MEA ने Pakistan की आपत्ति खारिज की, जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की जम्मू-कश्मीर पर टिप्पणी को लेकर इस्लामाबाद में शीर्ष अमेरिकी राजनयिक को तलब किए जाने के संबंध में विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान की हताशा पर टिप्पणी करने का कोई कारण नजर नहीं आता। गोर ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘‘मुझे पाकिस्तान की हताशा पर टिप्पणी करने का कोई कारण नहीं दिखता।’’ गोर ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर के दौरे के दौरान कहा था कि यह केंद्र शासित प्रदेश भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उनकी टिप्पणी के कुछ घंटों बाद, पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी को तलब किया और गोर की टिप्पणी पर ‘‘कड़ी आपत्ति’’ जताई। गोर ट्रंप प्रशासन में दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विशेष दूत भी हैं। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने एक बयान में कहा, ‘‘पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को ‘भारत का हिस्सा’ बताए जाने की कड़ी निंदा की और इसे स्पष्ट रूप से खारिज किया।’’ जायसवाल ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं और हमेशा रहेंगे।
जायसवाल ने राष्ट्रीय राजधानी में पाकिस्तान उच्चायोग के बाहर कुछ अनधिकृत ढांचों को हटाने के भारत के जवाबी कदम पर पूछे गए एक सवाल का भी जवाब दिया। भारत का यह कदम पाकिस्तान द्वारा इस सप्ताह इस्लामाबाद में भारतीय मिशन के बाहर पार्किंग पोल हटाए जाने के बाद उठाया गया। जायसवाल ने कहा, ‘‘हमारे अनुरोध के बावजूद वहां (इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के बाहर) कुछ ढांचे हटा दिए गए थे।
ऐसा होने के बाद, हमने एक आनुपातिक कार्रवाई की - हमने यहां (दिल्ली में) पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर की लेन में स्थित कुछ अस्थायी ढांचे हटा दिए।
NHRC ने Delhi में भीषण गर्मी पर पर्यावरण मंत्रालय से 2 हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को दिल्ली में बहुत अधिक गर्मी का संवेदनशील समुदायों पर असर की एक शिकायत पर गौर करने तथा दो सप्ताह के अंदर कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। गैर-सरकारी पर्यावरण संगठन ग्रीनपीस इंडिया ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। ग्रीनपीस इंडिया ने यहां जारी एक बयान में कहा कि मानवाधिकार आयोग ने 18 अगस्त की अपनी कार्यवाही में कहा कि अगर आरोप सही हैं, तो यह पीड़ितों के मानवाधिकारों के उल्लंघन के समान है।
संगठन जिस शिकायत का जिक्र कर रहा था, उसमें रेहड़ी-पटरी वाले, बाहर काम करने वाले लोगों आदि पर भीषण गर्मी के असर को लेकर चिंता जताई गई थी। ग्रीनपीस इंडिया ने मई 2025 में यह शिकायत दर्ज करायी थी और इसमें दिल्ली में खुले में काम करने वालों और संवेदनशील समुदायों पर भीषण गर्मी के असर पर संगठन की रिपोर्ट का इस्तेमाल किया गया था। शिकायत में एक सरकारी रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया कि सिर्फ 32 प्रतिशत सरकारी अस्पताल लू के मरीज़ों के इलाज के लिए तैयार थे, जबकि 68 प्रतिशत में जरूरी सुविधाएं नहीं थीं।
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