Maharashtra SIR: 21 फीसदी Voter Forms वापस नहीं मिले, शहरों में बड़ी कमी
महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान ठाणे, पुणे और मुंबई समेत कई शहरी विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे प्रपत्रों की संख्या अधिक रही, जिन्हें एकत्र नहीं किया जा सका। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली, इसके विपरीत ग्रामीण और आदिवासी निर्वाचनों क्षेत्रों ने फॉर्म जमा करने के मामले में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। एसआईआर में ऐसे गणना फॉर्म जिन्हें न तो एकत्र किया जा सका और न ही उनका डिजिटलीकरण हो पाया, उन्हें ‘एकत्र न किए जा सकने वाले फॉर्म’ की श्रेणी में रखा गया है।
राज्य में कुल 21 प्रतिशत से अधिक एसआईआर फॉर्म इस श्रेणी में आए हैं। सीईओ कार्यालय ने राज्य की सभी 288 विधानसभा सीटों का क्षेत्रवार आंकड़ा जारी किया है, जिसमें घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच फॉर्म एकत्र करने तथा डिजिटलीकरण के आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया है। ठाणे की भिवंडी पूर्व विधानसभा सीट पर ऐसे फॉर्म का प्रतिशत सबसे अधिक 49.10 प्रतिशत रहा।
इसके बाद दक्षिण मुंबई की कोलाबा सीट पर 46.97 प्रतिशत, पुणे की खडकवासला सीट पर 46.57 प्रतिशत, पालघर की नालासोपारा सीट पर 46.36 प्रतिशत और पुणे की कोथरूड सीट पर 46.22 प्रतिशत फॉर्म एकत्र नहीं किए जा सके। मुंबई के पास स्थित नालासोपारा विधानसभा क्षेत्र में 6,62,057 मतदाता हैं। यहां 46.36 प्रतिशत यानी 3,06,930 फॉर्म एकत्र नहीं हो सके, जो विश्लेषण किए गए विधानसभा क्षेत्रों में सबसे अधिक संख्या है।
पुणे की हडपसर सीट, जहां 6,51,473 मतदाता हैं, में 45.80 प्रतिशत यानी 2,98,375 फॉर्म एकत्र नहीं हो सके। खडकवासला में 5,97,114 मतदाताओं में से 2,78,076 फॉर्म नहीं मिल सके। वहीं कल्याण ग्रामीण में 2,52,294 और ओवला माजीवाड़ा में 2,50,987 फॉर्म एकत्र नहीं हो पाए।
अन्य शहरी क्षेत्रों में भिवंडी पश्चिम में 44.72 प्रतिशत, शिवाजीनगर में 44.31 प्रतिशत, अंबरनाथ (सुरक्षित) में 44.18 प्रतिशत, ऐरोली में 44.03 प्रतिशत, मुंब्रा-कलवा में 42.92 प्रतिशत, कल्याण पश्चिम में 42.65 प्रतिशत और मानखुर्द शिवाजीनगर में 42.31 प्रतिशत फॉर्म एकत्र नहीं किए जा सके। मुंबई के प्रमुख प्रशासनिक और कारोबारी क्षेत्र वाली कोलाबा विधानसभा सीट में कुल 2,54,910 मतदाता हैं जहां 46.97 प्रतिशत फॉर्म एकत्र नहीं हो सके। वहीं मुंबई की एक अन्य प्रमुख सीट मलाबार हिल में यह आंकड़ा 39.02 प्रतिशत रहा।
इसके उलट कई ग्रामीण और आदिवासी विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे फॉर्म का प्रतिशत 10 प्रतिशत से कम रहा, यानी वहां 90 प्रतिशत से अधिक फॉर्म का डिजिटलीकरण हो गया। अहमदनगर (अब अहिल्यानगर) जिले की अकोले (सुरक्षित) विधानसभा सीट में राज्य में सबसे कम 6.11 प्रतिशत फॉर्म एकत्र नहीं हो सके। यहां 93.89 प्रतिशत फॉर्म का डिजिटलीकरण पूरा हुआ।
इसके बाद बुलढाणा की जलगांव (जामोद) सीट पर 6.20 प्रतिशत, खामगांव में 6.27 प्रतिशत, बीड की आष्टी में 6.37 प्रतिशत और चंद्रपुर की चिमूर सीट पर 6.46 प्रतिशत फॉर्म एकत्र नहीं हो सके।
Amit Shah सिलीगुड़ी में सीमा सुरक्षा की करेंगे समीक्षा, दार्जिलिंग मुद्दे पर भी होगी चर्चा
