जो रूट ने रचा इतिहास, टेस्ट क्रिकेट में स्टीव स्मिथ को पीछे छोड़ इस मामले में बने नंबर-1 खिलाड़ी
Joe Root: इंग्लैंड के टेस्ट कप्तान जो रूट जब भी मैदान पर उतरते हैं, तो इतिहास रच देते हैं. जो रूट ने अब पाकिस्तान के खिलाफ हेडिंग्ले टेस्ट में एक और बड़ा रिकॉर्ड बना दिया है. पाकिस्तान के खिलाफ इस मैच की पहली पारी में रूट ने 66 रनों की पारी खेलकर सचिन तेंदुलकर के टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा फिफ्टी लगाने के रिकॉर्ड की बराबरी की थी. अब जो रूट ने फील्डिंग में बड़ा कीर्तिमान बनाया है।.पाकिस्तान की दूसरी पारी में अजान अवैस का कैच पकड़ते ही जो रूट अब टेस्ट क्रिकेट में बतौर फील्डर सबसे ज्यादा कैच पकड़ने के मामले में स्टीव स्मिथ को पीछे छोड़ नंबर-1 खिलाड़ी बन गए हैं.
जो रूट ने सबसे ज्यादा कैच पकड़ने में स्टीव स्मिथ को छोड़ा पीछे
जो रूट ने हेडिंग्ले में खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच में पाकिस्तान के दूसरी पारी में अजान ओवैस का एक शानदार कैच पकड़ा. इसी के साथ उन्होंने स्टीव स्मिथ को पीछे छोड़ टेस्ट क्रिकेट में बतौर फील्डर सबसे ज्यादा कैच पकड़ने वाले खिलाड़ी बन गए. यह टेस्ट क्रिकेट में जो रूट का 219वां कैच था. वहीं इस लिस्ट में अब दूसरे नंबर पर ऑस्ट्रलिया के स्टार बल्लेबाज स्टीव स्मिथ हैं, जिन्होंने कुल 218 कैच पकड़े हैं.
टेस्ट में सबसे ज्यादा कैच पकड़ने वाले फील्डर
जो रूट (इंग्लैंड) - 219* कैच
स्टीव स्मिथ (ऑस्ट्रेलिया) - 218 कैच
राहुल द्रविड़ (भारत) - 210 कैच
महेला जयवर्धने (श्रीलंका) - 205 कैच
जैक कैलिस (साउथ अफ्रीका) - 200 कैच
???? HISTORY AT HEADINGLEY! ????????????????????????????????
— Hemant Bhavsar (@hemantbhavsar86) August 21, 2026
Joe Root takes his 219th Test catch to move past Steve Smith and become the most prolific fielder in Test cricket history!
Runs machine, golden arm, and the safest pair of hands in the slips.
An absolute giant of the game! ???????? pic.twitter.com/ooNeuq7pVy
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Bonus Issue और Stock Split में क्या अंतर? निवेशकों के लिए समझना क्यों है जरूरी
Share Market के निवेशकों को पता है कि कंपनियां समय-समय पर कई तरह के कॉर्पोरेट एक्शन लेती हैं, जिनका फायदा समझदार निवेशक उठा सकते हैं. इन एक्शन में Bonus Issue और Stock Split शामिल हैं और दोनों ही मामलों में निवेशक के पास मौजूद शेयरों की संख्या बढ़ सकती है. नए निवेशक अक्सर इन दोनों को एक ही चीज समझ लेते हैं लेकिन मकसद और इन्हें लागू करने के तरीके दोनों में ही ये अलग-अलग होते हैं. इस अंतर को समझने के लिए यह आर्टिकल आपकी मदद करेगा.
Bonus Issue क्या होता है?
आसान शब्दों में कहें तो, बोनस इश्यू तब होता है जब कोई कंपनी अपने मौजूदा शेयरहोल्डर्स को बिना किसी अतिरिक्त पैसे के और शेयर देती है. ये शेयर कंपनी द्वारा तय किए गए बोनस रेश्यो के आधार पर दिए जाते हैं. आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं अगर कोई कंपनी 1:1 बोनस की घोषणा करती है और आपके पास 100 शेयर हैं, तो आपको 100 और शेयर मिलेंगे, जिससे आपके पास कुल 200 शेयर हो जाएंगे. इस प्रक्रिया में, कंपनी की फेस वैल्यू में कोई बदलाव नहीं होता है, लेकिन उसके रिजर्व का एक हिस्सा शेयर कैपिटल में ट्रांसफर कर दिया जाता है.
Stock Split क्या होता है?
स्टॉक स्प्लिट में किसी कंपनी के मौजूदा शेयर को कम कीमत वाले कई शेयरों में बांट दिया जाता है. इससे शेयर की फेस वैल्यू कम हो जाती है, जबकि आपके पास मौजूद शेयरों की संख्या बढ़ जाती है. उदाहरण के लिए अगर ₹10 की फेस वैल्यू वाले शेयर का 1:2 स्टॉक स्प्लिट होता है, तो वह एक शेयर दो शेयरों में बदल जाता है और नई फेस वैल्यू ₹5 हो जाती है.
Bonus Issue और Stock Split में मुख्य अंतर
| आधार | Bonus Issue | Stock Split |
|---|---|---|
| क्या होता है? | अतिरिक्त शेयर मुफ्त मिलते हैं | मौजूदा शेयर छोटे हिस्सों में बंटता है |
| Face Value | इससे फेस वैल्यू समान रहती है | इससे फेस वैल्यू कम हो जाती है |
| Reserves | कम होते हैं | आमतौर पर कोई बदलाव नहीं होता है |
| शेयरों की संख्या | इसमें शेयर की संख्या बढ़ती है | इसमें शेयर की संख्या बढ़ती है |
| लक्ष्य | Reserves को Capitalise करना और शेयरधारकों को अतिरिक्त शेयर देना | शेयर की कीमत को छोटे यूनिट में लाकर Liquidity/Accessibility बढ़ाना |
निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
शेयर बाज़ार में हर निवेशक को बहुत सोच-समझकर फ़ैसले लेने चाहिए. केवल इसलिए शेयर खरीदने का फ़ैसला नहीं करना चाहिए कि किसी कंपनी ने बोनस इश्यू या स्टॉक स्प्लिट का ऐलान किया है. एक समझदार निवेशक को हमेशा कंपनी के रेवेन्यू, मुनाफे,कर्ज, कैश फ्लो, वैल्यूएशन और भविष्य में ग्रोथ की संभावनाओं पर भी ध्यान देना चाहिए.
डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है. किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.
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