रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'वंदे मातरम' के सिर्फ़ शुरुआती दो पद गाने के 1937 के अपने रुख को फिर से दोहराने के लिए कांग्रेस की कड़ी आलोचना की है और पार्टी के इस स्टैंड को असंवैधानिक और निंदनीय बताया है। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो मैसेज में, सिंह ने संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति कांग्रेस की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए और कहा कि संसद द्वारा पारित कानून सभी नागरिकों पर लागू होते हैं।
सिंह ने कहा कि अगर कोई इसे मानने से इनकार करता है, तो संविधान के प्रति उनकी निष्ठा निश्चित रूप से संदेह के घेरे में आ जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय गीत का विरोध देशभक्ति पर भी सवाल खड़े करता है। सिंह ने 1937 के कांग्रेस प्रस्ताव का ज़िक्र किया, जिसमें 'वंदे मातरम' को सिर्फ़ शुरुआती दो छंदों तक ही गाने की बात कही गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग की मांगों को मानते हुए यह फ़ैसला लिया था।
सिंह के अनुसार, ऐसे समझौतों ने राष्ट्रीय एकता को कमज़ोर किया और आखिरकार ऐसे हालात पैदा किए जिनकी परिणति देश के बंटवारे में हुई। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह आज भी कट्टरपंथी तत्वों के प्रति वैसी ही नीति अपना रही है। सिंह ने कहा कि कट्टरपंथी तत्वों के साथ समझौता करना देश के लिए हमेशा घातक साबित हुआ है। उन्होंने कांग्रेस के इस फ़ैसले को भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी बताया।
कांग्रेस ने 1937 के अपने रुख को दोहराया सिंह की यह टिप्पणी कांग्रेस वर्किंग कमेटी द्वारा हाल ही में 'वंदे मातरम' पर पार्टी के 1937 के रुख को फिर से दोहराए जाने के बाद आई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब इस गीत के दर्जे और राष्ट्रगान 'जन गण मन' के साथ इसके स्थान को लेकर फिर से राजनीतिक बहस छिड़ गई है। बीजेपी 'वंदे मातरम' के कानूनी और संवैधानिक दर्जे को ऊंचा करने की कोशिश कर रही है, जिससे दोनों पार्टियों के बीच चल रहे राजनीतिक विवाद में एक और पहलू जुड़ गया है।
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