छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में ट्रक और पिकअप वाहन के बीच हुई टक्कर में तीन मजूदरों की मौत हो गई है तथा आठ अन्य घायल हो गए हैं। पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि जिले के राजपुर-कुसमी मार्ग पर सेवारी गांव के करीब शनिवार तड़के ट्रक और पिकअप वाहन के बीच हुई टक्कर में पिकअप वाहन में सवार तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई तथा आठ अन्य घायल हो गए।
उन्होंने बताया कि 11 मजदूर एक पिकअप वाहन में सवार होकर प्रतापपुर क्षेत्र से शंकरगढ़ की ओर रवाना हुए थे, जब वह सेवारी गांव के करीब पहुंचे तब उनका वाहन सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गया। इस घटना में तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई तथा आठ अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस दल को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया तथा शवों और घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया।
घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें अंबिकापुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने बताया कि गंभीर रूप से घायल दो लोगों को उनकी नाजुक हालत को देखते हुए रायपुर ले जाया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है तथा मामले की जांच की जा रही है।
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शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया, जब जाति-आधारित आरक्षण के विरोध में जंतर-मंतर पर लोगों की भारी भीड़ जमा हुई थी। इस प्रदर्शन को मुख्य रूप से सोशल मीडिया के ज़रिए रिज़र्वेशन हटाओ आंदोलन ने संगठित किया था। यह इंस्टाग्राम पर चलने वाला एक कैंपेन है, जिसने अपने फ़ॉलोअर्स से इस प्रत्यक्ष विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। इंस्टाग्राम पर इस पेज के लगभग 56 लाख (5.6 मिलियन) फ़ॉलोअर्स हैं।
विरोध प्रदर्शन स्थल पर बार-बार यह मांग उठाई गई कि सरकारी सहायता और लाभ पाने का आधार केवल जाति नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से पिछड़ापन होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा, कोटा नीतियों में बदलाव और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों (EWS) के लिए ज़्यादा समर्थन की भी मांग की। 'रिज़र्वेशन हटाओ आंदोलन' के बैनर तले प्रदर्शनकारी जाति-आधारित आरक्षण का विरोध कर रहे थे। वे बैनर, पोस्टर और केसरिया झंडे लिए हुए थे और मांग कर रहे थे कि आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए।
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा (ABKM) से जुड़े एक प्रदर्शनकारी के हवाले से कहा कि हमारी मांग है कि सरकारी मदद की ज़रूरत किसे है, यह तय करते समय आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए। जाति से परे, किसी गरीब व्यक्ति को शिक्षा, कोचिंग और अन्य ज़रूरतों के लिए मदद मिलनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि मौजूदा सामाजिक और आर्थिक स्थितियों को देखते हुए आरक्षण नीति की समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि आरक्षण में "क्रीमी-लेयर" का नियम लागू किया जाए और अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए नीतियों में बदलाव किया जाए।
उन्होंने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के ढांचे पर भी सवाल उठाए। एक और प्रदर्शनकारी के हवाले से कहा गया कि हम कई सालों से यह मुद्दा उठा रहे हैं। हमारा कहना है कि सरकार को इस बात की जांच करनी चाहिए कि क्या मौजूदा सिस्टम अपने मकसद को पूरा कर रहा है और क्या ज़मीनी स्तर पर लोगों तक फ़ायदे पहुँच रहे हैं। बाद में दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। अधिकारियों का कहना था कि उनके पास जंतर-मंतर पर किसी भी तरह के प्रदर्शन या जमावड़े की इजाज़त नहीं थी। हालांकि, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के DCP ऑफिस से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि रामलीला मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाज़त दी गई थी और इसके लिए 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) भी जारी किया गया था। वहीं, पुलिस ने कहा कि कानून-व्यवस्था के नज़रिए से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर उन्हें "कोई आपत्ति नहीं" है।
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