PFI Case: न्यायिक हिरासत में बंद आरोपी की मौत, NIA Court ने परिजनों को शव सौंपने को कहा
प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के खिलाफ दर्ज एक मामले में न्यायिक हिरासत में बंद एक आरोपी की मौत हो गई, जिसके बाद यहां की एक अदालत ने उसका शव उसके परिजन को सौंपे जाने का आदेश दिया है। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की विशेष अदालत के न्यायाधीश पी. के. मोहनदास ने पीएफआई की कथित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जुड़े मामले में 64वें आरोपी मोहम्मद यासर अराफात का शव उसके परिजन को सौंपे जाने का आदेश दिया। कोच्चि के पास अलंगाड के नीरिकोड में रहने वालो अराफात (34) ने इस साल फरवरी में एनआईए अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण किया था।
उसे त्रिशूर के विय्यूर में उच्च सुरक्षा वाली जेल में रखा गया था। उसे बाद में हृदय संबंधी बीमारी के कारण तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में बृहस्पतिवार को उसकी मौत हो गई।
अराफात के वकील की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने तिरुवनंतपुरम के पूजाप्पुरा केंद्रीय कारागार के अधीक्षक को कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शव उसके करीबी रिश्तेदारों को सौंपने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया। अदालत ने अधीक्षक को जांच करने और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 196 के तहत रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया। इस धारा के तहत न्यायिक हिरासत में किसी व्यक्ति की मौत के कारणों की जांच करना अनिवार्य है।
एनआईए ने पीएफआई की कथित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की 2022 में जांच शुरू की थी, जिसके बाद केंद्र सरकार ने संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था। एनआईए इस मामले में अब तक 71 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुका है।
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