(फाइल फोटो के साथ) सिलीगुड़ी, 22 अगस्त केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज यानी शनिवार को यहां कई बैठकें करेंगे जिनमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी गलियारे की सुरक्षा एवं दार्जिलिंग पहाड़ क्षेत्र की लंबे समय से जारी समस्याओं के ‘‘स्थायी राजनीतिक समाधान’’ के मुद्दे पर मुख्य रूप से चर्चा होने की संभावना है। गृह मंत्री के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, पश्चिम बंगाल के तीन दिवसीय दौरे के अंतिम दिन शाह सिलीगुड़ी शहर के बाहरी इलाके सुकना स्थित उस होटल में पूर्वाह्न 11 बजे से लगातार दो बैठकों की अध्यक्षता करेंगे, जहां वह ठहरे हुए हैं। उनके अपराह्न करीब ढाई बजे बागडोगरा हवाई अड्डे से दिल्ली रवाना होने की संभावना है।
सूत्रों ने बताया कि शाह सीमा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे और बैठक में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), खुफिया एजेंसियों एवं राज्य प्रशासन के बीच समन्वय पर खास तौर पर चर्चा होने की संभावना है। सिलीगुड़ी के नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के करीब स्थित होने और पूर्वोत्तर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले संकरे गलियारे के रणनीतिक महत्व को देखते हुए यह बैठक अहम मानी जा रही है। शाह के दार्जिलिंग पहाड़ क्षेत्र के निर्वाचित प्रतिनिधियों और नेताओं से भी मुलाकात करने की संभावना है।
इस दौरान क्षेत्र के काफी समय से लंबित राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, इस बैठक की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बैठक में गोरखा समुदाय और पहाड़ क्षेत्र के अन्य निवासियों के लिए ‘‘स्थायी राजनीतिक समाधान’’ को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चुनाव से पहले की गई घोषणा पर मुख्य रूप से चर्चा होने की संभावना है।
गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के अध्यक्ष बिमल गुरुंग और महासचिव रोशन गिरि के बैठक में शामिल होने की संभावना है। दार्जिलिंग से सांसद राजू बिस्ता, राज्य के मंत्री और पहाड़ क्षेत्र के विधायक भी इसमें हिस्सा ले सकते हैं। दार्जिलिंग पहाड़ क्षेत्र में अलग गोरखालैंड राज्य की मांग दशकों से उठती रही है।
पिछली सरकारों ने ‘दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल’ और गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन जैसी व्यवस्थाओं के जरिए इस मुद्दे का समाधान करने की कोशिश की थी। शाह ने 2026 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ‘‘स्थायी राजनीतिक समाधान’’ का वादा किया था जिससे क्षेत्र में अधिक राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता की उम्मीदें बढ़ीं। शाह ने शुक्रवार को सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के फ्रंटियर मुख्यालय का दौरा किया था।
उन्होंने इस दौरान कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया और सीमा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने कावाखाली में तीन नए आपराधिक कानूनों पर एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। शाह ने सीमा पर बाड़ लगाने और सुरक्षा संबंधी बुनियादी ढांचे के लिए जरूरी जमीन उपलब्ध कराने में ‘‘देरी’’ को लेकर पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार की शुक्रवार के कार्यक्रम के दौरान कड़ी आलोचना की।
उन्होंने भूमि हस्तांतरण में तेजी लाने और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ सहयोग के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार की सराहना की। शनिवार के कार्यक्रमों में गृह मंत्री का जोर सिलीगुड़ी गलियारे की सुरक्षा मजबूत करने पर रहने की संभावना है। इस गलियारे को आम तौर पर ‘‘चिकन नेक’’ कहा जाता है।
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