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TCS पर कर्मचारी मॉनिटरिंग का आरोप:कंपनी बोली- सिर्फ सिस्टम की परफॉर्मेंस ट्रैक कर रहे; मेटा भी कीस्ट्रोक्स रिकॉर्ड करने पर घिरी थी

कर्मचारियों की मॉनिटरिंग को लेकर देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) विवादों में आ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी अपने कर्मचारियों के लैपटॉप और वर्कस्टेशन पर मॉनिटरिंग टूल्स का इस्तेमाल कर रही है। हालांकि, टीसीएस का कहना है कि इन टूल्स का मकसद किसी कर्मचारी की व्यक्तिगत गतिविधियों पर नजर रखना नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की ओवरऑल परफॉर्मेंस और सिस्टम सिक्योरिटी को बेहतर बनाना है। क्या करते हैं ये नेटवर्क मॉनिटरिंग टूल्स? कंपनियां अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित रखने और उसकी परफॉर्मेंस सुधारने के लिए नेटवर्क मॉनिटरिंग टूल्स का इस्तेमाल करती हैं। इन सिस्टम्स का मुख्य काम नेटवर्क में किसी भी असामान्य व्यवहार की पहचान करना, तकनीकी समस्याओं को हल करना, डिवाइसेस की परफॉर्मेंस में सुधार करना और कॉरपोरेट डेटा को साइबर खतरों से बचाना होता है। बिजनेस और सुरक्षा के लिहाज से कंपनियों के लिए ऐसे टूल्स का उपयोग करना एक सामान्य प्रक्रिया माना जाता है। विवाद की मुख्य वजह: व्यक्तिगत एक्टिविटी की ट्रैकिंग मेटा भी झेल चुकी है कर्मचारी मॉनिटरिंग पर आलोचना कार्यस्थल पर कर्मचारियों की निगरानी यानी वर्कप्लेस मॉनिटरिंग का यह मुद्दा केवल टीसीएस तक सीमित नहीं है। ग्लोबल टेक इंडस्ट्री में पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। दिग्गज टेक कंपनी मेटा को भी अपने एक AI-संबंधित प्रोजेक्ट के दौरान आलोचना का सामना करना पड़ा था। मेटा ने एक ऐसा सिस्टम पेश किया था जो कर्मचारियों के की-स्ट्रोक्स और माउस एक्टिविटी का डेटा कलेक्ट कर सकता था। बाद में भारी विरोध के चलते मेटा को कर्मचारियों के लिए डेटा कलेक्शन रोकने और छूट मांगने का विकल्प देना पड़ा था। कानूनी नियम और भविष्य की स्थिति कर्मचारियों की मॉनिटरिंग का यह मुद्दा अलग-अलग देशों में कानूनी जांच के दायरे में भी आ चुका है। अलग-अलग क्षेत्राधिकारों और देशों में एम्प्लॉई मॉनिटरिंग को लेकर नियम और कड़े कानून काफी अलग-अलग हैं। फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मुद्दा यही बना हुआ है कि टीसीएस के टूल्स तकनीकी रूप से किस-किस जानकारी तक पहुंच सकते हैं और वास्तविक रूप में उस डेटा का उपयोग किस तरह किया जा रहा है। मैक्रो-लेवल और एम्प्लॉई-लेवल मॉनिटरिंग में क्या अंतर है?

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न लाठी, न डंडा... सिर्फ आवाज और बंदर रफूचक्कर, बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप में बंदरों को खदेड़ रहे खान ब्रदर्स

Badminton World Championship Langur: दिल्ली में बीडब्ल्यूफ वर्ल्ड चैंपियनशिप के दौरान बंदरों के उत्पात को रोकने के लिए 'मंकी व्हिस्परर्स' की अनूठी टीम तैनात की गई. बिना किसी हथियार के, ये पेशेवर अपने गले से खूंखार ग्रे लंगूर की चेतावनी भरी आवाजें (ईक-ईक, हूप-हूप) निकालकर आम बंदरों को स्टेडियम से दूर खदेड़ते हैं. साल 2012 में लंगूरों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध के बाद शुरू हुआ यह पेशा आज भी इंटरनेशनल आयोजनों में सुरक्षा का अहम देशी नुस्खा बना हुआ है. Fri, 21 Aug 2026 21:34:41 +0530

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