तेलंगाना के यादाद्रि भुवनगिरि जिले से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। यहां स्थित एक फार्मास्युटिकल (दवा) कंपनी की निर्माण इकाई में अचानक रिएक्टर फटने से दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि नौ अन्य कर्मचारी घायल हो गए। पुलिस ने शनिवार को घटना की जानकारी देते हुए बताया कि यह हादसा पोचमपल्ली मंडल में स्थित फार्मा प्लांट में हुआ।
पुलिस के मुताबिक, यह घटना शुक्रवार देर रात पोचमपल्ली मंडल स्थित इकाई में उस समय हुई, जब श्रमिकों की पाली बदल रही थी। उसने बताया कि विस्फोट के बाद इकाई में आग लग गई।
पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘दो लोगों की मौत हो गई। नौ लोग घायल हुए हैं। इनमें दो लोग 50 प्रतिशत से अधिक झुलस गए हैं जबकि सात अन्य को मामूली चोटें आई हैं।’’
अधिकारी ने बताया कि घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
बाद में अग्निशमन विभाग ने आग पर काबू पा लिया। इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।
शिफ्ट बदलने के दौरान हुआ हादसा
पुलिस के अनुसार, यह भयानक विस्फोट शुक्रवार देर रात हुआ। उस समय प्लांट के अंदर शिफ्ट चेंज का समय था और मजदूर काम बदल रहे थे।
अचानक विस्फोट: रिएक्टर में अचानक जोरदार धमाका हुआ, जिसके तुरंत बाद पूरी यूनिट में भीषण आग फैल गई।
अग्निशमन विभाग की त्वरित कार्रवाई: सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया।
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NEET (UG) परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर हुए 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के विरोध प्रदर्शन के कुछ ही दिनों बाद, शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक और बड़ा आंदोलन देखने को मिला। इस बार यह प्रदर्शन आरक्षण नीति के खिलाफ था, जहां सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' के बैनर तले विरोध जताया। प्रदर्शनकारी हाथों में बैनर, पोस्टर और भगवा झंडे लिए जाति-आधारित आरक्षण को समाप्त करने और इसके स्थान पर आर्थिक आधार पर सहायता देने की मांग कर रहे थे।
मुख्य मांगें: आर्थिक आधार और क्रीमी-लेयर का नियम
विरोध प्रदर्शन के दौरान अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा (ABKM) से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण नीति में व्यापक समीक्षा और सुधार की मांग की।
न्यूज़ एजेंसी PTI ने अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा (ABKM) से जुड़े एक प्रदर्शनकारी के हवाले से कहा, "हमारी मांग है कि सरकारी मदद की ज़रूरत तय करते समय आर्थिक स्थिति पर विचार किया जाना चाहिए। किसी गरीब व्यक्ति को, चाहे उसकी जाति कोई भी हो, शिक्षा, कोचिंग और अन्य ज़रूरतों के लिए मदद मिलनी चाहिए।"
आंदोलनकारियों ने यह भी मांग की कि मौजूदा सामाजिक और आर्थिक स्थितियों को देखते हुए आरक्षण नीति की समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि आरक्षण में "क्रीमी-लेयर" का नियम लागू किया जाए और अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए नीतियों में बदलाव किया जाए।उन्होंने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के ढांचे पर भी सवाल उठाए। PTI ने एक अन्य प्रदर्शनकारी के हवाले से कहा, "हम कई सालों से यह मुद्दा उठा रहे हैं। हमारा कहना है कि सरकार को यह जांचना चाहिए कि क्या मौजूदा सिस्टम अपने मकसद को पूरा कर रहा है और क्या इसका फ़ायदा ज़मीनी स्तर पर लोगों तक पहुँच रहा है।"
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया
बाद में दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। अधिकारियों का कहना था कि उनके पास जंतर-मंतर पर किसी भी तरह के आंदोलन या जमावड़े की अनुमति नहीं थी। हालाँकि, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट DCP के ऑफ़िस से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि रामलीला मैदान में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी और इसके लिए नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफ़िकेट (NOC) जारी किया गया था।
हालाँकि, पुलिस ने कहा कि कानून-व्यवस्था के नज़रिए से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन से उन्हें "कोई आपत्ति नहीं" है। दिल्ली पुलिस के एक बयान में पहले कहा गया था, "नई दिल्ली ज़िले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा (जो पहले CrPC की धारा 144 के बराबर थी) पहले से ही लागू है।"
पुलिस ने चेतावनी दी, "नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही बिना पुष्टि वाली सामग्री को न तो बढ़ा-चढ़ाकर बताएं, न ही आगे भेजें या शेयर करें। फ़ेक न्यूज़ बनाने या फैलाने वाले लोगों के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।"
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