दिल्ली से स्वीडन तक साइकिल पर पहुंचा प्यार, सड़क किनारे पोर्ट्रेट से शुरू हुई थी मोहब्बत, अब कहानी बनी डॉक्यूमेंट्री
Delhi-to-Sweden love story premieres in New York: भारत की गलियों से शुरू हुई एक प्रेम कहानी अब अमेरिका तक पहुंच गई है. इस प्रेम कहानी में एक युवक ने अपनी प्रेमिका से मिलने के लिए साइकिल उठाई और भारत से स्वीडन तक का सफर तय कर डाला. इसी सच्ची कहानी पर बनी डॉक्यूमेंट्री 'द साइकिल ऑफ लव' का न्यूयॉर्क में प्रीमियर हुआ है.
इस डॉक्यूमेंट्री की कहानी पी.के. महानंदिया और लोट्टा वॉन शेडविन की जिंदगी पर आधारित है.पी.के. महानंदिया का जन्म एक गरीब दलित परिवार में हुआ था. 23 साल की उम्र में वह दिल्ली में सड़क किनारे लोगों की तस्वीरें बनाकर अपना गुजारा करते थे. साल 1977 में 19 साल की स्वीडिश लड़की लोट्टा भारत आईं. इसी दौरान दोनों की मुलाकात हुई और उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई. लोट्टा ने दिल्ली में पीके से अपना पोर्ट्रेट बनाने के लिए कहा था. यही मुलाकात धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। दोनों के बीच भाषा और संस्कृति का फर्क था लेकिन एक-दूसरे के लिए उनका लगाव बढ़ता गया. कुछ समय बाद लोट्टा को वापस स्वीडन जाना पड़ा. इसके बाद दोनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि इतनी दूर रहने के बावजूद अपने रिश्ते को कैसे कायम रखा जाए.
पी.के. महानंदिया ने लोट्टा से मिलने का फैसला किया और साइकिल से भारत से स्वीडन जाने निकल पड़े. उन्होंने करीब 6 हजार मील, यानी लगभग 10 हजार किलोमीटर का सफर साइकिल से तय किया. इस दौरान उन्होंने करीब एक दर्जन देशों को पार किया और आखिरकार स्वीडन पहुंचकर अपनी प्रेमिका से मुलाकात की. यह असाधारण सफर अब डॉक्यूमेंट्री 'द साइकिल ऑफ लव' का हिस्सा है. इस फिल्म का निर्देशन ऑरलैंडो वॉन आइन्सीडेल ने किया है. वह इससे पहले 'द व्हाइट हेल्मेट्स', 'विरुंगा' और 'द लॉस्ट चिल्ड्रन' जैसी डॉक्यूमेंट्री से जुड़े रहे हैं. फिल्म का न्यूयॉर्क प्रीमियर मैनहैटन स्थित डायरेक्टर्स गिल्ड ऑफ अमेरिका थिएटर में हुआ, जहां इस कहानी को अमेरिकी दर्शकों के सामने पेश किया गया.
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पी.के. और लोट्टा की बेटी एमिली महानंदिया वॉन शेडविन फिल्म की निर्माता भी हैं. उन्होंने बताया कि यह डॉक्यूमेंट्री उनके माता-पिता की प्रेम कहानी से प्रेरित है.निर्देशक ने उनके पिता की पूरी जिंदगी दिखाने के बजाय उनके प्यार और भारत से स्वीडन तक की यात्रा को कहानी का मुख्य हिस्सा बनाया. आईएएनएस से एमिली ने कहा, "सफर के दौरान टीम को अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के कई लोगों से मिलने का मौका मिला. इनमें से कई बातचीत पहले से तय नहीं थीं, लेकिन बाद में फिल्म का अहम हिस्सा बन गईं. मेरा मानना है कि इंसान अलग भाषा बोल सकता है या अलग धर्म या संस्कृति से आ सकता है, लेकिन प्यार की भावना सभी को एक-दूसरे से जोड़ती है."
