पाकिस्तान ने पत्रकार को आतंकी लिस्ट में डाला:PoK प्रदर्शन कवर करने वाले दानिश इरशाद पर बिना मुकदमे कार्रवाई, बैंक अकाउंट सीज-यात्रा पर रोक
पाकिस्तान ने PoK में हो रहे प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार और रिसर्चर दानिश इरशाद को आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची यानी फोर्थ शेड्यूल में डाल दिया है। खास बात यह है कि सरकार ने उनके खिलाफ न तो किसी आतंकी गतिविधि का आरोप बताया है और न ही कोई अदालत का फैसला सामने आया है। इरशाद पिछले करीब 10 साल से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान की राजनीति और वहां के हालात पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। हाल के महीनों में उन्होंने PoK में सेना की ज्यादाती के शिकार हुए लोगों और उनके परिवारों की लगातार रिपोर्टिंग की थी। अब उनका नाम उस सूची में डाल दिया गया है, जिसमें पाकिस्तान सरकार आतंकवाद या प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े लोगों को रखती है। इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दानिश इरशाद ने ऐसा क्या किया, जिसके आधार पर उन्हें फोर्थ शेड्यूल में डाला गया? उपलब्ध आदेश में इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलता। दानिश इरशाद कौन हैं? दानिश इरशाद रावलपिंडी के रहने वाले हैं। उन्होंने 2015 में इस्लामाबाद से पत्रकारिता शुरू की थी। वे लाहौर स्थित नियो न्यूज के साथ काम करते हैं और जम्मू से प्रकाशित कश्मीर टाइम्स में कॉलम भी लिखते हैं। वे 1947 के बाद जम्मू-कश्मीर के इतिहास पर एक किताब भी लिख चुके हैं। पाकिस्तान के जिस आदेश के आधार पर दानिश इरशाद का नाम फोर्थ शेड्यूल में डाला गया है, उसमें उनके खिलाफ कोई खास आरोप नहीं बताया गया है। यह भी पता नहीं चल रहा है कि उन्होंने ऐसा कौन सा काम किया, जिसे आतंकवाद से जोड़कर देखा गया। कश्मीर टाइम्स के मुताबिक, इरशाद का नाम PoK के 24 वॉन्टेड लोगों की लिस्ट में 12वें नंबर पर है। आदेश में जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) से जुड़े कार्यकर्ताओं का भी जिक्र है। पाकिस्तान सरकार ने JAAC को जून में प्रतिबंधित कर दिया था। हाल के महीनों में इरशाद ने PoK में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की लगातार रिपोर्टिंग की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मांगों और वहां की स्थिति को कवर करने के साथ उन परिवारों से भी बातचीत की, जिनके बच्चों के पाकिस्तान की सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे जाने का आरोप है। इरशाद के मुताबिक, उन्हें न तो किसी मामले में अदालत में पेश किया गया और न ही किसी अपराध में दोषी ठहराया गया। उन्हें सरकार की तरफ से सीधे यह जानकारी भी नहीं दी गई कि उनका नाम सूची में क्यों डाला गया। उन्हें 18 अगस्त को सोशल मीडिया के जरिए इस कार्रवाई का पता चला। इसके बाद उन्होंने PoK के गृह विभाग के एक सूत्र से इसकी पुष्टि की। फोर्थ शेड्यूल क्या है? पाकिस्तान में फोर्थ शेड्यूल आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची है। इसमें उन लोगों को रखा जा सकता है, जिन्हें सरकार आतंकवाद या प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ा मानती है। इस सूची में नाम आने के बाद संबंधित व्यक्ति पर कई तरह की पाबंदियां लग सकती हैं। इनमें विदेश यात्रा पर रोक, पासपोर्ट से जुड़ी पाबंदियां, बैंक खातों पर कार्रवाई, कर्ज या क्रेडिट कार्ड लेने में परेशानी और हथियार का लाइसेंस लेने पर रोक जैसी पाबंदियां शामिल हो सकती हैं। इसके अलावा सरकारी निगरानी भी बढ़ सकती है। इसलिए किसी पत्रकार का नाम इस सूची में डाला जाना सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई नहीं मानी जाती। इससे उस व्यक्ति की आवाजाही, आर्थिक गतिविधियों और सार्वजनिक कामकाज पर गंभीर असर पड़ सकता है। PoK में क्या चल रहा है? दानिश इरशाद के खिलाफ यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब PoK में लंबे समय से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। इन प्रदर्शनों का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी कर रही है। प्रदर्शनकारी राजनीतिक प्रतिनिधित्व, सब्सिडी