Farooq Abdullah ने कहा कि National Conference जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली के लिए संघर्ष जारी रखेगी
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने बृहस्पतिवार को कहा कि 2019 में केंद्र सरकार द्वारा निरस्त किए गए जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली पार्टी के एजेंडे में सबसे ऊपर है और उनकी पार्टी इसके लिए संघर्ष कभी नहीं छोड़ेगी। एक बयान में अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को दिया गया विशेष संवैधानिक दर्जा संघ के साथ उसके विशिष्ट और अद्वितीय संवैधानिक संबंध को दर्शाता था और यह विरासत नेशनल कॉन्फ्रेंस की राजनीतिक विचारधारा के केंद्र में बनी हुई है। पार्टी प्रमुख ने यहां एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों को भले ही ‘‘एकतरफा तरीके से बदल दिया गया’’ हो, लेकिन उनकी पार्टी उनकी बहाली के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘यह मुद्दा पार्टी के एजेंडे में सबसे ऊपर बना हुआ है। जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपने संवैधानिक अधिकारों की बहाली के लिए आवाज उठाने का अधिकार है।
Manoj Naravane ने कहा: China दीर्घकाल में कई क्षेत्रों में भारत का मुख्य प्रतिस्पर्धी बनेगा
पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल मनोज नरवणे ने बृहस्पतिवार को कहा कि आतंकवाद के लगातार खतरे के कारण भारत का ध्यान काफी हद तक पाकिस्तान पर केंद्रित रहा है, लेकिन दीर्घकाल में चीन कई क्षेत्रों में भारत का मुख्य प्रतिस्पर्धी बनने जा रहा है। चीन के संदर्भ में ‘शत्रु’ शब्द का इस्तेमाल करने से बचते हुए नरवणे ने कहा कि भारत को बीजिंग के साथ लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने के साथ-साथ मजबूत सैन्य प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने की जरूरत है। अपनी नई पुस्तक ‘द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड : अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज’ के विमोचन के अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान और चीन, दोनों के साथ युद्ध लड़े हैं और दोनों के साथ सीमाओं का विवाद अभी अनसुलझा है।
उन्होंने कहा कि हालांकि, दोनों देश अलग-अलग तरह की चुनौती पेश करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान और चीन पूरी तरह से अलग हैं। हमने दोनों के साथ युद्ध लड़े हैं।
हमारी सीमाएं को लेकर विवाद अनसुलझे हैं। इसलिए वे हमेशा खतरे और चुनौती के रूप में हमारे रडार पर रहेंगे।’’ नरवणे ने कहा कि पाकिस्तान से तत्काल खतरा मुख्य रूप से आतंकवाद के लगातार बने रहने के कारण है, जबकि आने वाले वर्षों में चीन के भारत का मुख्य प्रतिस्पर्धी बनने की संभावना है। उन्होंने कहा, ‘‘हमने पाकिस्तान के साथ बड़े युद्ध लड़े हैं और आतंकवाद को उसके लगातार समर्थन के कारण हमारा ध्यान पश्चिमी सीमा पर रहता है।
लेकिन मुझे लगता है कि हम बहुत स्पष्ट हैं कि आने वाले वर्षों में और दीर्घकाल में चीन हमारा मुख्य प्रतिस्पर्धी बनने जा रहा है। और मैं जानबूझकर ‘प्रतिस्पर्धी’ शब्द का इस्तेमाल कर रहा हूं, ‘शत्रु’ का नहीं।’’ नरवणे ने कहा कि चीन राजनीति, अर्थव्यवस्था, व्यापार और सैन्य मामलों सहित कई क्षेत्रों में भारत के साथ प्रतिस्पर्धा करेगा। नरवणे 31 दिसंबर 2019 से 30 अप्रैल, 2022 तक सेना अध्यक्ष रहे थे।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत को ताकत का इस्तेमाल करने के बजाय बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से चीन के साथ मतभेद सुलझाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘बल प्रयोग का सहारा लेना हमेशा आखिरी प्राथमिकता होनी चाहिए।’’ साथ ही उन्होंने कहा कि भारत को किसी भी संभावित दुस्साहस को रोकने के लिए विश्वसनीय सैन्य तैयारी बनाए रखनी चाहिए।
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