Kunafa Recipe: इस राखी घर पर बनाएं सॉफ्ट और क्रंची कुनाफा, गुलाब जामुन की जगह भाई को खिलाएं ये खास मिठाई
Rakhi Special Kunafa Recipe: रक्षाबंधन पर अगर इस बार बाजार की मिठाई से कुछ अलग बनाना चाहते हैं, तो घर पर क्रिस्पी और चीज़ी कुनाफा ट्राई कर सकते हैं। बाहर से कुरकुरी और अंदर से सॉफ्ट चीज़ वाली यह मिठाई राखी के मौके पर मेहमानों को भी पसंद आएगी।
रक्षाबंधन की मिठाई की थाली में कुनाफा एक अलग स्वाद जोड़ सकता है। इसे कुनाफा पेस्ट्री, मक्खन, मोजरेला चीज़ और मीठी चाशनी की मदद से आसानी से तैयार किया जा सकता है।
कुनाफा बनाने के लिए सामग्री
कुनाफा के लिए:
- 250 ग्राम कुनाफा या कटाफि पेस्ट्री
- 100 ग्राम पिघला हुआ मक्खन
- 250 ग्राम मोजरेला चीज़
- 2 बड़े चम्मच कटे हुए पिस्ता
चाशनी के लिए:
- 1 कप चीनी
- आधा कप पानी
- 1 छोटा चम्मच नींबू का रस
- आधा छोटा चम्मच गुलाब जल या केवड़ा जल
ऐसे बनाएं क्रिस्पी चीज़ी कुनाफा
स्टेप 1: चाशनी बनाएं
पैन में चीनी और पानी डालकर 5-7 मिनट पकाएं। इसमें नींबू का रस डालकर गैस बंद कर दें। चाहें तो गुलाब जल डालें और चाशनी को ठंडा होने दें।
स्टेप 2: कुनाफा तैयार करें
कुनाफा पेस्ट्री को छोटे टुकड़ों में तोड़ लें। इसमें पिघला हुआ मक्खन डालकर अच्छी तरह मिलाएं, ताकि मक्खन पूरी पेस्ट्री पर लग जाए।
स्टेप 3: चीज़ की लेयर लगाएं
बेकिंग डिश में आधा कुनाफा फैलाकर हल्के हाथ से दबाएं। इसके ऊपर मोजरेला चीज़ की लेयर लगाएं और बचा हुआ कुनाफा ऊपर से फैला दें।
स्टेप 4: बेक करें
ओवन को 180 डिग्री सेल्सियस पर प्रीहीट करें। कुनाफा को करीब 30-35 मिनट तक बेक करें। ऊपर से सुनहरा और कुरकुरा होने पर इसे बाहर निकाल लें। ओवन न हो तो भारी तले वाले पैन में धीमी आंच पर करीब 20-25 मिनट में भी इसे तैयार किया जा सकता है।
स्टेप 5: चाशनी और पिस्ता डालें
गर्म कुनाफा के ऊपर ठंडी चाशनी डालें और कटे हुए पिस्ता से सजाएं। रक्षाबंधन के मौके पर इसे गर्मागर्म सर्व करें।
कुनाफा को छोटे टुकड़ों में काटकर मिठाई की प्लेट में सर्व करें। ऊपर से पिस्ता और थोड़ी गुलाब की पंखुड़ियां डालने से यह देखने में भी फेस्टिव लगेगा।
टिप: कुनाफा को क्रिस्पी रखने के लिए चाशनी जरूरत के हिसाब से ही डालें और तैयार होने के बाद इसे गर्मागर्म परोसें।
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Nag Panchami 2026: नाग पंचमी पर घर के दरवाजे पर क्यों बनाते हैं नाग की आकृति? जानें धार्मिक और वैज्ञानिक वजह
Nag Panchami 2026: सावन मास में नाग पंचमी का पर्व आते ही कई घरों के मुख्य दरवाजे पर नाग की आकृति नजर आने लगती है। कहीं गोबर और हल्दी से नाग बनाए जाते हैं तो कहीं गेरू से चित्र उकेरा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नाग देवता का चित्र खास तौर पर घर के मुख्य द्वार पर ही क्यों बनाया जाता है? इसके पीछे धार्मिक आस्था के साथ-साथ ज्योतिष, वास्तु और खेती-किसानी से जुड़ी मान्यताएं भी बताई जाती हैं।
मुख्य दरवाजे पर ही क्यों बनाई जाती है नाग की आकृति?
भारतीय परंपरा में घर के मुख्य द्वार को बेहद महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। मान्यता है कि घर में प्रवेश करने वाली ऊर्जा और लोगों का पहला संपर्क इसी स्थान से होता है। इसी वजह से नाग पंचमी पर मुख्य दरवाजे के दोनों ओर नाग देवता की आकृति बनाने और उनकी पूजा करने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, नाग देवता की पूजा करने से घर-परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है और नकारात्मकता से रक्षा होती है।
राहु-केतु से भी जोड़ा जाता है नाग का संबंध
ज्योतिषीय मान्यताओं में नाग और राहु-केतु का संबंध बताया जाता है। इसी वजह से नाग पंचमी को इन ग्रहों से जुड़ी परेशानियों को शांत करने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
नाग की आकृति पर जल, दूध, दूर्वा और अक्षत अर्पित करने की परंपरा कुछ स्थानों पर देखने को मिलती है। हालांकि, राहु-केतु के प्रभाव और उपायों से जुड़े दावे ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।
वास्तु में मुख्य द्वार का खास महत्व
वास्तु परंपरा में घर के मुख्य दरवाजे को महत्वपूर्ण माना गया है। इसी कारण नाग पंचमी पर यहां नाग देवता का प्रतीक बनाने की परंपरा को घर की सुरक्षा और शुभता से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि नाग देवता की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं।
खेती-किसानी से भी जुड़ी है यह परंपरा
नाग पंचमी की परंपरा का एक महत्वपूर्ण पक्ष प्रकृति और खेती से जुड़ा हुआ भी माना जा सकता है। सांप खेतों में चूहों और अन्य छोटे जीवों की संख्या नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं। चूहे फसलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, इसलिए पारंपरिक कृषि समाज में सांपों को पारिस्थितिकी तंत्र का उपयोगी हिस्सा माना जाता रहा है। ऐसे में नाग देवता की पूजा को प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने की परंपरा से भी जोड़कर देखा जाता है।
आज भी कायम है सदियों पुरानी परंपरा
समय के साथ घरों की बनावट और जीवनशैली बदली है, लेकिन नाग पंचमी से जुड़ी कई पारंपरिक मान्यताएं आज भी लोगों के बीच कायम हैं। मुख्य द्वार पर नाग की आकृति बनाना भी ऐसी ही परंपराओं में शामिल है।
नोट: नाग पंचमी, वास्तु और ज्योतिष से जुड़ी बातें धार्मिक एवं पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि आस्था और लोकपरंपरा के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
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