जरूरत की खबर- बारिश में बढ़ते डेंगू-मलेरिया के केसेज:घर में इन जगहों पर छिपे हो सकते हैं मच्छर, एक्सपर्ट से जानें कैसे करें बचाव
इन दिनों डेंगू के केसेज काफी बढ़ रहे हैं। पिछले दिनों एक्ट्रेस स्वरा भास्कर, श्वेता तिवारी और अविका गोर के डेंगू पॉजिटिव होने की खबर आई थी। हर साल बारिश के मौसम में डेंगू, मलेरिया जैसी मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ते हैं। ‘नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल’ (NCVBDC) के मुताबिक, भारत में साल 2024 में डेंगू के कुल 2,33,519 केस दर्ज हुए। इनमें से 297 लोगों की मृत्यु हो गई। वहीं साल 2024 में देश में मलेरिया के 2.55 लाख से ज्यादा मामले सामने आए। इनमें करीब 86 लोगों की मौत हुई। साल 2022 में ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, मानसून में मच्छरों को पनपने के लिए अनुकूल माहौल मिलता है। इस कारण मच्छर जनित बीमारियों के केस बढ़ जाते हैं। इसलिए, आज ‘जरूरत की खबर’ में डेंगू-मलेरिया के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. संदीप दोशी, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई सवाल- मानसून में डेंगू और मलेरिया ज्यादा क्यों फैलता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- किन जगहों पर इनके मच्छर पनपने का रिस्क सबसे ज्यादा है? जवाब- इन जगहों पर मच्छर पनपने का रिस्क ज्यादा होता है- 1. घर के अंदर 2. आउटडोर एरिया 3. सोसाइटी/कॉलोनी एरिया सवाल- क्या घर के अंदर भी डेंगू और मलेरिया के मच्छर पैदा हो सकते हैं? जवाब- हां, डेंगू फैलाने वाले एडीस एजिप्टी मच्छर साफ और रुके हुए पानी में अंडे देते हैं। वहीं मलेरिया फैलाने वाले एनोफेलीज मच्छर गंदे या ठहरे पानी में पनपते हैं। घर के अंदर जमा थोड़ा-सा पानी भी इन मच्छरों के लिए पर्याप्त होता है। ग्राफिक में मच्छरों के ब्रीडिंग हॉटस्पॉट देखिए- सवाल- डेंगू-मलेरिया के लक्षण क्या हैं? जवाब- दोनों ही मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियां हैं। इनके शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य बुखार जैसे लगते हैं। हालांकि इसमें कुछ अंतर होते हैं। सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए- सवाल- डेंगू-मलेरिया का पता कैसे चलता है? जवाब- इसके लिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट कराते हैं। हर टेस्ट बीमारी के अलग फेज और गंभीरता को समझने में मदद करता है। डेंगू के टेस्ट मलेरिया के टेस्ट सवाल- डेंगू-मलेरिया का इलाज क्या है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- डेंगू का इलाज मलेरिया का इलाज ध्यान रखें, खुद से दवा न लें और बुखार 1–2 दिन से ज्यादा रहे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। सवाल- कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है? जवाब- इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर के पास जाएं- सवाल- किन लोगों को रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- डेंगू-मलेरिया किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में ये ज्यादा गंभीर हो सकता है, जैसेकि- सवाल- डेंगू-मलेरिया से बचने के लिए क्या करें? जवाब- थोड़ी-सी सावधानी से इन बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है। सभी सेफ्टी टिप्स ग्राफिक में देखिए- सवाल- मच्छर भगाने के घरेलू उपाय क्या हैं? