Delhi में Software Engineer की ससुरालियों ने पीट-पीटकर की हत्या, चार हिरासत में
बाहरी दिल्ली के लक्ष्मी पार्क में 31-वर्षीय एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की उसके ससुराल वालों ने शुक्रवार को कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी। उसकी पत्नी ने वैवाहिक विवाद के बाद अपने परिवार के सदस्यों को बुलाया था। पुलिस ने यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि घटना के संबंध में हत्या का मामला दर्ज किया जा रहा है और चार लोगों की पहचान कर पूछताछ के लिए उन्हें हिरासत में लिया गया है। नोएडा में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर पीड़ित विनय गुप्ता की महिला (31) से लगभग साढ़े तीन साल पहले शादी हुई थी। दंपति के साढ़े चार महीने के जुड़वां बच्चे भी हैं, जिनमें एक लड़का और एक लड़की है।
पुलिस के मुताबिक, शुक्रवार सुबह गुप्ता और उनकी पत्नी के बीच विवाद हो गया। इसके बाद, उसने अपने परिवार के लोगों को अपनी ससुराल बुला लिया, जिन्होंने कथित तौर पर गुप्ता के साथ मारपीट की। पुलिस ने कहा कि गुप्ता को हमले में गंभीर चोटें आईं और बाद में उनकी मृत्यु हो गई।
यह घटना तब प्रकाश में आई जब गुप्ता के परिवार ने आरोप लगाया कि उसे उसकी मां के सामने घर के अंदर बेरहमी से पीटा गया। उन्होंने दावा किया कि उनकी पत्नी के परिवार से छह रिश्तेदार दंपत्ति के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए सुबह 11 बजे पहुंचे। परिवार ने दावा किया कि जब कथित हमला शुरू हुआ तो गुप्ता की मां आगंतुकों के लिए पानी और नाश्ते की व्यवस्था करने गई थीं।
जब वह वापस लौटी, तो उन्होंने देखा कि बेटे को पीटा जा रहा है। उन्होंने हस्तक्षेप करने की कोशिश की। परिवार ने आरोप लगाया कि वह मदद के लिए चिल्लाई और हमलावरों से अपने बेटे को छोड़ने की गुहार लगाई।
बाद में, गुप्ता को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके पिता ने उल्लेख किया कि दंपति के बीच कुछ समय से छोटी-मोटी बातों को लेकर विवाद चल रहा था और परिवार को उम्मीद थी कि मामला बातचीत से सुलझ जाएगा। घटना की सूचना पाकर निहाल विहार पुलिस मौके पर पहुंची।
साक्ष्य जुटाने के लिए फोरेंसिक टीम को भी बुलाया गया। घटना की सूचना पाकर निहाल विहार पुलिस मौके पर पहुंची। साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया।
पुलिस के मुताबिक कानूनी कार्यवाही के लिए शव को कब्जे में ले लिया गया है।
Bombay High Court ने Analog Paneer परोसने वाले ठाणे के होटल को राहत देने से किया इनकार
मुंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को ग्राहकों को प्रतिबंधित एनालॉग पनीर परोसने के मामले में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की कार्रवाई का सामना कर रहे ठाणे के एक रेस्तरां को कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ग्राहकों को सड़ा हुआ खाना खिलाकर परेशान करने वाले रेस्तरां को भी कुछ समय के लिए कष्ट सहना पड़ेगा। एनालॉग पनीर एक गैर-डेयरी विकल्प है, जिसे दूध के वसा के बजाय वनस्पति तेल, स्टार्च, इमल्सीफायर और अन्य एडिटिव्स का उपयोग करके बनाया जाता है।
यह असली पनीर की तुलना में बनाने में काफी सस्ता होता है और इसमें प्रोटीन की मात्रा भी बहुत कम होती है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की खंडपीठ ने काव्यात्मक न्याय (पोएटिक जस्टिस) का उल्लेख करते हुए सख्त टिप्पणी की। पीठ ने जैसी करनी वैसी भरनी की तर्ज पर कहा कि उडुपी स्वाद रेस्तरां को भी अपने किए का परिणाम भुगतना ही होगा।
सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताओं और खाद्य सुरक्षा नियमों के व्यापक उल्लंघन को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने इस महीने की शुरुआत में एनालॉग या नकली गैर-डेयरी पनीर के निर्माण और बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था। सरकारी आदेश के अनुसार, यदि असुरक्षित भोजन के सेवन से किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो दोषियों को उम्रकैद और कम से कम 10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा हो सकती है। रेस्तरां ने एफडीए के 11 अगस्त के उस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसके तहत प्रतिबंधित ‘एनालॉग’ पनीर परोसने के कारण उसका लाइसेंस निलंबित कर दिया गया था।
याचिका में रेस्तरां ने तर्क दिया कि एफडीए को निलंबन से पहले उन्हें सुधार नोटिस जारी करना चाहिए था। अदालत, जो अक्सर होटलों के खिलाफ एफडीए की अत्यधिक सख्त कार्रवाई पर सवाल उठाती रही है, उसने शुक्रवार को सख्त रुख अपनाया। पीठ ने कहा, आपको पहले कष्ट सहना होगा क्योंकि आपने लोगों को यह (एनालॉग पनीर) खिलाकर कष्ट पहुंचाया है।
यह काव्यात्मक न्याय है। हम इस बार एक अलग और सख्त रुख अपनाएंगे। अदालत ने एफडीए को अपना हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई सात सितंबर तय की।
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