवाब दिया है. मालवीय ने खरगे के बयानों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि चीनी की कीमतों और आयात को एथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) से जोड़ना पूरी तरह से गलत है और आंकड़े इसकी गवाही नहीं देते हैं.
चीनी का स्टॉक नौ सालों में सबसे निचले स्तर पर
इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि त्योहारों से पहले जनता पर महंगाई की तगड़ी मार पड़ी है. उन्होंने दावा किया कि बीते तीन महीनों में चीनी के दाम करीब 40 फीसदी तक बढ़ गए हैं. खरगे ने मोदी सरकार से पूछा कि दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शुमार भारत में आज चीनी का स्टॉक पिछले नौ सालों के सबसे निचले स्तर पर क्यों पहुंच गया है. उन्होंने एथेनॉल नीति की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि जब देश में चीनी की कमी है और सरकार को 10 लाख टन चीनी ड्यूटी-फ्री आयात करनी पड़ रही है, तो गन्ने और अनाज को एथेनॉल बनाने के लिए क्यों झोंका जा रहा है.
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अमित मालवीय ने बतया, क्यों पड़ रही चीनी की कमी
कांग्रेस के इन तमाम सवालों का जवाब देते हुए अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विस्तार से आंकड़े साझा किए. उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में चीनी के आयात का फैसला हमेशा 'शुगर बैलेंस' के आधार पर लिया जाता है, न कि ई20 कार्यक्रम के आधार पर. मालवीय ने बताया कि साल 2025-26 के लिए शुरुआती उत्पादन का अनुमान लगभग 349 लाख टन लगाया गया था, जो अब घटकर 280 लाख टन के करीब रह गया है. उत्पादन में आई इस भारी गिरावट और बाजार में स्थिर खपत की वजह से क्लोजिंग स्टॉक पर दबाव पड़ा है. यही कारण है कि कीमतों को नियंत्रित करने और घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार को आयात जैसी संतुलित नीतिगत प्रक्रिया अपनानी पड़ी.
चीनी की कीमत, स्टॉक और आयात को E20 से जोड़ना सुविधाजनक राजनीति है, लेकिन आंकड़े इसकी पुष्टि नहीं करते।
— Amit Malviya (@amitmalviya) August 22, 2026
1. “9 साल का सबसे कम स्टॉक क्यों? 10 लाख टन आयात क्यों?”
क्योंकि आयात का फैसला Sugar Balance से होता है, उत्पादन, consumption, stocks और prices से, E20 से नहीं।
2025-26 का… https://t.co/oNXs7kU37w
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अमित मालवीय ने दिए आंकड़े
एथेनॉल के लिए गन्ने का इस्तेमाल किए जाने के खरगे के आरोपों को खारिज करते हुए मालवीय ने यूपीए सरकार के कार्यकाल की याद दिलाई. उन्होंने कहा कि भारत ई20 नीति लागू होने से बहुत पहले भी चीनी का आयात करता रहा है. उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि यूपीए-2 के शासनकाल में 2009-10 से 2013-14 के बीच 75.25 लाख मीट्रिक टन (LMT) चीनी का आयात किया गया था. अकेले 2009-10 में ही 41.8 LMT चीनी विदेशों से मंगाई गई थी, जबकि उस वक्त देश में ई20 का कोई अस्तित्व ही नहीं था.मालवीय ने यह भी स्पष्ट किया कि आयातित की जाने वाली हर खेप केवल घरेलू खपत के लिए नहीं होती है, बल्कि कच्ची चीनी का एक बड़ा हिस्सा प्रोसेसिंग के बाद दोबारा निर्यात (री-एक्सपोर्ट) करने के लिए भी मंगाया जाता है.
Hindu Mandir in Paris: पेरिस में भव्य बीएपीएस हिंदू मंदिर तैयार, सितंबर को खुलेंगे कपाट
फ्रांस की राजधानी पेरिस के उपनगर 'बूसी-सेंट-जॉर्जेस' में भव्य बीएपीएस स्वामीनारायण हिंदू मंदिर अब अपने ऐतिहासिक उद्घाटन के समीप पहुंच गया है. मंदिर के शिखरों और केंद्रीय गुंबद पर कलश एवं ध्वजा दंड पूजन जैसी पारंपरिक वैदिक रस्में पूरी की जा रही हैं. मंदिर परिसर में साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने शांति, सद्भाव और जनकल्याण के लिए वैदिक मंत्रोच्चार और प्रार्थनाएं भी कर रहे हैं. कुछ ऐसे परिवार भी हैं जो अपने बच्चों और नाती-पोतों के साथ भव्य उत्सव के साक्षी बनेंगे.
