झारखंड के रामगढ़ जिले में इस्पात के कारखाने में आग लगने से कम से कम तीन कर्मचारियों की मौत हो गई जबकि एक अन्य घायल हो गया। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि शुक्रवार आधी रात को हेहल स्थित इस्पात के कारखाने के कैप्टिव पावर प्लांट से आग फैल गई।
कैप्टिव पावर प्लांट का मतलब है किसी फैक्टरी या उद्योग द्वारा अपनी जरूरत की बिजली खुद पैदा करने के लिए लगाया गया बिजली संयंत्र। रामगढ़ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) मुकेश कुमार लुनायत ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि हादसे में गंभीर रूप से झुलसे कम से कम चार कर्मचारियों में से तीन की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। उन्होंने कहा कि आग लगने के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
बरकाकाना थाना प्रभारी उमाशंकर वर्मा ने बताया कि मृतकों की पहचान संजीव, विनीत और अभिषेक के रूप में हुई है। मुख्य कारखाना निरीक्षक मनीष सिन्हा ने कहा, स्टील फैक्टरी मां छिन्नमस्तिका इस्पात के कैप्टिव पावर प्लांट में आग लग गई। जांच के लिए दो-सदस्यीय टीम को मौके पर भेजा गया है, जिसमें एक कारखाना निरीक्षक और छोटानागपुर के मुख्य उपनिरीक्षक शामिल हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के समय कारखाने में बड़ी संख्या में मजदूर मौजूद थे।
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आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर की संस्था 'आर्ट ऑफ लिविंग' (Art of Living Foundation) को एक बड़े कानूनी मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को आदेश दिया है कि वह वर्ष 2016 में यमुना नदी के बाढ़ वाले क्षेत्रों (Floodplains) को नुकसान पहुँचाने के एवज में वसूला गया 5 करोड़ रुपये का जुर्माना वापस करे। यह राशि 'आर्ट ऑफ लिविंग' के तहत पंजीकृत चैरिटेबल ट्रस्ट 'व्यक्ति विकास केंद्र' द्वारा जमा कराई गई थी। इस कार्यक्रम पर दिल्ली में पर्यावरण के लिहाज़ से संवेदनशील यमुना के बाढ़ वाले इलाकों को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगा था।
कोर्ट ने कहा कि इस बात का कोई सीधा सबूत नहीं है कि सांस्कृतिक उत्सव से यमुना नदी के नाज़ुक इकोसिस्टम को नुकसान पहुँचा। कोर्ट ने आदेश दिया कि 'आर्ट ऑफ़ लिविंग' के तहत रजिस्टर्ड पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट, 'व्यक्ति विकास केंद्र' द्वारा जमा किया गया जुर्माना दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) वापस करे। यह जुर्माना नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने लगाया था। NGT ने "वर्ल्ड कल्चर फ़ेस्टिवल" की तैयारियों के दौरान यमुना के बाढ़ वाले इलाकों को नुकसान पहुँचाने के लिए 'आर्ट ऑफ़ लिविंग' को ज़िम्मेदार ठहराया था।
'आर्ट ऑफ़ लिविंग' को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि DDA यमुना के बाढ़ वाले इलाकों की सुरक्षा करने की अपनी ज़िम्मेदारी निभाने में नाकाम रहा। कोर्ट ने शहरी योजना और विकास संस्था को यह भी निर्देश दिया कि वह NGT के आदेश के मुताबिक यमुना के बाढ़ वाले इलाकों को फिर से ठीक करने का काम जारी रखे। पर्यावरण पैनल ने 'आर्ट ऑफ़ लिविंग' को यमुना के किनारे अपना बड़ा कार्यक्रम करने की मंज़ूरी दी थी। पूरा जुर्माना भरने पर सहमत होने के बाद यह कार्यक्रम 11-13 मार्च 2016 को आयोजित किया गया था।
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