आजकल का व्यस्त लाइफस्टाइल में जिम के समय निकालना बेहद मुश्किल हो जाता है। लेकिन दिमाग की कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए घंटों जिम में पसीना बहाने की जरूरत नहीं है। बल्कि आप एक सिंपल टेनिस बॉस से घर पर कुछ मिनटों का वर्कआउट करके न्यूरॉन्स को फिर से एक्टिव कर सकते हैं। यह छोटी सी बॉल आपके स्ट्रेस को कम करने और ब्रेन की स्पीड को बढ़ाने में काफी सहायक साबित होती है।
ऐसे में इसके बारे में जानकारी होना तो बनता है। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि यह बॉल एक्सरसाइज क्या है और यह कैसे फायदा पहुंचाता है।
बॉल एक्सरसाइज
यह एक आसान और असरदार ट्रेनिंग तकनीक है। जिसमें छोटी टेनिस बॉल का यूज किया जाता है। यह मुख्य रूप से आपके आंखों और हाथों के तालमेल को सुधारने पर काम करती है।
जब आपकी आंखें बॉल की स्पीड को ट्रैक करती हैं और हाथ उस बॉल को पकड़ते हैं, तो दिमाग के ग्रे सेल्स तेजी से काम करते हैं। इसके अलावा यह न्यूरोप्लास्टिसिटी को भी बढ़ावा देता है। जिससे फोकस और फैसले लेने की स्पीड बेहतर होती है।
सिंगल हैंड ड्रॉप-कैच
सिंगल हैंड ड्रॉप-कैच के लिए बॉल को सीखे खड़े होकर अपने कंधे की ऊंचाई पर रखें और फिर बिना उछाल दिए इसको छोड़ दें। बॉल के जमीन पर टप्पा खाने से ठीक पहले उसको उसी हाथ से तेजी से पकड़ने की कोशिश करना चाहिए।
फायदे
यह वर्कआउट आपकी आंखों के रिफ्लेक्सिस और ब्रेन रिस्पॉन्स टाइम को तेज बनाता है।
जब दिमाग और हाथ का तालमेल पलक झपकते बनता है, तो इससे एकाग्रता क्षमता में अच्छा खासा सुधार देखने को मिलता है।
अल्टरनेट हैंड टॉस
इस एक्सरसाइज में बॉल को हवा में थोड़ा ऊपर की ओर उछालें। फिर बारी-बारी से दाएं और बाएं हाथ से कैच करना चाहिए। इसमें एक हाथ से फेंककर दूसरे हाथ से संतुलित करके पकड़ना होता है।
फायदे
यह एक्टिविटी दिमाग के दोनों हिस्सों, लेफ्ट और राइट हेमीस्फीयर को एक साथ एक्टिव करता है।
इससे आंखों और हाथों का तालमेल मजबूत होता है। इससे मानसिक थकान दूर होती है। ब्रेन हमेशा यंग और एक्टिव बना रहता है।
कुछ अहम बातें
घर के किसी ऐसे कमरे या बालकनी को चुनें। जहां आसपास कोई शीशे या टूटने वाली चीज न हो।
बॉल को उछालने या फेंकने के समय स्पीड अधिक तेज न रखें। जिससे रिफ्लेक्सिस आपको धीरे-धीरे समझ आए।
रोजाना सिर्फ 5 से 10 मिनट का समय निकालें। इसको आप काम के बीच में ब्रेक लेते समय भी कर सकते हैं।
एक्सरसाइज करते समय अपना पूरा ध्यान बॉल की दिशा और हाथों के मूवमेंट पर रखना चाहिए।
Continue reading on the app
वैसे आजकल लोगों में कई बार हीमोग्लबिन की कमी देखी जाती है। जिसके बाद लोग अपनी डाइट पर ध्यान देते हैं। ब्लड का लेवर नेचुरल रुप से बढ़ाते हैं। गौरतलब है कि शरीर में मौजूद हर एक टिश्यू तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए हीमोग्लोबिन बेहद जरुरी है, लेकिन ब्लड का स्तर ज्यादा होने से बड़ा जोखिम देखने को मिलता है। कई बार हीमोग्लबिन अधिक होने से ब्लड क्लॉट, स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
जब हीमोग्लोबिन का हाई होने सेल्स में ज्यादा रेड ब्लड सेल्स बनने या फिर प्लाज्मा के कम होने का इशारा करता है। वैसे ब्लड अधिक होने से कोई बीमारी नहीं बल्कि, यह किसी न किसी बड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता है। आइए आपको बताते हैं हाई होने के कारण और खतरे।
क्या होता है हीमोग्लोबिन और यह क्या करता है?
हीमोग्लोबिन आयरन से भरपूर प्रोटीन है जो शरीर के हर सेल्स में मौजूद रखता है। इसका कार्य है कि फेफड़ों से ताजा ऑक्सीजन लेकर शरीर के हर टिश्यू, मसल और ऑर्गन तक पहुंचाना।
जानें हीमोग्लोबिन का नॉर्मल रेंज
पुरुष: 13.8-17.2 g/dl
महिला: 12.1-15.1 g/dl
बच्चे: 11-16 g/dl
कब यह खतरनाक माना जाता है?
पुरुषों में 17.2g/dl से ज्यादा, महिलाओं और बच्चों में 16 g/dl या इससे अधिक हीमोग्लोबिन का स्तर खतरनाक माना जाता है।
क्या कारण हो सकते हैं?
हीमोग्लोबिन हाई होने का प्राइमरी कारण है कि रेयर किस्म का ब्लड कैंसर पॉलिसेथेमिया वेरा। इसके सेकंडरी कारणों में शामिल हैं-
- फेफड़े की क्रॉनिक बीमारी- गंभीर अस्थमा, स्लीप एप्निया
- धूम्रपान
- पहाड़ी इलाकों में रहने की वजह से ऑक्सीजन कम हो जाता है, जो कि ज्यादा हीमोग्लोबिन बनाने के लिए ट्रिगर करता है
- गंभीर रुप से डिहाइड्रेशन की समस्या होने पर
- किंडनी की बीमारी और ट्यूमर
- जन्म से दिल की बीमारी हो या क्रॉनिक सायनॉटिक हार्ट डिजीज हो
किन कारण से हीमोग्लोबिन का स्तर अधिक हो सकता है
- कार्यस्थल पर कार्बन मोनोऑक्साइड के संपर्क में आना।
- लंबे समय से प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हों।
ये होते हाई हीमोग्लोबिन के लक्षण
-सिरदर्द
-चक्कर या सिर में हल्कापन
-आंखों से धुंधला दिखना
- थकान और कमजोरी
- सांस लेने में परेशानी
- हाथ और पैरों की त्वचा लाल रहना
- महिलाओं में पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग होना
जानें खतरे
- ब्लड क्लॉट या डीप वेन थ्रोम्बोसिस की समस्या
- स्ट्रोक
- हार्ट अटैक
- हाइपरटेंशन
- मुख्य अंगों तक खून का बहाव कम हो जाना
- स्प्लीन का फैल जाना
इनसे मिलेगी मदद
- धूम्रपान ना करें
- अपने हाइड्रेशन का ध्यान रखें
- लगातार बैठे रहने से बचें
- ऑक्सीजन का लेवल चेक करते रहे और क्रॉनिक बीमारियों का इलाज कराएं
- डॉक्टर की सलाह लिए बिना आयरन सप्लीमेंट ना लें
- मोटापा, डायबिटीज और ब्ल़ड प्रेशर नियंत्रित रखें
- सांस से संबंधित समस्या होने पर ऊंची जगह पर जाने से पहले एक्सपर्ट की राय जरुर लें
कब डॉक्टर को दिखाएं?
- बार-बार चक्कर आना और सिरदर्द हो
- बिना काम किए भी थकान रहती हो
- सांस लेने में दिक्कत हो रही हो
- लगातार ब्लड क्लॉट की समस्या हो रही हो
- टेस्ट रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन का लेवल लगातार अधिक आ रहा हो।
Continue reading on the app