Delhi Master Plan 2047: महामारी और आपदाओं से निपटने को बनेंगे विशेष निकासी क्षेत्र
‘दिल्ली मास्टर प्लान-2047’ में महामारी और आपदाओं से निपटने के लिए शहरी नियोजन में बदलाव का प्रस्ताव किया गया है। मास्टर प्लान में बड़े खुले स्थान, विकेंद्रीकृत कार्यस्थल, प्रवासियों के लिए अतिरिक्त आवास विकल्प तथा चिन्हित निकासी एवं आश्रय क्षेत्रों का प्रावधान शामिल है। महामारी से निपटने की तैयारी के तहत बृहस्पतिवार को अधिसूचित योजना में भूखंडों पर मिश्रित उपयोग का प्रस्ताव है, ताकि घर, कार्यस्थल और जरूरी सेवाएं एक-दूसरे के करीब उपलब्ध हों।
मास्टर प्लान में झुग्गी पुनर्वास परियोजनाओं में साझा कार्यस्थल और घर से काम करने की सुविधा को बढ़ावा देने सहित विकेंद्रीकृत कार्यस्थलों की व्यवस्था का भी प्रस्ताव है। मास्टर प्लान में महामारी के दौरान सामाजिक दूरी बनाए रखने में मदद के लिए नए विकास क्षेत्रों और योजनाबद्ध पुनर्विकास के जरिए बड़े हरित क्षेत्र, खुले स्थान और सार्वजनिक प्लाजा विकसित करने का प्रस्ताव है। आग और भूकंप जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए सभी इलाकों, खासकर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में, विशेष निकासी और आश्रय स्थल चिह्नित किए जाएंगे।
निकासी स्थल खुले आसमान के नीचे ऐसे स्थान होंगे,जहां आग या भूकंप जैसी घटनाओं के दौरान लोग एकत्र हो सकेंगे। इनमें पार्क, बहुउद्देशीय मैदान और अन्य खुले स्थान शामिल हो सकते हैं।
Telangana के डिप्टी सीएम ने Krishna River के पानी पर हक मांगा, केंद्र से वित्तीय मदद भी चाही
तमिलनाडु में चेन्नई के पास आयोजित दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने कृष्णा नदी के पानी में राज्य के अधिकारों की रक्षा और प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता की मांग की। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के विदेश दौरे पर होने के कारण विक्रमार्क ने इस बैठक में तेलंगाना का प्रतिनिधित्व किया। विक्रमार्क ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “तेलंगाना अंतर-राज्यीय मामलों का एक न्यायसंगत, समयबद्ध और कानूनी रूप से मान्य समाधान चाहता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि स्थापित वैधानिक तंत्र का सम्मान किया जाए और सभी पर एक ही नियम लागू हों।” उन्होंने कहा कि तेलंगाना कृष्णा नदी के पानी में कोई विशेषाधिकार नहीं चाहता है, बल्कि स्थापित कानूनी ढांचे के माध्यम से अपनी वैध पात्रता और निचले प्रवाह के अधिकारों का संरक्षण चाहता है।
उपमुख्यमंत्री ने कालेश्वरम और पालमुरु-रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई योजनाओं के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की अनुसूची नौ और 10 के तहत पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के साथ लंबित मुद्दों के जल्द और नियमानुकूल समाधान पर जोर दिया। यह ध्यान दिलाते हुए कि राज्य स्वाभाविक रूप से निवेश और नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, उन्होंने कहा कि जल सुरक्षा, ऊर्जा ग्रिड, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला और लॉजिस्टिक्स जैसी साझा चुनौतियां सीमाओं से परे हैं और इनके लिए आपसी सहयोग आवश्यक है।
परिषद को लंबी चर्चाओं से आगे बढ़कर ठोस फैसलों और उनके कार्यान्वयन की ओर बढ़ना होगा। विक्रमार्क ने कहा, “अगर दक्षिण भारत एक साथ आगे बढ़ता है, तो भारत की विकास दर और तेज होगी।
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