'एनिमल पार्क' का नंबर कब आएगा? 'स्पिरिट' के बाद संदीप रेड्डी वांगा का 6 महीने का ब्रेक, रणबीर भी 3 फिल्मों में बिजी
Animal Park Big Update: रणबीर कपूर की ‘एनिमल पार्क’ को लेकर फैंस का इंतजार अभी और बढ़ सकता है. संदीप रेड्डी वांगा के भाई प्रणय रेड्डी वांगा ने बताया कि ‘स्पिरिट’ के बाद टीम करीब छह महीने का ब्रेक लेगी, जिसके बाद ‘एनिमल पार्क’ की शूटिंग शुरू होगी. प्रभास स्टारर ‘स्पिरिट’ 5 मार्च 2027 को रिलीज होगी.
Uncovered With Manoj Gairola: क्या वाकई महिलाओं के खाते में 20,000 ट्रांसफर करेंगे सीएम योगी?
Uncovered With Manoj Gairola: क्या बीजेपी से युवाओं की नाराजगी योगी पर भारी पड़ेगी? क्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी की कीमत भी योगी को ही चुकानी पड़ेगी? ये बात हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इस तरह की खबरें आ रही हैं कि योगी सरकार भी बिहार की तर्ज पर महिलाओं को डायरेक्ट कैश ट्रांसफर करने की स्कीम बना रही है. एक बात तो साफ है कि योगी सरकार को इस बात का अहसास हो गया है कि 2027 का चुनाव बेहद मुश्किल होने वाला है और बात सही भी है.
2024 में अखिलेश की समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में बेहद शानदार जीत हासिल की थी. अब वो पूरी ताकत से विधान सभा चुनावों की तैयारी में जुटी है. कांग्रेस के साथ सपा का गठबंधन होने की पूरी उम्मीद है. ऐसे में योगी सरकार महिला वोटर्स को लुभाने वाले फॉर्मूले पर काम कर सकती है.
अनकवर्ड में यूपी की राजनीति पर चर्चा
क्या वाकई यूपी में ऐसे हालात ऐसे बन गए हैं कि वहां भी योगी सरकार को महिलाओं को कैश ट्रांसफर करने वाली स्कीम लानी पड़ेगी?
अभी तक सरकार की ओर से कोई ऐलान नहीं
सबसे पहले तो आपको बता दें कि इस तरह की scheme के बारे अभी तक में ना तो यूपी सरकार और ना ही बीजेपी ने कुछ कहा है. लेकिन ये भी सच है कि महिलाओं के खाते में पैसा डालना अब चुनावी success का फॉर्मूला बन चुका है और इस फ़ार्मूले ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार जैसे बड़े राज्यों में बीजेपी की जीत में बहुत मदद करी है.
पहली किश्त में 20 हजार मिलने की चर्चा
अभी तक जो खबरें आ रही हैं, उनके मुताबिक पहली किश्त में ही पात्र महिलाओं के खाते में 20 हजार रुपए डाले जा सकते हैं. बिहार में ये रकम 10 हजार की थी.
योगी सरकार के सामने 2027 की बड़ी चुनौती
यूपी में लगातार 2 बार से बीजेपी की सरकार है. मजबूत कानून-व्यवस्था, माफिया राज का ख़ात्मा और महिला सुरक्षा जैसे issues योगी की सबसे बड़ी ताकत है. लेकिन हाल के महीनों में कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं जिनसे बीजेपी बैकफुट पर आ गई है और यूपी में इसका चुनावी असर भी पड़ सकता है.
लिहाजा ऐसा लगता है कि योगी सरकार अब महिला वोटर्स पर पूरी तरह फोकस कर रही है. वैसे आपको एक आंकड़ा बता दें जिससे आपको पता चल जाएगा कि यूपी में महिला वोटर्स कितनी बड़ी पावर हैं और उनकी पहली पसंद कौन सी पार्टी है.
2022 में महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा मतदान किया
2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान 62 दशमलव 24 प्रतिशत महिलाओं ने वोट दिया था. जबकि पुरुषों का मतदान 59 दशमलव 56 प्रतिशत था. यानी वोट देने के लिए पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा निकलीं थीं. ये वोट किस पार्टी को मिला, इसका भी एक आंकड़ा है.