और शासन व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दे उठा रहे हैं। उनकी मांगों में PoK विधानसभा में पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना भी शामिल है। पाकिस्तान सरकार ने 5 जून को जेएएसी पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव बढ़ गया। इस दौरान इंटरनेट बंद करने और मीडिया पर पाबंदियां लगाने जैसी कार्रवाई भी हुई। जेएएसी का दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 80 से ज्यादा नागरिक मारे गए हैं। यह आंकड़ा संगठन का दावा है। इसी दौरान दानिश इरशाद लगातार PoK के हालात की रिपोर्टिंग कर रहे थे। उन्होंने प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के अलावा प्रभावित परिवारों से भी बात की। यही वजह है कि उनके खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या उनकी रिपोर्टिंग और आंदोलन को कवर करने की वजह से उन्हें निशाना बनाया गया। पाकिस्तानी पत्रकारों ने क्या कहा? दानिश इरशाद को फोर्थ शेड्यूल में डाले जाने की पाकिस्तान के कुछ पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने भी आलोचना की है। पाकिस्तानी पत्रकार सालेह सफीर अब्बासी ने इसे प्रेस की आजादी पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि असहमति रखना अपराध नहीं, बल्कि एक अधिकार है। ब्रिटेन में रहने वाले पाकिस्तानी कार्यकर्ता अजहर अहमद ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी पत्रकार के खिलाफ आतंकवाद रोधी कानून का इस्तेमाल बेहद चिंताजनक है। इससे उन पत्रकारों में डर पैदा हो सकता है, जो विरोध प्रदर्शनों, सरकारी कार्रवाई और मानवाधिकारों की स्थिति पर रिपोर्टिंग करते हैं। न्यूयॉर्क की पाकिस्तानी खोजी पत्रकार अरीबा फातिमा ने भी सवाल उठाया कि इरशाद के खिलाफ न कोई मुकदमा है और न अदालत का आदेश, फिर उन्हें आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची में किस आधार पर डाला गया? सिर्फ एक पत्रकार का मामला नहीं इस मामले को सिर्फ दानिश इरशाद के खिलाफ हुई कार्रवाई के तौर पर देखना मुश्किल है। इसकी पृष्ठभूमि में PoK में चल रहा आंदोलन और उसके खिलाफ पाकिस्तान सरकार की कार्रवाई भी है। कश्मीर टाइम्स के मुताबिक, 20 जून को ही जेएएसी से जुड़े 147 कार्यकर्ताओं और समर्थकों के नाम फोर्थ शेड्यूल में डाले गए थे। इसके बाद भी इस सूची में और नाम जोड़े गए। दानिश इरशाद का मामला इसलिए अलग नजर आता है क्योंकि वे एक पत्रकार हैं और उनका काम मुख्य रूप से घटनाओं की रिपोर्टिंग करना है। उपलब्ध आदेश में उनके खिलाफ किसी खास आतंकवादी गतिविधि का उल्लेख नहीं है। इरशाद ने ड्रॉप साइट न्यूज से बात करते हुए सवाल उठाया कि किसी पत्रकार का बोलना और लिखना आतंकवाद का काम कैसे हो सकता है। उनका कहना है कि बिना मुकदमे के किसी व्यक्ति को दोषी मान लेना सही नहीं है। पूरे मामले में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि पाकिस्तान सरकार ने दानिश इरशाद को फोर्थ शेड्यूल में डालने के लिए कौन सा ठोस आधार इस्तेमाल किया? सरकार के आदेश में इसका स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। यही वजह है कि यह मामला सिर्फ एक पत्रकार पर लगी पाबंदी तक सीमित नहीं है। इसे PoK में चल रहे आंदोलन, प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई और वहां पत्रकारिता तथा असहमति की आवाजों पर बढ़ते दबाव के बड़े संदर्भ में देखा जा रहा है।
गोविंदा-करिश्मा कपूर का सुपरहिट गाना, अलका याग्निक-कुमार सानू ने दी आवाज, धुन सुनते ही मच उठता है दिल
नई दिल्ली. साल 1997 में आई सुपरहिट फिल्म 'साजन चले ससुराल' का 'तुम तो धोखेबाज हो' एक बेहद लोकप्रिय गाना है. इस गाने को गोविंदा और करिश्मा कपूर पर फिल्माया गया है, जिसे अलका याग्निक और कुमार सानू ने अपनी सुरीली आवाज दी है. गाने का संगीत नदीम-श्रवण की जोड़ी ने तैयार किया था, जबकि इसके मनोरंजक बोल समीर ने लिखे थे. गोविंदा और करिश्मा की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री, उनके चुलबुले एक्सप्रेशन्स और बेहतरीन डांस स्टेप्स ने इस गाने को यादगार बना दिया. 'तुम तो धोखेबाज हो' 90 के दशक के पॉपुलर गानों में से एक है.
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