Jabalpur में Bargi Dam से छोड़ा गया 4,000 क्यूमेक पानी, नर्मदा का जलस्तर 10 फीट बढ़ा
जबलपुर जिले में नर्मदा नदी पर बने बरगी बांध के 21 में से 13 गेट बृहस्पतिवार दोपहर खोल दिए गए। ऊपरी क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण जलस्तर बढ़ने के बाद यह कदम उठाया गया। राज्य के जल संसाधन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि दोपहर 12 बजे 13 गेट खोले गए और करीब 4,000 घन मीटर प्रति सेकंड पानी छोड़ा गया।
एक घन मीटर प्रति सेकंड (क्यूमेक) में 1,000 लीटर पानी का प्रवाह होता है। अधिकारी ने बताया कि बांध में पानी का स्तर बढ़ने से संभावित बाढ़ की स्थिति को रोकने और जलाशय की सुरक्षा के लिए पानी छोड़ा गया। उन्होंने बताया कि मंडला, डिंडोरी और अमरकंटक में हुई भारी बारिश के बाद बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ा।
गेट खोलने से पहले अधिकारियों ने जबलपुर, नरसिंहपुर और नर्मदापुरम जिलों में सायरन बजाकर चेतावनी जारी की और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, पानी छोड़े जाने के बाद नर्मदा के विभिन्न घाटों पर जलस्तर आठ से 10 फुट तक बढ़ गया। इसके कारण भेड़ाघाट पर्यटन क्षेत्र में संगमरमर की चट्टानें और जलप्रपात पानी में डूब गए।
जबलपुर के ग्वारीघाट में नदी किनारे स्थित कई दुकानें और छोटे मंदिर भी जलमग्न हो गए। बरगी बांध, नर्मदा के उद्गम स्थल अनूपपुर जिले के बाद नदी पर बना पहला प्रमुख बांध है।
BHU को ICMR से 15 करोड़ रुपये का अनुदान, 6 शोध परियोजनाओं पर होगा काम
स्वदेशी स्वास्थ्य अनुसंधान और उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान ने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग रूपरेखा (एनआईआरएफ) विशेष अनुदान पहल के तहत उच्च प्रभाव वाली छह जैव-चिकित्सकीय अनुसंधान परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता हासिल की है। एक आधिकारिक बयान में बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी गई। बयान के मुताबिक, इन परियोजनाओं में राष्ट्रीय स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
इनमें पित्ताशय के कैंसर का शुरुआती चरण में पता लगाना, रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) से निपटने के लिए नयी पीढ़ी के समाधान, त्वचीय लीशमैनियासिस (काला-अजार) का निदान, बच्चों में सेप्टिक शॉक और गुर्दे की कोशिका कार्सिनोमा के लिए सटीक कैंसर उपचार शामिल हैं। बयान में कहा गया कि इन परियोजनाओं के लिए मंजूर करीब 15 करोड़ रुपये के अनुदान से चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस), विज्ञान संस्थान (आईओएस) और संबद्ध अभियांत्रिकी विभागों में व्यापक समूह अध्ययन, सटीक नैदानिक परीक्षण, विभिन्न जैविक स्तरों से संबंधित जैव-सूचकांकों की खोज और अत्याधुनिक प्रयोगशाला विश्लेषण को बढ़ावा मिलेगा। बीएचयू के कुलपति प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा, “चिकित्सा विज्ञान में उत्कृष्टता और सभी के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति हमारी प्रतिबद्धता के तहत बीएचयू रोगी देखभाल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ अनुसंधान पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।
हमारा उद्देश्य वैज्ञानिक खोजों को बेहतर रोगी देखभाल में बदलना है।” उन्होंने बताया कि पिछले छह महीनों में ही संकाय सदस्यों ने विभिन्न वित्त पोषण एजेंसियों को 200 से अधिक अनुसंधान परियोजनाओं के प्रस्ताव भेजे हैं, जिनमें से कई के परिणाम अभी आने बाकी हैं। चिकित्सा विज्ञान संस्थान के अनुसंधान अधिष्ठाता प्रोफेसर मनोज पांडे ने कहा कि विश्वविद्यालय का दृष्टिकोण ऐसे नए और प्रभावशाली अनुसंधान को बढ़ावा देना है, जो बीएचयू की प्रतिष्ठा को मजबूत करने के साथ-साथ समाज के लिए भी उपयोगी साबित हो। चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर एस.एन. संखवार ने कहा, “आईसीएमआर के इन छह प्रतिष्ठित अनुदानों को हासिल करना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि आईएमएस चिकित्सा अनुसंधान और रोगी-केंद्रित विज्ञान की सीमाओं को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
हमारे चिकित्सक और शोधकर्ता कठोर नैदानिक उत्कृष्टता तथा उन्नत प्रयोगशाला विज्ञान के बीच की दूरी को सफलतापूर्वक कम कर रहे हैं।
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