PM CARES Fund Audit: पीएम केयर्स फंड में 1 साल में 1279 करोड़ का इजाफा; 8452 करोड़ हुआ खजाना; जारी हुए ताजा वित्तीय आंकड़े
देश में आपात और संकट की परिस्थितियों से निपटने के लिए बनाए गए पीएम केयर्स फंड की वित्तीय स्थिति को लेकर ताजा ऑडिट आंकड़े सार्वजनिक कर दिए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कोष के फंड में लगातार इजाफा देखने को मिला है, जिसमें दान के अलावा बैंकों में जमा रकम पर मिले भारी ब्याज और विभिन्न एजेंसियों से आए रिफंड ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान फंड के खर्च बेहद सीमित रहे हैं, जिसके कारण क्लोजिंग बैलेंस में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
एक साल में 1279 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी, खर्च हुए सिर्फ 87.85 लाख
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 की शुरुआत में पीएम केयर्स फंड का ओपनिंग बैलेंस 7,173.03 करोड़ रुपये था। साल भर में घरेलू और विदेशी दान, बैंक ब्याज और रिफंड के जरिए कुल 1,279.91 करोड़ रुपये की आमदनी दर्ज हुई। वहीं इस दौरान विभिन्न मदों में कुल व्यय मात्र 87.85 लाख रुपये रहा।
इस प्रकार वित्तीय वर्ष के अंत यानी 31 मार्च 2025 तक फंड का क्लोजिंग बैलेंस बढ़कर 8,452.07 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
एफडी और बचत खातों के ब्याज से हुई 475 करोड़ की कमाई
फंड के प्रबंधन में निवेश और जमा पर मिलने वाले रिटर्न का बड़ा योगदान रहा है। रिपोर्ट के अनुसार शेड्यूल्ड बैंकों में किए गए फिक्स्ड डिपॉजिट से फंड को 469.38 करोड़ रुपये का भारी ब्याज मिला। इसके अलावा सेविंग्स बैंक अकाउंट्स में जमा धनराशि पर 5.77 करोड़ रुपये की ब्याज आय प्राप्त हुई। फंड की कुल राशि में से 7,846.66 करोड़ रुपये सुरक्षित रूप से फिक्स्ड डिपॉजिट के तौर पर रखे गए हैं।
घरेलू दान से मिले 479 करोड़, एजेंसियों से 324 करोड़ का रिफंड
वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान पीएम केयर्स फंड को देश के भीतर से 479.04 करोड़ रुपये का घरेलू चंदा प्राप्त हुआ, जबकि विदेशी स्रोतों से 92.83 लाख रुपये का डोनेशन मिला। इसके अतिरिक्त विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने वाली कार्यकारी एजेंसियों से अप्रयुक्त राशि के रूप में 324.66 करोड़ रुपये का रिफंड वापस फंड में जमा हुआ। साथ ही फिक्स्ड डिपॉजिट पर कटे टीडीएस के रिफंड के रूप में 13.49 लाख रुपये भी कोष को प्राप्त हुए।
SC on NEET Protest: नीट प्रदर्शनों में पुलिसिया ज्यादती की होगी उच्चस्तरीय जांच; SC गठित करेगा 3 सदस्यीय हाई पावर्ड कमेटी
नीट पेपर लीक विवाद और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में हुए छात्र आंदोलनों पर पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत में छात्रों की ओर से पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग, पैलेट गन और लाठीचार्ज के आरोप लगाए गए थे, जबकि सरकार और पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था की स्थिति और सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की बात रखी गई।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने पूरे मामले की स्वतंत्र और तटस्थ जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाने का निर्णय लिया है।
पूर्व जज और रिटायर्ड डीजीपी होंगे कमेटी के सदस्य
सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने बताया कि इस प्रस्तावित कमेटी में न्यायपालिका और पुलिस प्रशासन के प्रतिष्ठित पूर्व अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। पीठ ने कहा कि समिति में सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश, हाईकोर्ट के एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश और पुलिस महानिदेशक रैंक से सेवानिवृत्त एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
इसके लिए उन अधिकारियों की सहमति ली जा रही है जिनका संबंधित राज्यों या विवाद से कोई सीधा संबंध न रहा हो, ताकि जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।
लाठीचार्ज, यौन उत्पीड़न और हिंसा के हर पहलू की होगी पड़ताल
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कमेटी प्रदर्शनों के दौरान उपजे सभी विवादों की विस्तृत पड़ताल करेगी। इसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिसिया बल प्रयोग, महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए छेड़छाड़ व दुर्व्यवहार के आरोप, इंटरनेट पर उत्पीड़न और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को लगी चोटों जैसे सभी मुद्दों की समीक्षा की जाएगी।
सीजेआई ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जो भी दोषी होगा, उसके कृत्य को उचित नहीं ठहराया जा सकता और पूरे मामले को उसके तार्किक अंत तक पहुंचाया जाएगा।
पीड़ितों को सीधे मिलेगा सुनवाई का मौका, अंतरिम रिपोर्ट भी दे सकेगी कमेटी
अदालत ने कहा कि इस उच्चाधिकार प्राप्त समिति को सभी आवश्यक प्रशासनिक व बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी ताकि कोई भी पीड़ित छात्र या नागरिक सीधे कमेटी के सामने अपनी बात रख सके। पीठ ने यह भी छूट दी है कि समिति को अपनी अंतिम रिपोर्ट का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी, वह जरूरी मामलों में समय-समय पर अंतरिम रिपोर्ट भी अदालत को सौंप सकती है।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सर्विलांस, फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक और अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार जैसे संवैधानिक मुद्दों पर अदालत स्वयं विचार करती रहेगी।
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