26/11 मुंबई हमला: BNSS के तहत पहली बार हाफिज सईद समेत 6 आतंकियों पर गैर-हाजिरी में ट्रायल शुरू
26/11 Mumbai terror attack: मुंबई के 26/11 के आतंकवादी हमलों में शामिल छह पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ 'ट्रायल इन एब्सेंटिया' (गैर-हाजिरी में सुनवाई) की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 के लागू होने के बाद, किसी आतंकवाद के मामले में इस तरह की यह पहली कार्रवाई है। ये छह आरोपी वर्तमान में फरार चल रहे हैं और माना जा रहा है कि वे पाकिस्तान में छिपे हुए हैं।
इस सूची में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का संस्थापक हाफिज सईद, जकी-उर-रहमान लखवी, साजिद मीर, अबू अलकमा, आसिम उर्फ अबू कहाफा और मेजर अब्दुर रहमान पाशा शामिल हैं। यह कदम मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती के उस अनुरोध के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर उज्ज्वल निकम से BNSS की धारा 356 के प्रावधानों के तहत इन आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू करने को कहा था। यह धारा अदालतों को भगोड़े घोषित अपराधियों की अनुपस्थिति में, निर्धारित कानूनी सुरक्षा उपायों के साथ मुकदमा चलाने की अनुमति देती है।
अदालत ने जारी की उद्घोषणा, 18 अगस्त तक पेश होने का निर्देश
26/11 मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने छह आरोपियों को 18 अगस्त या उससे पहले अदालत के समक्ष पेश होने का निर्देश देते हुए एक उद्घोषणा (प्रोकलेमेशन) जारी की है। अभियोजन पक्ष द्वारा वांटेड आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किए जाने के बाद स्पेशल जज एस.आर. नावान्देर ने यह आदेश पारित किया। इस उद्घोषणा को इंटरपोल के माध्यम से प्रकाशन के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भी भेज दिया गया है।
विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष ने इन छह आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश किए हैं और जांच के दौरान इनकी भूमिकाएं स्पष्ट रूप से सामने आई हैं। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, निकम ने कहा, "अजमल कसाब ने जांच के दौरान इनकी भूमिका का खुलासा किया था।" कसाब इस हमले में पकड़ा गया एकमात्र जीवित पाकिस्तानी आतंकवादी था। अभियोजन पक्ष ने इन आरोपियों के खिलाफ इंटरपोल के माध्यम से भी उद्घोषणाएं जारी करने की मांग की है।
मुंबई पुलिस ने कार्यवाही में तेजी लाने की मांग की
मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती ने कहा कि 26/11 का मामला अत्यधिक संवेदनशील है और फरार आरोपियों के खिलाफ जुटाए गए सबूतों के आधार पर कानूनी कार्यवाही को आगे बढ़ाना जरूरी था।
भारती के अनुसार, अधिकारी BNSS की धारा 356 के प्रावधानों का उपयोग करना चाहते हैं ताकि आरोपियों की लंबी अनुपस्थिति के कारण न्यायिक प्रक्रिया में अनिश्चितकाल के लिए देरी न हो। यह विशेष प्रावधान अदालतों को उन आरोपियों के खिलाफ आगे बढ़ने का अधिकार देता है जिन्हें भगोड़ा घोषित किया जा चुका है और जो जानबूझकर कानून की प्रक्रिया से बच रहे हैं।
26/11 हमले से कैसे जुड़े हैं ये छह आरोपी
इन आरोपियों पर नवंबर 2008 के हमलों की साजिश रचने, समन्वय करने और देखरेख करने में अलग-अलग भूमिकाएं निभाने का आरोप है। हाफिज सईद इस बड़ी साजिश के मुख्य सूत्रधारों में से एक है। लखवी, अबू कहाफा और अबू अलकमा पर आरोप है कि वे हमलों के दौरान कराची के मालिर स्थित एक कंट्रोल रूम में मौजूद थे और पूरे ऑपरेशन तथा हमलावरों के प्रशिक्षण की निगरानी कर रहे थे।
इस कंट्रोल रूम में कथित तौर पर सैयद जबीउद्दीन अंसारी उर्फ अबू जुंदल भी मौजूद था, जो एक भारतीय नागरिक है और जिस पर हमलावरों को मुंबई में आसानी से ऑपरेट करने के लिए हिंदी तथा स्थानीय भाषा सिखाने का आरोप है। पुलिस ने आरोप लगाया है कि कई हैंडलर्स ने कराची के कंट्रोल रूम से टेलीविजन पर इन हमलों को लाइव देखा था और ऑपरेशन के दौरान लगातार हमलावरों के संपर्क में थे।
26/11 के घातक हमलों में गई थी 166 लोगों की जान
मुंबई में यह भयानक आतंकी हमला 26 नवंबर 2008 को शुरू हुआ था और करीब तीन दिनों तक चला, जिसमें शहर के कई प्रमुख ठिकानों को निशाना बनाया गया था। आतंकवादियों ने ताजमहल पैलेस होटल, ट्राइडेंट होटल, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, नरिमन हाउस, कामा अस्पताल, लियोपोल्ड कैफे और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं।
इस हमले में भारत, ब्रिटेन, अमेरिका और इजराइल के नागरिकों समेत कुल 166 लोगों की मौत हो गई थी। सुरक्षा बलों ने 10 पाकिस्तानी आतंकवादियों में से नौ को ढेर कर दिया था, जबकि अजमल कसाब को जिंदा पकड़ लिया गया था। बाद में उस पर मुकदमा चलाया गया और उसे दोषी ठहराते हुए 2012 में फांसी दे दी गई थी।
फरार चल रहे आरोपियों की अनुपस्थिति के बावजूद उन्हें भारतीय न्याय प्रक्रिया के दायरे में लाने के लिए यह नया कानूनी कदम उठाया गया है, ताकि हमले में शामिल विदेशी साजिशकर्ताओं और संचालकों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया जा सके।
