हिमाचल प्रदेश के चार जिलों में शनिवार को मध्यम बारिश का ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया। स्थानीय मौसम विभाग ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। विभाग ने राज्य में 27 अगस्त तक बारिश जारी रहने का अनुमान जताया है।
‘येलो अलर्ट’ बिलासपुर, चंबा, कांगड़ा और मंडी जिलों के लिए जारी किया गया। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) के अनुसार, शुक्रवार सुबह तक राज्य में 128 सड़कों पर यातायात बंद रहा। इसके अलावा 18 ट्रांसफॉर्मर और पेयजल आपूर्ति की 52 योजनाएं भी प्रभावित हुईं।
मंडी में सबसे अधिक 52 सड़कें यातायात के लिए बंद रहीं जबकि कुल्लू में 43, चंबा में नौ, कांगड़ा व सिरमौर में छह-छह, शिमला और ऊना में पांच-पांच तथा लाहौल-स्पीति में दो सड़कें बंद रहीं। राज्य के कुछ हिस्सों में बृहस्पतिवार शाम से हल्की बारिश हुई। नाहन में सबसे अधिक 13.8 मिलीमीटर (मिमी) बारिश दर्ज की गई जबकि पांवटा में 12 मिमी, ओलिंडा में 9.6 मिमी, बग्गी में 6.8 मिमी, धौलाकुआं में 5.5 मिमी और रायपुर मैदान में पांच मिमी बारिश दर्ज की गई।
राज्य में एक से 21 अगस्त के बीच 168.2 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 193.4 मिलीमीटर होती है। इस तरह राज्य में बारिश में 13 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। अधिकारियों ने बताया कि 30 जून को मानसून की शुरुआत के बाद से बारिश से जुड़ी घटनाओं में 88 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
राज्य को बारिश से संबंधित घटनाओं में अब तक करीब 1,108 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को राज्य को जापानी निवेश के लिए एक उभरते हुए केंद्र के तौर पर पेश किया। उन्होंने राज्य के मैन्युफैक्चरिंग बेस, इंफ्रास्ट्रक्चर और कुशल वर्कफोर्स की खूबियां गिनाते हुए जापान की कंपनियों को उत्तर प्रदेश को अपना दूसरा घर मानने का न्योता दिया। UP-जापान इन्वेस्टमेंट मीट को संबोधित करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश और जापान के बीच ऑटोमोबाइल से लेकर एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग तक, कई क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ रही है। उन्होंने भारत और जापान के बीच साझा सांस्कृतिक विरासत, खासकर बौद्ध धर्म के ज़रिए जुड़े रिश्तों का भी ज़िक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक खास 'जापान सिटी' विकसित की जा रही है, क्योंकि राज्य जापानी इंडस्ट्री के साथ अपने संबंध मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को भी बढ़ावा दे रहा है। आदित्यनाथ ने बताया कि इस कार्यक्रम में 2,000 करोड़ रुपये के निवेश का वादा किया गया और उम्मीद है कि इससे बड़ी संख्या में रोजगार पैदा होंगे। साथ ही, सालाना 60,000 ट्रैक्टर बनाने की क्षमता वाली एक नई यूनिट की भी घोषणा की गई।
यूपी में निवेश का प्रस्ताव
उत्तर प्रदेश की आर्थिक और औद्योगिक मज़बूती का ज़िक्र करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य की GDP के हिसाब से यह अब भारत की टॉप तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। यहाँ 96 लाख से ज़्यादा MSME यूनिट्स और 22,000 से अधिक स्टार्टअप्स हैं। साथ ही, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फिनटेक, मेडटेक, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और टूरिज़्म जैसे क्षेत्रों के लिए 36 सेक्टर-स्पेसिफिक पॉलिसीज़ भी लागू हैं। उन्होंने बताया कि भारत में बनने वाले कुल मोबाइल फ़ोन में से 55% उत्तर प्रदेश में ही बनते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में नौ तरह की जलवायु वाले क्षेत्र हैं और देश के कुल अनाज उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 21% है। आदित्यनाथ ने बुंदेलखंड और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का ज़िक्र करते हुए मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर और डेटा सेंटर्स के विकास पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि राज्य में 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' पहल के तहत, दोनों एक्सप्रेसवे तय समय से पहले और अनुमानित लागत से कम खर्च में पूरे किए गए। उन्होंने यह भी बताया कि एक EV बस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट और एक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने का काम भी चल रहा है।
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