Manipur में उग्र प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे लोग #protest #shorts #latest #aajtak
Manipur में उग्र प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे लोग #protest #shorts #latest #aajtak आजतक के साथ देखिये देश-विदेश की सभी महत्वपूर्ण और बड़ी खबरें | Watch the latest Hindi news Live on the World's Most Subscribed News Channel on YouTube. #LatestNews #Aajtak #HindiNews Aaj Tak News Channel: आज तक भारत का सर्वश्रेष्ठ हिंदी न्यूज चैनल है । आज तक न्यूज चैनल राजनीति, मनोरंजन, बॉलीवुड, व्यापार और खेल में नवीनतम समाचारों को शामिल करता है। आज तक न्यूज चैनल की लाइव खबरें एवं ब्रेकिंग न्यूज के लिए बने रहें । #hindinews #newsinhindi #hindisamachar #breakingnews #aajtak #samachar #news अधिक समाचारों के लिए यहां क्लिक करें: https://www.youtube.com/@aajtak?sub_confirmation=1 About Channel: Aaj Tak is India's Best Hindi News Channel. Aaj Tak News Channel Covers The Latest News, Breaking News, Politics, Entertainment News, Business News and Sports News. Stay tuned for all the News in Hindi. Join Aaj Tak Whatsapp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029Va7Rxc32ER6hBAuIL222 Watch Our Prime Shows on Aaj Tak: Vardaat — Real-life crime stories that shook the nation https://youtube.com/playlist?list=PLP-nGFpz3fa_WLJqwFuJlwfhAepqcOd3I&si=tJXqsrKVHOvxy4BJ Black & White with Anjana Om Kashyap - Big debates, sharp opinions, and political analysis https://youtube.com/playlist?list=PLP-nGFpz3fa_aLomcIgk-c_dRhuYOBphp&si=1wAaQfSUIfZ0OrIy Halla Bol — The nation’s most powerful debate on today’s top issues https://youtube.com/playlist?list=PLP-nGFpz3fa-ZT2YKfqzI-ayeZV0n8qAh&si=nnRN8_9u02p8QlG_ DasTak 2025: https://youtube.com/playlist?list=PLP-nGFpz3fa9q68r5rws67UxSUdhcHupG&si=QMiiUiKyXUP76DUk ताज़ा खबरों और LIVE अपडेट्स के लिए जुड़े रहें Aaj Tak के साथ - https://youtube.com/live/Nq2wYlWFucg?feature=share https://youtube.com/live/gH6ftEJDLGo?feature=share Download Aaj Tak APP, India’s No.1 Hindi News App: https://play.google.com/store/apps/details?id=in.AajTak.headlines&hl=hi Subscribe to Aaj Tak YouTube Channel: https://www.youtube.com/c/aajtak Visit Aaj Tak website: https://www.aajtak.in/ Follow us on Facebook: https://www.facebook.com/aajtak Follow us on Twitter: https://twitter.com/aajtak Follow us on Instagram: https://www.instagram.com/aajtak/ Subscribe our other Popular YouTube Channels: India Today: https://www.youtube.com/c/indiatoday SoSorry: https://www.youtube.com/c/sosorrypolitoons Good News Today: https://www.youtube.com/c/GoodNewsTodayOfficial AajTak AI: https://www.youtube.com/channel/UClZU5ouD9LkfgrelmL2auTg
उत्तराखंड-गंगा-यमुना समेत 18 बड़ी नदियां गंदी, रिस्पना सबसे खराब:सीवर-टूरिज्म से बिगड़ी हालत, नैनीताल में नंधौर पर फैक्ट्रियों का असर