फिल्म में पी.के. महानंदिया का किरदार चिराग बेनेडिक्ट लोबो ने निभाया है जबकि मीना डेल लोट्टा के किरदार में नजर आती हैं. मीना ने बताया कि फिल्म की शूटिंग उन जगहों पर भी हुई, जहां असल जिंदगी में ये घटनाएं हुई थीं. कलाकारों ने वहां के लोगों से बातचीत की और कई दृश्य उसी समय तैयार हुए. चिराग लोबो के लिए भी यह अनुभव काफी खास रहा. उन्होंने कहा कि फिल्म में दिखाई देने वाले कई लोग असल जिंदगी के लोग हैं और उनके साथ हुई बातचीत ने उन्हें प्यार, भरोसे, माफी और जिंदगी को लेकर सोचने पर मजबूर किया. इस डॉक्यूमेंट्री से प्रियंका चोपड़ा जोनस भी बतौर एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर जुड़ी हैं. फिल्म के निर्माताओं के मुताबिक, प्रियंका को पी.के. और लोट्टा की कहानी इसलिए भी पसंद आई क्योंकि इसमें दो अलग देशों और संस्कृतियों के लोगों के बीच प्यार की कहानी है. फिल्म की निर्माता टीम में एमिली और उनके भाई कार्ल महानंदिया वॉन शेडविन के साथ हैरी ग्रेस और क्लो लेलैंड भी शामिल हैं.
INPUT: IANS
नौकरी छूटी, तंगी में गुजारा जीवन, सुने समाज के ताने... जानिए कौन हैं जैकब मार्टिन? जिन्हें 22 साल पुराने केस में मिली क्लीन चिट
Who is Jacob Martin : जैकब मार्टिन कौन हैं, जिनका नाम आज काफी तेजी से सामने आ रहा है. आज की चर्चा का विषय जैकब मार्टिन हैं, जिन्हें 22 साल के लंबे बनवास के बाद न्याय मिला है. जैकब पर 22 सालों से जालसाजी का एक केस चल रहा था, जिसके लिए उन्हें समाज के लोगों के लगातार ताने सुनने पड़े. उनकी रेलवे की नौकरी छुट गई. उनको तंगी में अपना जीवन गुजारना पड़ा. यही नहीं बल्कि उनका करियर भी बर्वाद हो गया. तो जैकब मार्टिन कौन हैं, आज हम आपको उनके बारे में विस्तार से बताने वाले हैं. इसके साथ ही हम आपको बताएंगे कि उन पर क्या मामले में केस दर्ज कराया गया था.
कौन हैं जैकब मार्टिन?
जैकब मार्टिन एक भारतीय क्रिकेटर हैं. उन्होंने भारत के लिए क्रिकेट खेला है. मार्टिन का जन्म 11 मई 1972 में गुजरात के बड़ौदा में हुआ था. वो भारतीय क्रिकेट टीम में मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज के तौर पर खेलते थे. इसके साथ ही वो लेफ्टआर्म लेग ब्रेक गेंदबाजी भी करते थे. दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने साल 1999 में अपना डेब्यू किया था. उनको वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना पहला मैच खेलने का मौका मिला था. जैकब मार्टिन ने बड़ौदा और रेलवे की टीम की कप्तानी भी की है. उन्होंने सौरव गांगुली की कप्तानी में अपना पदापर्ण भारतीय क्रिकेट में किया था.
All we need is love! The #Yellove Brigade contributed a token amount of Rs. 3 lakhs for the medical treatment of former India cricketer Jacob Martin. Get well soon, champ! Our prayers are with you! ???????? pic.twitter.com/zmh4dOKPmV
— Chennai Super Kings (@ChennaiIPL) January 22, 2019
किस केस में 22 साल बाद बरी हुए जैकब मार्टिन?