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- नीम का धुआं: सूखी नीम की पत्तियां जलाने से मच्छर दूर भागते हैं। कपूर: कमरे में कपूर जलाने या रख देने से मच्छर कम होते हैं। नीम का तेल: स्किन पर लगाने से नेचुरल रिपेलेंट का काम करता है। लहसुन का स्प्रे: पानी में लहसुन उबालकर छिड़काव करने से मच्छर कम आते हैं। तुलसी का पौधा: घर के आसपास तुलसी लगाने से मच्छरों की संख्या कम होती है। लेमनग्रास/सिट्रोनेला ऑयल: इसकी खुशबू मच्छरों को पसंद नहीं होती है। लौंग और नींबू: नींबू में लौंग लगाकर कमरे में रखने से इसकी खुशबू से भी मच्छर दूर रहते हैं। सवाल- अगर डेंगू-मलेरिया हो जाए तो क्या करें? जवाब- ऐसी स्थिति में समय पर सही इलाज और देखभाल जरूरी है। इसलिए ग्राफिक में दी गई कुछ बातों का खास ख्याल रखें- डेंगू-मलेरिया से जुड़े कुछ कॉमन सवाल और जवाब सवाल- क्या डेंगू-मलेरिया संक्रामक बीमारी है? जवाब- नहीं, डेंगू और मलेरिया सीधे एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलते हैं। ये बीमारियां संक्रमित मच्छर के काटने से फैलती हैं। सवाल- क्या एक बार डेंगू होने के बाद दोबारा नहीं होता? जवाब- नहीं, इसके 4 अलग-अलग प्रकार (सीरोटाइप) होते हैं। इसलिए एक बार होने के बाद भी दूसरी बार संक्रमण का रिस्क रहता है। दूसरी बार यह ज्यादा गंभीर भी हो सकता है। सवाल- डेंगू-मलेरिया होने पर क्या गलतियां नहीं करनी चाहिए? जवाब- नीचे ग्राफिक में लिखी गलतियां बिल्कुल न करें- सवाल- डेंगू-मलेरिया में क्या खाना-पीना चाहिए और क्या नहीं? जवाब- डेंगू-मलेरिया होने पर खानपान को लेकर सावधानियां बरतनी चाहिए- क्या लें? क्या न लें? सवाल- बच्चों और बुजुर्गों को मच्छरों से बचाने के लिए क्या अतिरिक्त सावधानी रखें? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- …………………….. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- मानसून में बढ़ता वाटर रिटेंशन का रिस्क: चेहरे और बॉडी में सूजन, डॉक्टर से समझें इसका साइंस, कम करने के 9 टिप्स बारिश शुरू होते ही लोग चाय के साथ पकौड़े, चिप्स और नमकीन ज्यादा खाने लगते हैं। बारिश के कारण बाहर निकलना भी कम हो जाता है। इससे रोज की फिजिकल एक्टिविटी घट जाती है। खानपान और रूटीन में आए ये बदलाव शरीर में वाटर रिटेंशन बढ़ा सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
मेंटल हेल्थ- दोस्त स्वार्थी थे, मुझे यूज करते थे:मैंने टॉक्सिक दोस्ती तोड़ दी, लेकिन अब बहुत अकेलापन महसूस होता है, क्या करूं
सवाल- मेरी उम्र 33 साल है। मेरी कुछ बहुत पुरानी दोस्तियां थीं। हम सालों से साथ थे, लेकिन धीरे-धीरे मुझे लगने लगा कि ये रिश्ते सिर्फ उनकी जरूरत और स्वार्थ के हैं। जब उन्हें मदद की जरूरत होती तो मैं सबसे पहले याद आता, लेकिन मेरी जरूरत के समय उनके पास हमेशा कोई-न-कोई बहाना होता था। कई बार मेरी निजी बातें भी दूसरों तक पहुंच जाती थीं। बहुत सोचने के बाद मैंने उनसे दूरी बना ली और धीरे-धीरे सारे रिश्ते खत्म कर दिए। शुरू में राहत महसूस हुई। लेकिन अब करीब छह महीने बाद मुझे बहुत अकेलापन महसूस होता है। फोन में कोई मैसेज नहीं आता। वीकेंड पर कहीं जाने के लिए कोई दोस्त नहीं होता। क्या टॉक्सिक दोस्ती खत्म करने के बाद भी अकेलापन महसूस होता है? क्या सिर्फ इस अकेलेपन से बचने के लिए पुराने टॉक्सिक रिश्तों में लौटना ठीक होगा? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। हां, टॉक्सिक दोस्ती खत्म करने के बाद भी अकेलापन महसूस हो सकता है। कई बार उस अकेलेपन के कारण पुरानी टॉक्सिक दोस्ती में लौटने की इच्छा भी हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि रिश्ता खत्म करके आपने कोई गलती की। कई बार हम किसी रिश्ते से इसलिए नहीं जुड़े रहते क्योंकि हमें उसमें खुशी मिलती है। हम इसलिए जुड़े रहते हैं क्योंकि वह पुराना है, जाना-पहचाना है और हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। टॉक्सिक रिश्तों के साथ हम क्या खोते हैं? टॉक्सिक रिश्ता खत्म होने के