मिचेल स्टार्क ने लगाई रिकॉर्ड्स की झड़ी, WTC में बने नंबर-1 गेंदबाज, तो इस मामले में निकल गए डेल स्टेन से आगे
Mitchell Starc Records: ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला मैके में खेला जा रहा है. इस मुकाबले में ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क ने कमाल की गेंदबाजी करते हुए मेहमान टीम की नाक में दम कर दिया. अकेले स्टार्क ने ही बांग्लादेश के 6 बल्लेबाजों को आउट किया और उन्हें 64 रन पर समेटने में अहम भूमिका निभाई. इसी के साथ मिचेल स्टार्क ने रिकॉर्ड्स की झड़ी लगा दी है. तो आइए उनके द्वारा बनाए रिकॉर्ड्स पर नजर डालते हैं...
WTC में नंबर-1 बने मिचेल स्टार्क
बांग्लादेश के खिलाफ खेले जा रहे टेस्ट मैच में 6 विकेट लेने के साथ ही मिचेल स्टार्क वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-2027 में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए हैं. इस मामले में उन्होंने इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोश टंग को पीछे छोड़ा है. स्टार्क ने 10 मैच खेले हैं, जिसकी 19 पारियों में उन्होंने 17.51 के औसत से 54 विकेट झटके हैं. इस दौरान उन्होंने 3.65 की इकोनॉमी से रन दिए हैं. वहीं जोश टंक की बात करें, तो उन्होंने 10 मैच खेले, जिसकी 20 पारियों में 53 रन बनाए हैं.
मिचेल स्टार्क ने डेल स्टेन को छोड़ा पीछे
मैके में मिचेल स्टार्क ने फाइव विकेट हॉल लेने के साथ ही डेल स्टेन को पीछे छोड़ दिया है. उन्होंने टेस्ट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की लिस्ट में डेल स्टेन को पीछे छोड़ दिया है. स्टार्क के अब टेस्ट फॉर्मेट में 440 विकेट हो गए हैं. वहीं, डेल स्टेन की बात करें तो उन्होंने 93 टेस्ट में 439 विकेट अपने नाम किए थे. वहीं, लिस्ट में स्टार्क का नाम 10वें स्थान पर है. टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज का नाम मिचेल स्टार्क है, जिन्होंने 800 विकेट लिए, वहीं सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन हैं, जिन्होंने 619 विकेट झटके.
ये भी पढ़ें: इंग्लैंड की जीत से WTC प्वॉइंट्स टेबल में फेरबदल, पाकिस्तान का हुआ सबसे बुरा हाल, जानें किस नंबर पर है भारत
Putrada Ekadashi 2026: 22 या 23 अगस्त, कब रखा जाएगा पुत्रदा एकादशी का व्रत? जानें तिथि और शुभ मुहूर्त
Putrada Ekadashi 2026/ Ekadashi Kab Hai: श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहते हैं. सनातन धर्म में इस एकादशी का बेहद खास महत्व होता है. पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान सुख, संतान की लंबी आयु, निरोगी और परिवार में सुख-समृद्धि के लिए फलदायी मानी जाती है. यह एकादशी माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु को समर्पित है. इस साल पुत्रदा एकादशी की तिथि को लेकर बहुत कंफ्यूजन बना हुआ है क्योंकि 22 अगस्त और 23 अगस्त, दोनों ही दिन एकादशी का संयोग बन रहा है. ऐसे में व्रत किस दिन रखा जाना चाहिए. आइए इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं सही तारीख और शुभ मुहूर्त.
कब रखा जाएगा पुत्रदा एकादशी व्रत? (Putrada Ekadashi Vrat 2026 Date)
द्रिक पंचांग के अनुसार, पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को रखआ जाने वाला है. एकादशी तिथि 23 अगस्त को रात 2 बजे शुरू होगी. वहीं, एकादशी तिथि का समापन 24 अगस्त को रात 4 बजकर 18 मिनट पर समाप्त होगी. वैष्णव श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत 24 अगस्त 2026 को रखेंगे.
ये भी पढ़ें-Sawan Ka Dusra Pradosh Vrat 2026: कब है सावन का दूसरा प्रदोष व्रत? नोट करें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व
पारण का समय क्या होगा?
पंचांग के अनुसार, पुत्रदा एकादशी व्रत जो लोग 23 अगस्त को रख रहे हैं तो पारण 24 अगस्त 2026 को किया जाएगा. इस दिन पारण का समय दोपहर 01:32 से 04:04 तक है. इस दिन हरि वासर समाप्त होने का समय 10 बजकर 49 मिनट का रहेगा. 25 अगस्त को पारण करने का मुहूर्त सुबह 05:55 से लेकर 06:20 तक रहेगा.
संतान प्राप्ति के लिए क्यों खास है पुत्रदा एकादशी?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पुत्रदा एकादशी को संतान प्राप्ति के लिए विशेष माना जाता है. संतान की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी आयु के लिए दंपत्ति इस व्रत को रखते हैं. जिन दंपतियों की संतान नहीं होती है, उन्हें भी विशेष रूप से इस व्रत को करने की सलाह दी जाती है. इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखना चाहिए और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी से कामना करनी चाहिए. संतान के उज्जवल भविष्य के लिए भी माता-पिता व्रत रखते हैं और श्रीहरि से कामना करते हैं.
धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है. हिंदू धर्म में सभी एकादशियों को भगवान विष्णु की आराधना करने के लिए खास माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, एकादशी व्रत करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और अंत में मुक्ति प्राप्त होती है.
पुत्रदा एकादशी पर ऐसे करें भगवान श्रीहरि की पूजा
पुत्रदा एकादशी के दिन प्रात:काल उठकर स्नान आदि करना होता है और फिर साफ वस्त्र पहनने चाहिए. इसके बाद घर के पूजा स्थान या मंदिर की सफाई करें. एक चौकी स्थापित करें और उस पर पीला कपड़ा बिछाकर माता लक्ष्मी की तस्वीर और मूर्ति को स्थापित करें. सबसे पहले देवी-देवता का स्मरण करें और फिर व्रत का संकल्प लें. इसके बाद भगवान विष्णु का गंगाजल से स्नान करवाएं. उन्हें पीले फूल, अक्षत, तुलसीदल और मिठाई का भोग लगाएं. भगवान को ऋतु फल चढ़ाएं और विधि-विधान से पूजा करें. पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें. आप इस दिन ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप कर सकते हैं. इस मंत्र का कम से कम 11 माला जाप करें. इस दिन अपने वचन, कर्म और मन को शुद्ध रखें. किसी पर गुस्सा बिल्कुल न करें और झूठ न बोलें.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation







