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सबालेंका के संघर्ष की कहानी:कभी खेल छोड़ना चाहती थीं, पर हर बार टेनिस ने बिखरने से बचाया, अब नजर तीसरे यूएस ओपन पर

‘जब लोग मुझे टेनिस कोर्ट पर खेलते देखते हैं, तो उन्हें एक आक्रामक, तेज फोरहैंड वाली और कभी-कभी गुस्से में अपनी टीम पर चिल्लाने वाली खिलाड़ी दिखाई देती है। वे मुझे बेबाक और खुलकर बोलने वाली कहते हैं। पर, इस मुकाम तक पहुंचने के लिए मैंने कई मुश्किलें, दर्द और आंसुओं से भरी रातें झेली हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मेरा बचपन बेलारूस के मिन्स्क में बीता। जब मैं छह साल की थी, तब मेरे पिता सर्गेई पहली बार मुझे टेनिस कोर्ट ले गए। वे खुद आइस हॉकी खिलाड़ी रहे थे, पर 19 साल की उम्र में एक कार दुर्घटना ने उनका करिअर खत्म कर दिया। इसलिए शायद वे मेरे भीतर चैंपियन देखते थे। बचपन से ही मेरा स्वभाव सबसे अलग था। जहां दूसरी लड़कियां कोच की हर बात मान लेती थीं, वहीं मैं अपनी राय खुलकर रखती थी और बहस भी करती थी। मेरी दुनिया टेनिस, पढ़ाई और प्रैक्टिस तक ही सीमित थी। सोशल मीडिया से कोई लेना-देना नहीं था। 2018 में, 20 वर्ष की उम्र में, मुझे डब्ल्यूटीए का ‘न्यूकमर ऑफ द ईयर’ चुना गया। मैंने कई बड़ी खिलाड़ियों को हराया। उसी दौरान मैंने और मेरे पिता ने सपना देखा था कि 25 साल की उम्र से पहले मैं कम से कम दो ग्रैंड स्लैम खिताब जीतूंगी। जिंदगी हमेशा हमारी योजनाओं के मुताबिक नहीं चलती। 2019 में मेनिनजाइटिस के कारण मेरे पिता का सिर्फ 43 साल की उम्र में निधन हो गया। वे पिता ही नहीं, बल्कि मेरे सबसे अच्छे दोस्त व मार्गदर्शक थे। उनके जाने से मैं पूरी तरह टूट गई। उन्हें श्रद्धांजलि देने की चाह में मैंने खुद पर ग्रैंड स्लैम जीतने का इतना दबाव बना लिया कि मेरा खेल व आत्मविश्वास दोनों प्रभावित होने लगे। तब मां ने मुझे कहा,‘आर्यना, तुम्हारे पापा तुम्हारी हर उपलब्धि पर गर्व करते थे। तुम्हारा इस स्तर तक पहुंचना ही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है।’ मां की इन बातों ने दिल का बोझ कम कर दिया और आगे बढ़ने की ताकत दी। पर, चुनौतियां अभी बाकी थीं। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद माहौल बदल गया। मुझे आलोचनाओं और नफरत का सामना करना पड़ा, जिससे मैं अक्सर टूट जाती थी। इसका असर खेल पर भी पड़ा और मेरी सर्विस बेहद खराब हो गई। उस साल मैंने 428 डबल फॉल्ट किए। कई एक्सपर्ट ने मेरा करिअर खत्म मान लिया था और मैं खेल छोड़ने तक का सोचने लगी थी। जब पूरी दुनिया मुझे खत्म हो चुका खिलाड़ी मानने लगी थी, मैं खेल छोड़ने के करीब थी। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। बायोमैकेनिक्स एक्सपर्ट की मदद से अपनी सर्व तकनीक को नए सिरे से गढ़ा और जबरदस्त वापसी की। मैंने स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट पर निर्भर रहना छोड़ दिया और खुद पर भरोसा करना सीखा। मुझे एहसास हुआ कि मुझसे बेहतर मुझे कोई नहीं समझ सकता। मेहनत का फल जनवरी 2023 में मिला, जब मैंने पहला ऑस्ट्रेलियन ओपन और पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीता। इस सफर ने मुझे बड़ी सीख दी है- सपनों के पीछे इतना भी न भागें कि खुद को खो बैठें। जीवन में संतुलन बहुत जरूरी है। कोर्ट पर मेरा गुस्सा ही मेरी ताकत है। मैं जैसी हूं, वैसी ही दिखती हूं। बताना चाहती हूं... जिंदगी कितनी भी चोट दे,सच्चा फाइटर हमेशा उठ खड़ा होता है।' -आर्यना

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डीपीएल 2026: मयंक-आशीष की शानदार गेंदबाजी, ईस्ट दिल्ली ने आउटर दिल्ली को 7 विकेट से हराया

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  Sports

AUS vs BAN: बदले की आग में मिचेल स्टार्क ने बरपाया कहर, 12 रन पर बांग्लादेश की आधी टीम आउट

Australia vs Banglades, 2nd Test Match: ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच दूसरे टेस्ट मैच की शुरुआत हो चुकी है. मेकाय में खेले जा इस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतने के बाद बांग्लादेश को पहले बल्लेबाजी के लिए बुलाया था. कप्तान पैट कमिंस के पहले बॉलिंग के फैसले को सही साबित करते हुए नई गेंद से मिचेल स्टार्क ने ऐसा कहर बराया कि बांग्लादेश ने सिर्फ 12 बनाने में अपने 5 विकेट गंवा दिए. Sat, 22 Aug 2026 06:43:39 +0530

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