बाद भी सिर्फ एक व्यक्ति नहीं जाता। उसके साथ हमारी रोज की बातचीत, वीकेंड की योजनाएं, साझी यादें और जिंदगी का एक पूरा हिस्सा भी खाली हो जाता है। इसलिए ऐसा हो सकता है कि टॉक्सिक दोस्ती खत्म करने के बाद राहत और अकेलापन, दोनों एक साथ महसूस हों। टॉक्सिक दोस्ती क्या है? टॉक्सिक दोस्ती का मतलब क्या है। टॉक्सिक दोस्ती कोई मेडिकल कंडीशन या मानसिक बीमारी नहीं है। इसे यूं समझिए कि– किसी दोस्ती, रिश्ते या व्यक्ति को टॉक्सिक या नुकसानदेह बताने वाली सिर्फ एक घटना नहीं होती। इसके पीछे लंबा अनुभव और बार-बार दोहराया जाने वाला एक पैटर्न होता है। मसलन— हम 'टॉक्सिक' दोस्ती में क्यों लौटते हैं? यहां सबसे जरूरी सवाल ये है कि “मैं ऐसे रिश्ते में वापस क्यों जाना चाहता हूं, जिसने मुझे चोट पहुंचाई?” इसका जवाब हमेशा यह नहीं होता कि हमें वह व्यक्ति बहुत याद आ रहा है। कई बार इसके पीछे हमारी अपनी कोई मनोवैज्ञानिक जरूरत होती है। 1. अकेलापन ज्यादा डरावना अकेलापन डराता है। खासकर तब, जब हमें लगता है कि नए दोस्त बनाना मुश्किल है। ऐसे में पुराना दोस्त भले ही हमें दुख दे, लेकिन वह जाना-पहचाना लगता है। हमें पता है कि उससे क्या उम्मीद करनी है। हमारा दिमाग कई बार परिचित तकलीफ को अनजान स्थिति से ज्यादा सुरक्षित मान लेता है। इसलिए मन कह सकता है कि— “जो भी था, कम–से–कम कुछ तो था। अब तो कोई भी नहीं है।” 2. आपकी पहचान ‘मदद करने वाले’ की कुछ रिश्तों में एक व्यक्ति हमेशा समस्या सुलझाने वाला बन जाता है। यहां खतरा यह है कि आप अपने महत्व को दूसरे से जोड़कर देखने लगते हैं। ऐसे में जब रिश्ता खत्म होता है तो सिर्फ दोस्त नहीं जाता, आपके महत्वपूर्ण होने का एहसास भी चला जाता है। 3. बुरे अनुभवों को ढकती अच्छे पलों की याद किसी भी लंबे रिश्ते में सिर्फ बुरे पल ही नहीं होते। रिश्ता खत्म होने के बाद दिमाग अक्सर उन अच्छे पलों को याद करता है। लेकिन उन अच्छे पलों को पूरी दोस्ती का प्रमाण मत बनाइए। यह देखिए कि ज्यादातर समय वह रिश्ता आपको कैसा महसूस कराता था। असली सवाल यही है कि क्या आपकी जरूरत के समय वे मौजूद थे। इसलिए आगे बढ़ने से पहले खुद से ये छह सवाल जरूर पूछिए– 4. पुरानी दोस्ती के साथ अपराधबोध भी जुड़ा होता है हमारे समाज में दोस्ती को निभाने की बहुत अहमियत है। हमें सिखाया जाता है– “मुश्किल समय में दोस्त का साथ नहीं छोड़ते।” यह बात खूबसूरत है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि दोस्ती में हम अपनी गरिमा छोड़ दें। वफादारी और आत्म-उपेक्षा एक चीज नहीं हैं। क्या आपकी दोस्ती टॉक्सिक है? करें सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। पिछले तीन महीने को ध्यान में रखकर नीचे दिए सवालों का जवाब दें। नीचे ग्राफिक्स में कुल 10 सवाल हैं। आपको इन सवालों को 0 से 3 के स्केल पर रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल के लिए अगर आपका जवाब 'कभी नहीं' है तो 0 नंबर दें और अगर आपका जवाब 'लगभग हमेशा' है तो 3 नंबर दें। अंत में टोटल स्कोर की एनालिसिस करें और अपना स्कोर इंटरप्रिटेशन आगे देखें। एसेसमेंट टेस्ट का स्कोर इंटरप्रिटेशन 0–8: दोस्ती में सामान्य तनाव हो सकता है। कोई स्पेसिफिक समस्या हो तो उस पर ध्यान दें। 9–17: रिश्ते में असंतुलन है। सीमाएं तय करें, सामने वाले की प्रतिक्रिया नोटिस करें। 18–26: लंबे समय से चल रहा नुकसानदेह पैटर्न हो सकता है। दूरी बनाना उचित है। 