₹19.79 लाख वाला Scorpio Lifestyler या 32 लाख वाला Hilux? जानें कौन है असली लाइफस्टाइल पिकअप किंग
Mahindra Scorpio Lifestyler और Toyota Hilux के बीच अब भारत के लाइफस्टाइल पिकअप सेगमेंट में मुकाबला और दिलचस्प होने वाला है. एक तरफ Scorpio Lifestyler कम कीमत में दमदार डिजाइन और मॉडर्न फीचर्स का दावा करता है, तो दूसरी ओर Hilux अपनी पावर, भरोसेमंद इंजन और ऑफ-रोड क्षमता के लिए मशहूर है. जानिए दोनों पिकअप की कीमत, डिजाइन, फीचर्स और इंजन में कितना अंतर है.
खड़गे बोले- चीनी की मिठास में सरकारी नीतियों की कड़वाहट:विदेश से आयात हो रही, ये कैसा आत्मनिर्भर भारत; बढ़ती कीमतों पर केंद्र से 3 सवाल किए
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को चीनी की बढ़ती कीमतों और कम होते स्टॉक को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने X पर पोस्ट कर कहा कि त्योहारों से पहले मोदी सरकार की नीतियों की कड़वाहट चीनी की मिठास में घुल गई है। खड़गे ने सरकार से सवाल किया कि दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक भारत में चीनी का स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर क्यों पहुंच गया। उन्होंने 10 लाख टन चीनी ड्यूटी-फ्री आयात करने की नौबत पर भी सवाल उठाया। खड़गे ने कहा- ये कैसा आत्मनिर्भर भारत है, जहां विदेश से चीनी आयात की जा रही है और दूसरी तरफ गन्ने को पेट्रोल में मिलाने के लिए एथेनॉल में झोंका जा रहा है। भारत सरकार में खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने शुक्रवार को बताया था कि देश में चीनी की खुदरा कीमत 20 जुलाई के ₹48 से बढ़कर करीब ₹56 प्रति किलो हो गई है, जबकि एक्स-मिल कीमत 7-10 दिनों में ₹47-48 से बढ़कर ₹62 प्रति किलो पहुंच गई है। सरकार बोली- एथेनॉल की वजह से नहीं बढ़ी चीनी की कीमत सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथेनॉल बनाने में गन्ने के इस्तेमाल को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि देश में पर्याप्त चीनी स्टॉक है। कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के पीछे मिलों की ओर से दाम बढ़ाना, जमाखोरी और सट्टेबाजी प्रमुख वजह हैं। सरकार ने चीनी की कीमत बढ़ने की अन्य वजहों में घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई का दबाव बताया है। खाद्य सचिव बोले- एथेनॉल के लिए कम चीनी इस्तेमाल हो रही खाद्य सचिव चोपड़ा के मुताबिक, अब देश में बनने वाले एथेनॉल का करीब एक-चौथाई हिस्सा ही चीनी से आता है, जबकि बाकी मुख्य रूप से मक्का जैसे अनाज से बनता है। एथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में 12% थी। यह 2025-26 में घटकर करीब 9% रह गई है। मौजूदा सीजन में एथेनॉल के लिए सिर्फ 28 लाख टन चीनी डायवर्ट की गई है। अक्टूबर तक पर्याप्त स्टॉक का दावा इस सीजन में देश में चीनी का उत्पादन 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 LMT था। रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ ज्यादा बारिश से खेतों में पानी भरने के कारण उत्पादन घटा है। हालांकि, मंत्रालय का कहना है कि अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। चीनी की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी असर पड़ा है। 2026-27 में दुनिया में चीनी की कमी करीब 33 LMT रहने का अनुमान है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय कीमत 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गई। यानी दो महीने से भी कम समय में 16% से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। घरेलू बाजार में जमाखोरी और सट्टेबाजी रोकने के लिए सरकार ने डीलर्स पर 400 टन की स्टॉक लिमिट 30 नवंबर तक लागू की है। वहीं, थोक उपभोक्ताओं के लिए 1 सितंबर से 15 दिन की स्टॉक सीमा लागू होगी। कृत्रिम कमी रोकने के लिए केंद्र और राज्य की संयुक्त टीमें चीनी मिलों में जाकर स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी कर रही हैं। यह खबर लगातार अपडेट की जा रही है…
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