उत्तराखंड में गंगा-यमुना समेत 18 नदियों पर किए गए एक रिसर्च में सामने आया है कि सीवर, कचरा, बढ़ता टूरिज्म और उद्योग नदियों की हालत बिगाड़ रहे हैं। देहरादून की रिस्पना की हालत सबसे खराब उदाहरणों में है, जहां 100 मिलीलीटर पानी में 24 लाख से ज्यादा मल वाले बैक्टीरिया मिले। वहीं नैनीताल की नंधौर पर करीब 73 उद्योगों के कचरे का दबाव सामने आया। गंगा, यमुना और कोसी में भी गंदे पानी और बढ़ती गतिविधियों का असर मिला है। 2026 में डिस्कवर हैजार्ड्स जर्नल में प्रकाशित इस शोध में उत्तराखंड की 18 नदी प्रणालियों पर हुए अध्ययनों की समीक्षा की गई। शोधकर्ताओं ने 2001 से 2022 के बीच प्रकाशित 88 शोधपत्रों को देखा। इनमें 34 देशों की नदी प्रणालियों और भारत की 36 प्रमुख नदियों से जुड़े अध्ययन शामिल थे। शोध में शहरीकरण, सीवर, पर्यटन, उद्योग और खेती का नदियों के पानी पर असर देखा गया। जिसमें यह भी सामने आया कि अलकनंदा के पानी में प्लास्टिक के बेहद छोटे कण पहुंच चुके हैं। हरिद्वार की गंगा में मिले 49 तरह के बैक्टीरिया में 20 पर एक एंटीबायोटिक का असर नहीं हुआ। यानी नदियों की समस्या सिर्फ कचरे या गंदे पानी तक सीमित नहीं है, बल्कि पानी में ऐसी चीजें भी पहुंच रही हैं जो सीधे दिखाई तक नहीं देतीं। रिस्पना में बेहद गंभीर मलजनित प्रदूषण देहरादून की रिस्पना नदी इस संकट की सबसे गंभीर तस्वीर पेश करती है। अध्ययन में रिस्पना में BOD यानी जैविक ऑक्सीजन मांग 390 मिलीग्राम प्रति लीटर तक दर्ज होने का उल्लेख है। वहीं फीकल कोलीफॉर्म का स्तर 24,19,600 MPN प्रति 100 मिलीलीटर तक पाया गया। आसान भाषा में समझें तो नदी में जैविक गंदगी और मलजनित प्रदूषण का स्तर बेहद गंभीर है। अध्ययन में इसके प्रमुख कारणों में नदी के कैचमेंट क्षेत्र में बसी अनियोजित बस्तियां और बिना उपचार वाला सीवेज बताया गया है। पानी में क्षारीयता, कठोरता और TDS के अलावा सल्फेट, एल्युमिनियम, आयरन, मैंगनीज और कैडमियम जैसे तत्वों के भी मानकों से अधिक होने का उल्लेख किया गया है। बिंदाल नदी में काले पानी की तस्वीर देहरादून की बिंदाल नदी भी प्रदूषण के गंभीर दबाव में है। अध्ययन के मुताबिक नदी का पानी काला पड़ने और उसकी विषाक्तता बढ़ने जैसी स्थिति सामने आई है। कचरे से निकलने वाला लीचेट और शहरों का सीवेज नदी में पहुंचकर पानी की भौतिक-रासायनिक गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। रिस्पना और बिंदाल के मामले में शोधकर्ताओं ने खास तौर पर सीवेज, भारी धातुओं और घुले हुए ठोस पदार्थों के बढ़ते दबाव की ओर ध्यान दिलाया है। इसके पीछे नदी किनारे की आबादी, नगर निकायों का कचरा और पर्याप्त सीवेज ट्रीटमेंट व्यवस्था का अभाव प्रमुख कारणों में शामिल हैं। नंदाकिनी से गंगा तक बढ़ता दबाव चमोली की नंदाकिनी नदी में अलकनंदा से मिलने से पहले टोटल कोलीफॉर्म और फीकल कोलीफॉर्म का प्रदूषण अधिक पाया गया। शोध में इसका संभावित कारण नदी किनारे बढ़ती अनियोजित आबादी बताया गया है। हरिद्वार में गंगा पर धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों का दबाव भी सामने आया है। एक अध्ययन में गंगा के पानी के जैविक विश्लेषण में 49 बैक्टीरियल आइसोलेट्स मिले, जिनमें से 20 इमिपेनेम एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधी पाए गए। शोध में फीकल प्रदूषण को देखते हुए डाउनस्ट्रीम सीवेज ट्रीटमेंट को मजबूत करने की जरूरत बताई गई है। यमुना-सोंग नदी पर पर्यटन और शहरीकरण का असर देहरादून क्षेत्र में यमुना नदी की जल गुणवत्ता पर अनियंत्रित पर्यटन और पर्याप्त सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कमी का असर बताया गया है। अध्ययन में TDS, टोटल कोलीफॉर्म, कठोरता और तापमान जैसे मानकों में बदलाव दर्ज किए गए। सोंग नदी में घनी आबादी और वाहनों से जुड़े प्रदूषण का असर सामने आया। नदी में जिंक, सीसा और तांबा जैसी भारी धातुओं की अधिक मात्रा दर्ज होने का उल्लेख है। सहस्रधारा, मालदेवता, थानो और लच्छीवाला जैसे पर्यटन क्षेत्रों को संभावित प्रदूषण स्रोतों में शामिल किया गया है। नंधौर पर 73 उद्योगों का दबाव नैनीताल की नंधौर नदी के मामले में औद्योगिक गतिविधियां प्रमुख चिंता बनकर