सितंबर में होगा मंदिर का उद्घाटन
बीएपीएस की आधिकारिक साइट के अनुसार, इस मंदिर का उद्घाटन 2 से 14 सितंबर 2026 तक आयोजित होने वाले 13 दिवसीय ‘फेस्टिवल ऑफ कल्चर’ यानी ‘पेरिस मंदिर महोत्सव’ के दौरान किया जाएगा. यह आयोजन बीएपीएस स्वामीनारायण हिंदू मंदिर के उद्घाटन को समर्पित होगा और इसमें दुनिया के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु और शुभचिंतक शामिल होंगे.
इन इलाकों में होगी जल यात्रा
महोत्सव के दौरान जल यात्रा, पेरिस में नगर यात्रा, बूसी-सेंट-जॉर्जेस में पालखी यात्रा, प्रतिदिन वैदिक महायज्ञ, मूर्ति-प्रतिष्ठा समारोह, समर्पण सभा और कीर्तन आराधना जैसे अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. बीएपीएस के मुताबिक, पेरिस का यह मंदिर फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर है. इसका निर्माण बूसी-सेंट-जॉर्जेस स्थित एस्पलेनैड डेस रिलिजन्स एट डेस कल्चर्स में किया गया है, जहां विभिन्न धर्मों के उपासना स्थल मौजूद हैं. इस स्थान को धार्मिक विविधता और अंतरधार्मिक सद्भाव के प्रतीक के रूप में विकसित किया गया है.
मंदिर में किया गया भारतीय शिल्प परंपरा का इस्तेमाल
मंदिर की वास्तुकला में सदियों पुरानी भारतीय शिल्प परंपरा का इस्तेमाल किया गया है. मंदिर के पत्थरों को भारत में तराशकर तैयार किया गया और फिर उन्हें फ्रांस ले जाकर भारतीय शिल्पकारों तथा फ्रांसीसी विशेषज्ञों की मदद से मंदिर में स्थापित किया गया. इस मंदिर की नींव रखने का ऐतिहासिक समारोह सितंबर 2022 में हुआ था. इसके बाद जून 2024 में मंदिर की आधारभूत संरचना के निर्माण का महत्वपूर्ण चरण शुरू हुआ.
बीएपीएस पेरिस की सोशल मीडिया पोस्ट में महंत स्वामी महाराज से लेकर वरिष्ठ संतों और दुनियाभर के श्रद्धालुओं के एक स्वर में “पेरिस मंदिर महोत्सव नी जय!” के उद्घोष का उल्लेख किया गया है. इसका भाव मंदिर के उद्घाटन को लेकर सामूहिक उत्साह और आध्यात्मिक एकता से जुड़ा है.
एक परिवार की तीन पीढ़ियों का होगा सपना साकार
इन पोस्ट्स में एक परिवार ऐसा भी है जिसकी तीन पीढ़ियां मिलकर सपना साकार होते एक साथ देखेंगी. पहली पीढ़ी 80 के दशक में पहुंची. गुजराती मूल के परिवार के मुताबिक वो दौर ऐसा था जब एक-दो ही हिंदू परिवार रहते थे. फिर दूसरी पीढ़ी ने वो सहा जो विदेशी जमीन पर अक्सर अनजाने लोगों के साथ होता है. लोगों को हिंदू धर्म के बारे में बताते थे तो वो हंसते थे या मजाक उड़ाते थे लेकिन अपने बड़ों से जो सीखा उसे छोड़ा नहीं.
हिंदू रंगों में रंगी हुई है फ्रांस की हिंदू पीढ़ी
हिंदू संस्कृति, संस्कारों और अध्यात्म की मशाल तीसरी पीढ़ी तक पहुंची. ऐसी पीढ़ी जो फ्रेंच तो बोलती है लेकिन विशुद्ध हिंदू रंग में रंगी है. बच्चे बोलते हैं कि अपने बड़ों के साथ सत्संग में जाते थे, अपने धर्म को समझते थे. अब विश्वास नहीं हो रहा कि यहां भी हमारा मंदिर होगा, वाकई हम खुद को भाग्यवान मानते हैं. बच्चे खुश हैं, कहते हैं, "हमारे दोस्त, जब अपनी आंखों के सामने भव्य मंदिर बनते देख रहे हैं तो हमसे हमारे धर्म के बारे में जानने की कोशिश करते हैं और ये हमें बहुत अच्छा लगता है."
मंदिर महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहेगा. बीएपीएस ने इसे भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, कला और विभिन्न समुदायों के बीच सद्भाव को सामने लाने वाले वैश्विक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में प्रस्तुत किया है. पेरिस जैसे वैश्विक सांस्कृतिक केंद्र में भारतीय पारंपरिक वास्तुकला और हिंदू आध्यात्मिक परंपरा का यह नया केंद्र निश्चित तौर पर भारतीय समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है. सितंबर में होने वाला मंदिर महोत्सव इस लंबे निर्माण सफर के समापन और एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक बनेगा.
स्रोत- आईएएनएस
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