भारतीय वायुसेना का वो शिकारी जिसे दुनिया जैगवार के नाम से जानती है। वो अब और भी ज्यादा खूंखार हो गया है। कल्पना की जो एक साधारण सा बम जिसे बस गिरा दिया जाता था। लेकिन अब 120 किमी दूर बैठे दुश्मन के बंकर को मिलीमीटर की सटीकता से तबाह कर देगा। इजराइल की तकनीक और भारतीय पराक्रम के मेल ने जगुआर को स्मार्ट ताकत दे दी है। जिससे दुश्मन के होश उड़ना तय हो गया। दरअसल भारतीय वायुसेना ने अपने जगुआर स्ट्राइक एयरक्राफ्ट के लिए इजराइली कंपनी एलबिट सिस्टम की रेस्ट यानी कि रेंज एक्सटेंशन एंड स्मार्ट ट्रेल गाइड किट का सफल परीक्षण कर लिया है। जगुआर अब पहले से कहीं ज्यादा घातक और सटीक हमला करने में सक्षम है। जगुआर लंबे समय से हमारी वायुसेना का मुख्य ग्राउंड अटैक भी मान रहा है। लेकिन अब रेस्ट किट के लगने के बाद इसका पूरा गेम ही बदलने वाला है। अब तक जगुआर को हमला करने के लिए दुश्मन के एयर डिफेंस ज़ोन के करीब जाना पड़ता था। जिससे विमान पर खतरा रहता था। लेकिन अब यह स्टैंड ऑफ दूरी से ही यानी कि दुश्मन की पहुंच से बाहर रहकर ही उसे बर्बाद कर सकता है।
इस किट में ऐसा क्या है जो इसे खास बनाता है?
यह एक आधुनिक स्मार्ट टेल पैकेज है जो कि 250 से 1000 किलोग्राम तक के साधारण बमों को स्मार्ट मिसाइल की तरह काम करने की शक्ति देता है। इसमें लगा आईएएस और जीएनएसएस गाइडेंस सिस्टम जर्मिंग प्रूफ है। यानी दुश्मन चाहकर भी इसका रास्ता नहीं बदल सकता। रिलीज होते ही इसके पंख डिप्लॉयबल जो विंग्स होते हैं वो खुल जाते हैं जो बम को 120 कि.मी. दूर तक ग्लाइड करा सकते हैं। मात्र 10 मीटर की सटीकता के साथ यह तकनीक बंकर, पुल और कमांड सेंटर्स को पूरी तरीके से तबाह करने की गारंटी रखती है। यह किट साधारण अनगाइडेड यानी कि डम बम को प्रिसाइजन गाइडेड वेपन में बदल देती है। इसमें लगा जीपीएस, एंटी जमिंग सिस्टम इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के दौरान भटकने नहीं देता है। सबसे खास बात यह है कि यह ग्लाइड करते हुए दुश्मन तक पहुंचता है। यानी कि इसकी रेंज बढ़ जाती है और यह मेक इन इंडिया और भारत इजराइल की दोस्ती का एक शानदार उदाहरण है। इससे ना केवल हमारे पुराने बमों को एक नया जीवन मिल जाएगा बल्कि वायुसेना की जो मारक क्षमता है वो भी कई गुना तक बढ़ जाएगी। Sukhoi और तेजस लड़ाकू विमानों के बाद अब Jaguar का यह अपग्रेडेड वर्जन भारत की आसमानी सुरक्षा का अभेद किला बनाएगा। भारत की इस बढ़ती हुई ताकत पर आप क्या सोचते हैं? जिस हिसाब से भारतीय वायुसेना मॉडर्नाइजेशन की तरफ बढ़ रही है। जहां एक तरफ भारतीय वायुसेना नए-नए लड़ाकू विमान खरीद रही है।
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