सामने आती हैं। अध्ययन के अनुसार करीब 73 उद्योगों का अपशिष्ट जमीन के जरिये या अवैध डिस्चार्ज के माध्यम से नदी तंत्र तक पहुंचने का जिक्र है। शोध में आसपास के नालों से आने वाले ठोस और तरल कचरे के बेहतर प्रबंधन तथा औद्योगिक अपशिष्ट की निगरानी की जरूरत बताई गई है। ऊधम सिंह नगर की कल्याणी नदी में TSS, BOD और COD अनुमेय सीमा से ऊपर पाए गए। इसके लिए SIDCUL से जुड़े औद्योगिक डिस्चार्ज और घरेलू स्रोतों को प्रमुख कारणों में बताया गया। अध्ययन के अनुसार नदी का पानी औद्योगिक, कृषि और घरेलू इस्तेमाल के लिए अनुपयुक्त पाया गया। भागीरथी में बांधों से बदला नदी का प्राकृतिक प्रवाह वहीं, उत्तरकाशी की भागीरथी में समस्या केवल प्रदूषण की नहीं, बल्कि नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव की भी है। शोध में बताया गया है कि बांधों के कारण बाढ़ चक्र और प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हुआ है। इसका असर जलीय जीवों और मछलियों की आबादी पर भी पड़ा है। अल्मोड़ा की कोसी नदी में E. coli, टोटल कोलीफॉर्म और टर्बिडिटी यानी पानी के गंदलेपन का स्तर पेयजल के स्वीकार्य मानकों से ऊपर पाए जाने का उल्लेख अध्ययन में है। इसके संभावित कारणों में नदी के आसपास बढ़ती शहरी गतिविधियां और सीवेज निपटान को जोड़ा गया है। पांच साल में 45 फीसदी बढ़ा पर्यटन, नदियों पर बढ़ा दबाव शोध में उत्तराखंड में पांच वर्षों के दौरान पर्यटन में 45 प्रतिशत वृद्धि का भी उल्लेख किया गया है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ नदी किनारे ठोस कचरा, सीवेज, वाहनों और अन्य मानवीय गतिविधियों का दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। हरिद्वार जैसे धार्मिक केंद्रों से लेकर पहाड़ी पर्यटन स्थलों तक बढ़ती गतिविधियां नदी तंत्र के लिए नई चुनौती बन रही हैं। ऐसे में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ उसके पर्यावरणीय प्रभाव को नियंत्रित करना भी जरूरी हो गया है। हर नदी के लिए अलग रणनीति की जरूरत शोधकर्ताओं के मुताबिक उत्तराखंड की सभी नदियों के लिए एक जैसी नीति कारगर नहीं होगी। जिस नदी में सीवेज मुख्य समस्या है, वहां सीवेज ट्रीटमेंट और ड्रेनेज व्यवस्था मजबूत करनी होगी। औद्योगिक क्षेत्रों में डिस्चार्ज की सख्त निगरानी जरूरी है। पर्यटन और तीर्थ क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन तथा सीवेज व्यवस्था को प्राथमिकता देनी होगी। इसके साथ नदी के किनारों के रिपेरियन जोन यानी प्राकृतिक वनस्पति वाले क्षेत्र को बचाना, नदी किनारे निर्माण को नियंत्रित करना, प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान करना और स्थानीय समुदायों को संरक्षण से जोड़ना भी जरूरी है। इस शोध की खासियत यह है कि उत्तराखंड की 18 नदियों से जुड़े अध्ययनों को एक साथ देखकर नदी प्रदूषण की व्यापक तस्वीर समझने की कोशिश की गई है। हर नदी की समस्या अलग है, लेकिन सभी में एक समान बात दिखाई देती है। बढ़ती मानवीय गतिविधियां नदी तंत्र की क्षमता पर भारी पड़ रही हैं। ------------------- यह भी पढ़ें भास्कर एक्सक्लूसिव : उत्तराखंड की जमीन का बदलता ‘न्यूट्रिएंट मैप’:गढ़वाल की 90 सेमी गहराई तक मिट्टी की जांच, गहराई बढ़ी तो बदले पोषक तत्व उत्तराखंड के पहाड़ों में जमीन सिर्फ ऊपर से ही अलग-अलग नहीं दिखती, बल्कि उसके नीचे मिट्टी की सेहत भी जंगल, खेती, घास के मैदान और बागानों के हिसाब से बदल रही है। गढ़वाल हिमालय पर हुए एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन जमीन के उपयोग, समुद्र तल से ऊंचाई और मिट्टी की गहराई के साथ बदलता है। (पढ़ें पूरी खबर)
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