जैकब मार्टिन को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 22 साल पुराने एक में बरी कर दिया है. साल 2004 में पूर्व क्रिकेटर पर फर्जी यूके आव्रजन स्टाम्प, यात्रा व्यवस्था और वित्तीय लेनदेन से जुड़ा आरोप लगाया गया था. ये आरोप अब जाकर साल 2026 में साबित नहीं किया जा सकता है. अब अदालत को वित्तीय लेनदेन या अजवा स्पोर्ट्स क्लब पर उनके स्वामित्व या नियंत्रण से जुड़ा कोई भी ठोस और विश्वसनीय सबूत नहीं मिला. बता दें कि, कई गवाह भी इन आरोपों को साबित करने में विफल रहे.
मार्टिन ने इस मामले के बारे में बात करते हुए कहा कि, यह मामला 2004 में उनकी टीम के एक सदस्य द्वारा ब्रिटेन का वीजा समाप्त होने के बाद वहां रुकने और फर्जी आव्रजन स्टाम्प लगवाकर भारत लौटने के बाद शुरू हुआ था. मूल एफआईआर में उनका नाम नहीं था. इसके बाद में उनका नाम मामले में जोड़ दिया गया.
ये पूरी घटना साल 2004 में हुई थी. टीम इंग्लैंड खेलने गई थी, जो टीम 2004 में इंग्लैंड गई थी, उसमें से एक लड़के को छोड़कर बाकी सब वापस आ गए. वीजा की वैधता छह महीने की थी, वह छह महीने तक रह सकता था. वह इससे अधिक समय तक रुका रहा. किसी के जरिए उसने वहां फर्जी स्टैंपिंग करवा ली. फर्जी स्टैंपिंग कराने के बाद जब वह भारत वापस आया, तो उसे ब्रिटेन से डिपोर्ट कर दिया गया था. उसे नई दिल्ली एयरपोर्ट पर पकड़ लिया गया और फिर उससे पूछताछ की गई.
मार्टिन को रेलवे की नौकरी से धोना पड़ा हाथ
उन्होंने कहा, 'मेरा नाम एफआईआर में नहीं था, लेकिन जब जांच हुई, तो एक बड़ा नाम होने के नाते मुझे इस मामले में घसीटा गया. इन 22 वर्षों के दौरान, मुझे बीसीसीआई से भी कोई जवाब नहीं मिल रहा था. मैंने रेलवे में अपनी नौकरी खो दी. इसलिए इसकी वजह से मुझे बहुत तनाव था. मैंने बहुत बुरे दिन देखे हैं. अब मुझे क्लीन चिट मिल गई है. यह मेरे जीवन का बहुत बड़ा यू-टर्न है'.
#WATCH | Vadodara, Gujarat | Former Indian Cricketer Jacob Martin says, "A team I was part of went to the UK to play in 2004. Everyone returned, but one player stayed back. The visa was valid for six months, so he could have stayed that long, but he overstayed. He obtained a fake… pic.twitter.com/XeAu8DaoTA
— ANI (@ANI) August 21, 2026
कैसा रहा जैकब मार्टिन का क्रिकेटर करियर
घरेलू क्रिकेट में बड़ौदा, असम और रेलवे के लिए खेलने वाले जैकब मार्टिन ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए 10 वनडे मैच खेले हैं. उन्होंने 8 पारियों में उन्होंने 158 रन बनाए थे. लेकिन उनका घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन शानदार रहा है. उन्होंने 1998-99 में रणजी ट्रॉफी में 1,000 से अधिक रन बनाए. उन्होंने 1999 में टोरंटो में वेस्ट इंडीज के खिलाफ एक वनडे मैच में पदार्पण किया. उन्हें 1999-00 में ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए भी चुना गया था. उन्होंने 2000-01 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 1,000 से अधिक रन बनाए. उन्होंने 2008-09 के प्रथम श्रेणी सीजन के बाद क्रिकेट से संन्यास ले लिया, इसकी वजह उनके साथ जुड़ा हुआ जालसाजी का केस भी था.
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