Friday Remedies for Lakshmi Ji: शुक्रवार को करें मां लक्ष्मी के ये 5 उपाय, धन की तंगी होगी दूर
Friday Remedies for Lakshmi Ji: शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता लक्ष्मी की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-वैभव का वातावरण बना रहता है। अगर आर्थिक परेशानियों के कारण घर का बजट बिगड़ रहा है या बरकत नहीं हो रही है, तो शुक्रवार को पूजा के साथ कुछ आसान उपाय किए जा सकते हैं। मान्यता है कि इन उपायों से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और घर में सकारात्मकता बनी रहती है।
शुक्रवार को मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के उपाय
1. कमलगट्टे की माला से करें मंत्र जाप
शुक्रवार को सुबह या शाम मां लक्ष्मी की पूजा के बाद उत्तर दिशा की ओर मुख करके कमलगट्टे की माला से ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करने की मान्यता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, इससे मन को एकाग्र करने और माता लक्ष्मी का ध्यान करने में सहायता मिलती है।
2. कनकधारा स्तोत्र का करें पाठ
आर्थिक परेशानियों से राहत की कामना के लिए शुक्रवार को कनकधारा स्तोत्र का पाठ करने की परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ इसका पाठ करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
3. कपूर और लौंग करें अर्पित
शुक्रवार की शाम मां लक्ष्मी की पूजा करते समय पान में एक लौंग और कपूर अर्पित करने की धार्मिक मान्यता है। पूजा के दौरान मन में धन-धान्य और परिवार की सुख-शांति की कामना की जाती है।
4. मुख्य द्वार पर जलाएं घी का दीपक
शाम को घर के मुख्य द्वार की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद गंगाजल का छिड़काव कर मुख्य द्वार के दाईं ओर घी का दीपक जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि साफ-सुथरा घर मां लक्ष्मी को प्रिय होता है।
5. चांदी के सिक्के का उपाय
शुक्रवार की शाम एक चांदी के सिक्के को लाल कपड़े में बांधकर चावल या गेहूं से भरे मिट्टी के बर्तन में रखने की मान्यता है। इसे उत्तर-पश्चिम दिशा में रखने की बात भी कही जाती है। यह उपाय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है।
शुक्रवार को मां लक्ष्मी को क्या चढ़ाएं?
मां लक्ष्मी की पूजा में कमल या गुलाब के फूल, खीर, मखाने, बताशे और सफेद मिठाई अर्पित की जा सकती है। इसके अलावा लाल चुनरी और श्रृंगार की सामग्री चढ़ाने की भी परंपरा है।
मां लक्ष्मी की पूजा किस समय करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी की पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त और शुक्रवार की विशेष पूजा के लिए प्रदोष काल शुभ माना जाता है। शुक्रवार को शाम सूर्यास्त के आसपास पूजा करना भी कई घरों की परंपरा का हिस्सा है।
डिस्क्लेमर: ऊपर बताए गए उपाय धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। इनके परिणामों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है।
Sawan Pradosh Vrat: सावन का अंतिम प्रदोष व्रत कब? जानें तारीख, पूजा मुहूर्त और भौम प्रदोष का महत्व
Sawan Pradosh Vrat: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस पवित्र महीने में शिव पूजा, जलाभिषेक और व्रत का महत्व बढ़ जाता है। सावन में पड़ने वाला प्रदोष व्रत भी भक्तों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है।
सावन का अंतिम प्रदोष इस बार मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को पड़ रहा है। मंगलवार को आने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष या मंगल प्रदोष कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की उपासना करने से जीवन की कई परेशानियों से राहत मिलती है। आइए जानते हैं सावन के अंतिम प्रदोष की तारीख, पूजा का समय और धार्मिक महत्व।
कब है सावन का अंतिम प्रदोष व्रत?
पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 25 अगस्त 2026 को सुबह 6:20 बजे शुरू होगी और 26 अगस्त को सुबह 7:59 बजे समाप्त होगी। प्रदोष व्रत में सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। ऐसे में इस बार व्रत 25 अगस्त, मंगलवार को रखा जाएगा। मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत होने के कारण इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन शिवजी के साथ हनुमान जी की आराधना करना भी शुभ माना जाता है।
भौम प्रदोष 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
25 अगस्त को भगवान शिव की प्रदोष पूजा के लिए शुभ समय शाम 6:59 बजे से रात 9:16 बजे तक रहेगा। भक्त इस अवधि में शिवलिंग का अभिषेक कर भगवान शिव की पूजा और प्रदोष व्रत की कथा कर सकते हैं।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 बजे से 5:36 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:15 बजे से 1:06 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:47 बजे से 3:37 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: 25 अगस्त की रात 12:01 बजे से 26 अगस्त की रात 12:45 बजे तक
भौम प्रदोष का क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगलवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत विशेष रूप से मंगल ग्रह से जुड़ी समस्याओं के निवारण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे भौम प्रदोष इसलिए कहा जाता है क्योंकि ‘भौम’ मंगल ग्रह का एक नाम है। मान्यता है कि भौम प्रदोष का व्रत रखने और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने से कर्ज संबंधी परेशानियों से मुक्ति पाने में सहायता मिलती है। भूमि, मकान या संपत्ति से जुड़े मामलों में भी इस व्रत को शुभ माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल से संबंधित दोष बताए गए हों, वे इस दिन भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से मंगल से जुड़ी बाधाओं को शांत करने में सहायता मिलती है।
भौम प्रदोष पर कैसे करें भगवान शिव की पूजा?
प्रदोष के दिन सुबह स्नान करके भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करें। अपनी क्षमता के अनुसार व्रत का संकल्प लें। शाम के प्रदोष काल में शिव मंदिर जाकर या घर पर शिवलिंग की पूजा की जा सकती है। भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, अक्षत और फूल अर्पित करें। इसके बाद शिव मंत्रों का जाप करें और प्रदोष व्रत की कथा सुनें। मंगलवार होने के कारण हनुमान जी की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। पूजा के अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें।
किन समस्याओं के लिए माना जाता है विशेष?
भौम प्रदोष को लेकर मान्यता है कि इस व्रत से कर्ज, आर्थिक परेशानी और संपत्ति से जुड़े विवादों में राहत मिल सकती है। इसके अलावा मंगल दोष से जुड़ी परेशानियों को दूर करने के लिए भी इस दिन शिव और हनुमान जी की आराधना की जाती है। कुछ धार्मिक मान्यताओं में प्रदोष व्रत को संतान सुख और पारिवारिक मंगल से भी जोड़ा गया है। हालांकि, इन धार्मिक मान्यताओं को आस्था के रूप में ही देखना चाहिए।
सावन के अंतिम प्रदोष पर क्या करें?
सावन का अंतिम प्रदोष होने के कारण इस दिन शिव भक्ति का विशेष अवसर है। भक्त सुबह से सात्त्विक दिनचर्या अपनाकर भगवान शिव का ध्यान कर सकते हैं। शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक, बेलपत्र अर्पण, महामृत्युंजय मंत्र या पंचाक्षरी मंत्र का जाप और शिव आरती करना शुभ माना जाता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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