CSDS के पोस्ट पोल सर्वे के मुताबिक, 46 से 48 प्रतिशत महिलाओं ने बीजेपी को वोट दिया, जबकि सिर्फ़ 33 से 35 प्रतिशत महिलाओं ने समाजवादी पार्टी को वोट दिया. पुरुषों के वोटिंग trend में ये अंतर कम था. 44 प्रतिशत पुरुषों ने ही बीजेपी को वोट दिया, जबकि समाजवादी पार्टी को सिर्फ़ 40 प्रतिशत पुरुष के वोट मिले.
महिला वोटर्स पर बीजेपी की मजबूत पकड़
इन आंकड़ों से ये साफ हो जाता है कि यूपी में महिला वोटर्स का सबसे ज्यादा भरोसा बीजेपी पर है. ख़ासतौर से योगी पर। इसकी एक बड़ी वजह है मजबूत कानून व्यवस्था. अच्छा law एंड order देना योगी का USP बन गया है और पूरे देश में इसे योगी मॉडल के नाम से जानते हैं. वैसे तो अखिलेश भी महिला वोटर्स को लुभाने की कोशिश में जुटे हैं. लेकिन बीजेपी यूपी के वोटर्स के बीच ये मैसेज देती रही है कि सपा की सोच महिला विरोधी है.
महिला वोटबैंक मजबूत करने की तैयारी?
अब योगी सरकार अपने महिला वोटबैंक को और अधिक मजबूत बनाने की कोशिश में है. इसके लिए डायरेक्ट कैश ट्रांसफर की स्कीम को लेन की बात चल रही है. अब सवाल ये है कि अगर योगी सरकार बिहार की तर्ज पर ये योजना लाती है तो इसमें कितना पैसा लगेगा?
60 हजार करोड़ रुपये तक का खर्च?
बिहार में महिला वोटर्स 3.5 करोड़ हैं. जिनमें से 1.8 करोड़ यानी करीब 51% महिलाओं को कैश ट्रांसफर स्कीम का लाभ मिला है. जबकि यूपी में कुल 6 करोड़ महिला वोटर्स हैं. इनमें से अगर 50% यानी 3 करोड़ महिलाओं के खाते में 20 हजार रुपए चुनाव से पहले डाले जाते हैं तो सरकार को 60 हजार करोड़ रुपए खर्च करने होंगे.
अखिलेश यादव ने किया 40 हजार का ऐलान
खैर..अगर चुनाव जीतना है तो सरकार ये खर्च कर भी सकती है. हालांकि अभी तक कोई ऐलान नहीं हुआ...लेकिन इस योजना के आने की सुगबुगाहट से ही अखिलेश यादव के कान खड़े हो गए हैं. अखिलेश ये बात जानते हैं कि कैश ट्रांसफर स्कीम सरकार का कितना बड़ा ब्रह्मास्त्र साबित हो सकती है. इसलिए उन्होंने ऐलान किया है कि उनकी सरकार बनने पर महिलाओं को बीजेपी से डबल यानी 40 हजार रुपए मिलेंगे और इसमें हर साल बढ़ोतरी होगी.
चुनावी राजनीति में कैश ट्रांसफर का बढ़ता ट्रेंड
विधानसभा चुनावों में महिलाओं के खातों में पैसा ट्रांसफर करना अब एक ट्रेंड बन चुका है. बिहार चुनाव में तो सरकार ने वोटिंग से कुछ दिन पहले ही महिलाओं के खातों में पैसे ट्रांसफर किए थे और चुनाव आयोग आंखें बंद करके बैठा रहा. ऐसी स्कीम्स चुनाव जीतने की गांरटी देती है.
वोटर्स भी अपने खाते में पैसा देखकर खुश हो जाते हैं. लेकिन हमे ये सोचना होगा कि सरकार के खजाने में लिमिटेड पैसा ही है. अब चाहे उसे खाते में ट्रांसफर करवा लो. या फिर उससे बिजली, पानी, सड़क, अस्पताल और स्कूल जैसे कामों पर खर्च करवा लो. सोचना आपको है...और हां. इस पर एक राष्ट्रीय बहस भी होनी चाहिए.
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