BJP state in-charge: 2027 चुनाव से पहले BJP का बड़ा दांव, इन नेताओं को यूपी-पंजाब-गुजरात की कमान
BJP state in-charge: आगामी वर्ष में उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मंगलवार को नए राज्य चुनाव प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने संगठन में बड़े फेरबदल की प्रक्रिया के तहत इन तीनों महत्वपूर्ण राज्यों के लिए नए प्रभारियों के नामों का ऐलान किया है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद अहम माने जाने वाले इन राज्यों में पार्टी की पकड़ मजबूत करने और गतिविधियों में समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से यह नियुक्तियां की गई हैं।
विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी
पार्टी ने सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के लिए वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े को बीजेपी का नया राज्य चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है। उनके साथ ही जगदिश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आगामी चुनावी समर को देखते हुए उत्तर प्रदेश में पार्टी संगठन को धार देने के लिए यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है।
पंजाब और गुजरात की कमान इन्हें सौंपी गई
इसके अलावा, पंजाब में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की जिम्मेदारी सतीश पूनिया को सौंपी गई है, जिन्हें राज्य का नया चुनाव प्रभारी बनाया गया है। वहीं, राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले गुजरात राज्य के लिए तरुण चुघ को बीजेपी का नया राज्य चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया है।
2027 में विधानसभा चुनाव
2027 में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिससे यह राज्य-स्तरीय राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष बन गया है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर और हिमाचल प्रदेश में चुनाव होने की उम्मीद है।
403 विधानसभा सीटों वाला उत्तर प्रदेश सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करने वाले मुकाबलों में से एक होगा। पंजाब में 117 विधानसभा सीटें हैं, जबकि गुजरात में 182 सीटें हैं। उत्तराखंड (70 सीटें), गोवा (40 सीटें), मणिपुर (60 सीटें) और हिमाचल प्रदेश (68 सीटें) में भी चुनाव होने हैं।
चुनाव पूरे वर्ष के दौरान होंगे; उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर जैसे राज्यों में चुनाव 2027 की शुरुआत में होने की उम्मीद है, जबकि गुजरात और हिमाचल प्रदेश में साल के बाद के हिस्से में मतदान होने की संभावना है, जो चुनाव आयोग के कार्यक्रम पर निर्भर करेगा।
बीजेपी की राष्ट्रीय टीम में फेरबदल
बड़े पैमाने पर किए गए फेरबदल के तहत, बीजेपी ने सोमवार को पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में अपने राष्ट्रीय संगठन में व्यापक बदलाव की घोषणा की, जिसमें कई नए चेहरे और प्रमुख नेताओं को शामिल किया गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया है, जबकि पूर्व आरएसएस पदाधिकारी राम माधव को उपाध्यक्ष बनाया गया है।
पार्टी ने कहा कि नई टीम युवाओं और अनुभव के बीच संतुलन बनाती है। जिन वरिष्ठ नेताओं को बरकरार रखा गया है, उनमें राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया शामिल हैं, जिन्हें पार्टी के 13 उपाध्यक्षों में से एक नियुक्त किया गया है।
विस्तारित टीम में घोषित 65 पदाधिकारियों में से 51 नए चेहरे हैं, जिनमें 12 महिलाएं और अल्पसंख्यक समुदायों के छह नेता शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है; यह पद उन्होंने मई 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले मंत्रिमंडल में शामिल होने से पहले भी संभाला था। बीजेपी ने बी एल संतोष को राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के पद पर भी बरकरार रखा है, जो पार्टी के प्रमुख संगठनात्मक पदों में से एक है।
इस फेरबदल में पार्टी के युवा और आईटी विंग में भी बदलाव किए गए। बीजेपी के आईटी विभाग के प्रमुख के तौर पर अमित मालवीय की जगह छत्तीसगढ़ के दीपक म्हास्के को लाया गया है। गुजरात के हेमांग जोशी को लोकसभा सांसद तेजस्वी सूर्या की जगह BJP युवा मोर्चा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
संगठन में यह बड़ा बदलाव, 2015 में तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के समय हुए बड़े फेरबदल के एक दशक से भी ज़्यादा समय बाद हुआ है। इन बदलावों के कारण केंद्र में कैबिनेट में भी फेरबदल की अटकलें शुरू हो गई हैं।
पार्टी के इन संगठनात्मक बदलावों का मुख्य उद्देश्य इन तीनों राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी की तैयारियों को पुख्ता करना और चुनावी गतिविधियों को सुचारू रूप से संचालित करना है।
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