Sugar Price में तेजी का Ethanol से संबंध नहीं, सरकार ने जमाखोरी रोकने के दिए निर्देश
सरकार ने शुक्रवार को इस दावे को खारिज कर दिया कि एथनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से इसकी कीमतों में तेज वृद्धि हो रही है। सरकार ने कहा कि घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त भंडार होने के बावजूद चीनी उद्योग ने कीमतें बढ़ाई हैं। इसके साथ ही सरकार ने चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ राज्यों को कार्रवाई करने और चीनी मिलों में इस साल 15 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू कराने की तैयारी करने को कहा है।
खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने चीनी की उपलब्धता और कीमतों के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि सरकार ने एहतियाती कदम के तौर पर 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा, कारोबारियों और शीतल पेय एवं आइसक्रीम विनिर्माताओं जैसे थोक उपभोक्ताओं के लिए भंडारण सीमा भी लागू की गई है। उन्होंने कहा कि विपणन सत्र 2025-26 में चीनी का उत्पादन पहले के 343 लाख टन के अनुमान से घटकर 306 लाख टन रह जाने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद देश में पर्याप्त भंडार है। घरेलू चीनी की सालाना मांग करीब 280-285 लाख टन है। चोपड़ा ने कहा कि गन्ने की फसल में ‘रेड रॉट’ और ‘टॉप बोरर’ रोग लगने तथा अधिक बारिश से जलभराव के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है।
उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय औसत खुदरा चीनी कीमत 20 जुलाई के 48 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 56 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। वहीं, चीनी की मिलों के स्तर पर कीमत करीब सात-दस दिन में 47-48 रुपये से बढ़कर 62 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। उन्होंने इस तीव्र मूल्य वृद्धि को ‘पूरी तरह अनुचित’ बताया।
चोपड़ा ने कहा, ‘‘हाल में चीनी की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। करीब 15 दिन पहले कीमत 48 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो अब बढ़कर 56 रुपये हो गई है। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इस वृद्धि का कोई बुनियादी कारण नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि चीनी के दाम में हाल की तेजी को एथनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से जोड़ना सही नहीं है।
चालू 2025-26 विपणन वर्ष में केवल 28 लाख टन चीनी का इस्तेमाल एथनॉल उत्पादन के लिए हुआ है। चोपड़ा ने कहा कि विविधीकरण की वजह से अब एथनॉल का केवल एक-चौथाई हिस्सा ही चीनी से बनता है, जबकि बाकी मुख्य रूप से मक्का जैसे अनाज से तैयार होता है। उन्होंने कहा कि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार है और किसी भी संबंधित पक्ष को इसका अनुचित फायदा उठाकर मुनाफाखोरी, जमाखोरी या सट्टेबाजी नहीं करनी चाहिए तथा यह धारणा नहीं बनानी चाहिए कि देश में चीनी की कमी है।
खाद्य सचिव ने कहा कि सितंबर 2026 के अंत में देश में 33-35 लाख टन चीनी का भंडार रहने का अनुमान है। इस साल चीनी मिलों में 15 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू होने की उम्मीद है, जिससे अक्टूबर में करीब 10-12 लाख टन अतिरिक्त चीनी उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए अग्रिम मंजूरी योजना के तहत कच्ची चीनी आयात करने वाली रिफाइनरियों को अपने भंडार की घरेलू बिक्री की अनुमति भी दी गई है।
इससे तत्काल तीन-चार लाख टन चीनी की अतिरिक्त उपलब्धता होने की उम्मीद है। चोपड़ा ने कहा कि सरकार ने प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों के साथ बैठक की है और उन्हें जमाखोरों, कालाबाजारियों एवं सट्टेबाजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा है। इसके अलावा सरकार कारोबारियों की मौजूदा 400 टन की भंडार सीमा को और कम करने पर भी विचार कर रही है।
उन्होंने कहा कि एक सितंबर से थोक उपभोक्ताओं को भी 15 दिन की खपत से अधिक चीनी का भंडार रखने की अनुमति नहीं होगी। चोपड़ा ने उम्मीद जतायी कि सरकार के इन कदमों से बाजार में चीनी की उपलब्धता सुधरेगी और त्योहारी मौसम एवं उसके बाद भी भंडार को लेकर कोई समस्या नहीं होगी।
Bijendra Yadav ने फिजूलखर्ची रोकने पर दिया जोर, Bihar SDG Conclave में बताईं विकास की प्राथमिकताएं
बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने शुक्रवार को कहा कि राज्य ने वित्तीय क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है, लेकिन विकास को गति देने के लिए संसाधनों के अपव्यय पर नियंत्रण और प्रत्येक व्यय को परिणामदायी बनाना आवश्यक है। यादव यहां ‘बिहार सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) कॉन्क्लेव-2026’ के दो दिवसीय समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि समय के साथ लोगों की आवश्यकताएं बदलती हैं, इसलिए तकनीक और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप कार्यप्रणाली में भी बदलाव जरूरी है।
उन्होंने कहा कि विकास एक सतत प्रक्रिया है, जिसके लिए विवेकपूर्ण व्यय, नई तकनीक और प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार मौसम सेवा केंद्रों के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में है तथा पंचायत स्तर तक मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से ज्ञान, विज्ञान और ईमानदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
‘विकसित बिहार-2047 की दिशा में तीव्र प्रगति’ विषय पर आयोजित कॉन्क्लेव में आर्थिक परिवर्तन, समावेशी विकास, जिला आधारित योजना, एसडीजी के स्थानीयकरण तथा विकसित बिहार-2047 की प्राथमिकताओं पर मंथन किया गया। नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि दुनिया की लगभग 55 प्रतिशत आबादी शहरों में रहती है और शहरी क्षेत्रों का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 80 प्रतिशत से अधिक योगदान है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार बिहार के 12 शहरों में आधुनिक टाउनशिप विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है, जहां बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, इंटरनेट, गुणवत्तापूर्ण सड़क, पार्क, शिक्षा, खेल और पर्यावरण संरक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि बिहार के विकास के बिना भारत का समग्र विकास संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि स्वच्छ जल एवं स्वच्छता श्रेणी में बिहार 98 अंकों के साथ देश में तीसरे स्थान पर है। इस क्षेत्र में सितंबर 2025 तक 26,960.3 करोड़ रुपये खर्च किए गए तथा 1.75 करोड़ ग्रामीणों को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया।
उन्होंने कहा कि नीति आयोग के अनुसार वर्ष 2015-16 से 2019-21 के बीच बिहार में बहुआयामी गरीबी 51.8 प्रतिशत से घटकर 33.7 प्रतिशत रह गई और इस अवधि में लगभग 2.25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले। विजयलक्ष्मी ने बताया कि वर्ष 2024-25 में बिहार की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वृद्धि दर 13.2 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 9.8 प्रतिशत से अधिक है। नीति आयोग के सदस्य के. वी. राजू ने कहा कि कॉन्क्लेव के दौरान मिले सुझावों पर आयोग गंभीरता से विचार करेगा, बशर्ते उन्हें योजना एवं विकास विभाग के माध्यम से औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया जाए।
उन्होंने डेटा संग्रहण तथा पंचायत स्तर पर सूचकांक विकसित कर योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने पर बल दिया।
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