27–36: मेंटल हेल्थ को गंभीर नुकसान हो सकता है। भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें या मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट की मदद लें। नोट: यह कोई मेडिकल टेस्ट या बीमारी का निदान नहीं है। यह सिर्फ अपने रिश्ते को समझने का एक तरीका है। अगर रिश्ते में धमकी, पीछा करना, हिंसा, यौन दबाव या आर्थिक शोषण हो, तो सिर्फ स्कोर देखकर फैसला न करें। अपनी सेफ्टी को प्राथमिकता दें। आगे का कदम क्या हो? दोस्ती में वापस न जाकर खुद को वापस कैसे पाएं? टॉक्सिक दोस्ती को खत्म करना पहला कदम था। अब दूसरा कदम है, उस खाली जगह को हेल्दी फ्रेंडशिप से भरना। 1. अपनी फीलिंग्स को आइडेंटीफाई करें जब भी पुराने दोस्त को फोन करने का मन करे, तो उन पुरानी घटनाओं और उसके पैटर्न को एक डायरी में लिखिए। जब आप दोस्त थे तो उसका बिहेवियर क्या होता था। घटना– दोस्त का फोन आया, उसे हेल्प मांगी। विचार– “अगर मैंने मदद नहीं की तो मैं स्वार्थी हूं। ” भावना– अपराधबोध महसूस हुआ। मेरा व्यवहार– अपना काम छोड़कर तुरंत मदद की। तुरंत मिला फायदा– महसूस हुआ कि मैं अच्छा और जरूरी हूं। बाद की फीलिंग्स– बाद में गुस्सा आया, थकान महसूस हुई। 2. अपनी पुरानी धारणाओं को चुनौती दें आप दोस्त हैं। आप किसी के इमरजेंसी सर्विस सेंटर नहीं हैं। इसलिए अगर आपका मन कहता है– “मेरा महत्व तभी है, जब मैं दूसरों की समस्याएं हल करूं।” तो इसे बदलकर खुद से कहें— “मदद करना मेरी खूबी है। लेकिन मेरी महत्व इस बात पर निर्भर नहीं करता कि कितने लोग मुझ पर निर्भर हैं।” 3. ‘NO’ कहने की शुरुआत करें सीधे बड़े बदलावों की जरूरत नहीं है। इसलिए छोटे–छोटे प्रयोग करें। इस सप्ताह ये छोटे कदम उठाएं— एक बार अपनी जरूरत सामने रखें। फिर देखें कि सामने वाला क्या करता है। याद रखें– एक स्वस्थ दोस्त आपकी हर बात से सहमत नहीं होगा। लेकिन वह आपकी सीमा का सम्मान करेगा। अब नए दोस्त कैसे बनेंगे? यहीं सबसे ज्यादा धैर्य की जरूरत है। अकेलेपन का इलाज पुराने खराब रिश्ते में वापस लौटना नहीं है। उसका बेहतर रास्ता है, नए और स्वस्थ सामाजिक रिश्ते बनाना। लेकिन ऐसा नहीं है कि पहली मुलाकात में ही कोई आपका अच्छा दोस्त बन जाएगा। दोस्ती अचानक नहीं बनती। वह बार-बार मिलने, बात करने, चीजें शेयर करने और साझे अनुभवों से बनती है। पुराने दोस्त वापस आ जाएं तो क्या करें? उनसे जुड़ा कोई फैसला सिर्फ इस आधार पर न लें कि आप अब अकेले हैं। इसके बजाय ये सवाल पूछें— याद रखें– माफी मांगना और खुद को बदलना दो अलग चीजें हैं। प्रोफेशनल हेल्प कब जरूरी? अगर अकेलापन, चिंता, उदासी या अपराधबोध लगातार बना हुआ है और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है तो मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से बात करना मददगार हो सकता है। अंतिम बात दोस्ती खत्म होने के बाद पैदा हुए खालीपन को तुरंत भरने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इसके बजाय यह समझना चाहिए कि वास्तव में किस चीज की कमी महसूस हो रही है। अगर आप बार-बार ऐसे रिश्तों में फंसते हैं, जहां आपको अपनी जरूरतों से ज्यादा दूसरे व्यक्ति की जरूरतों की चिंता रहती है, तो इस पैटर्न को भी समझना बहुत जरूरी है। जीवन का मकसद सिर्फ एक टॉक्सिक दोस्ती के लूप से बाहर निकलना नहीं, बल्कि ओवरऑल स्वस्थ, सुंदर रिश्ते बनाना है। ………………… मेंटल हेल्थ से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए मेंटल हेल्थ- बुढ़ापे में बीमारी का डर: मामूली दर्द भी हार्ट अटैक लगता है, टेस्ट में कुछ नहीं आता, लेकिन डर नहीं जाता, क्या करूं किसी करीबी दोस्त की अचानक मौत बहुत बड़ा मानसिक झटका हो सकती है। इसके बाद अपनी सेहत को लेकर ज्यादा सतर्क हो जाना भी सामान्य है। लेकिन अगर बार-बार जांच कराने के बाद भी मन को तसल्ली न मिले, हर छोटे लक्षण को गंभीर बीमारी मान लिया जाए तो यह सिर्फ सतर्कता नहीं है। यह हेल्थ एंग्जाइटी का संकेत हो सकता है। पूरी खबर पढ़िए…
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