EPFO Pension: ईपीएफओ ने 1.49 लाख पेंशन पेमेंट ऑर्डर किए मंजूर, उमंग ऐप से ऐसे चेक करें स्टेटस
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने ज्यादा पेंशन के लिए आवेदन करने वाले रिटायर्ड कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। संगठन ने सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2022 के आदेश के बाद अब तक 1.49 लाख से ज्यादा पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) मंजूर किए हैं।
जिन लोगों ने ज्यादा पेंशन के विकल्प के तहत आवेदन किया है, वे अपने आवेदन और पेंशन की स्थिति ऑनलाइन भी चेक कर सकते हैं।
श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे ने 10 अगस्त को लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि ज्यादा पेंशन के लिए 15,24,365 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 5 अगस्त 2026 तक 11,595 आवेदन लंबित थे। ईपीएफओ की कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में 31 मार्च 2026 तक करीब 85 लाख पेंशनर थे। इस दौरान पेंशन के रूप में 15,819.28 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
अगर आपने भी ज्यादा पेंशन के लिए आवेदन किया है तो इसका स्टेटस घर बैठे कई तरीकों से देखा जा सकता है। इसके लिए UMANG ऐप, EPFO के आधिकारिक पोर्टल, एसएमएस, मिस्ड कॉल और हेल्पलाइन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
UMANG ऐप से ऐसे चेक करें पेंशन स्टेटस
सबसे आसान तरीका उमंग ऐप है। इसके लिए पहले गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से UMANG ऐप डाउनलोड करें। आधार से जुड़े मोबाइल नंबर के जरिए रजिस्ट्रेशन करें और 4 अंकों का एम-पिन बनाएं।
लॉगिन करने के बाद ऑल सर्विसेस में जाकर ईपीएफओ चुनें। इसके बाद इम्प्लॉयई सेंट्रिक सर्विसेस या पेंशनर सर्विसेस पर जाएं। यहां ट्रैक क्लेम विकल्प चुनकर अपना 12 अंकों का यूएएन दर्ज करें। रजिस्टर्ड मोबाइल पर आए ओटीपी को डालने के बाद आपको PPO से जुड़ी जानकारी, ट्रैकिंग आईडी और आवेदन की स्थिति दिखाई देगी।
EPFO पोर्टल से भी कर सकते हैं चेक
EPFO के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर भी पेंशन की जानकारी देखी जा सकती है। नो योर पीपीओ नंबर विकल्प के जरिए बैंक अकाउंट या सदस्य आईडी की मदद से पीपीओ नंबर पता किया जा सकता है। इसके बाद ऑनलाइन सर्विसेस में जाकर नो योर पेंशन स्टेटस विकल्प चुनें। यहां पेंशन की क्रेडिट तारीख और भुगतान की जानकारी देखी जा सकती है।
रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 7738299899 पर EPFOHO UAN ENG लिखकर एसएमएस भेजा जा सकता है। भाषा बदलने के लिए ENG की जगह HIN, PAN, GUJ, MAR, KAN, TEL, TAM, MAL या BEN लिखा जा सकता है।
इसके अलावा रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 9966044425 पर मिस्ड कॉल देकर भी ईपीएफओ खाते से जुड़ी जानकारी हासिल की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर 1800 118 005 या 1800 114 470 पर EPFO की हेल्पलाइन से संपर्क किया जा सकता है।
(प्रियंका कुमारी)
Plastic Money: प्लास्टिक के नोट की होगी एंट्री!,10 और 20 रुपये के 1-1 अरब नोटों का ट्रायल मंजूर
Plastic Money: भारत में जल्द ही प्लास्टिक यानी पॉलिमर नोट का ट्रायल शुरू हो सकता। केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिसमें 10 और 20 रुपये के पॉलिमर नोटों को सीमित स्तर पर चलाकर देखा जाएगा।
दोनों मूल्यवर्ग के 1-1 अरब नोट छापे और इस्तेमाल में लाए जाएंगे। इसका मकसद यह जांचना है कि भारत के अलग-अलग मौसम और परिस्थितियों में ये नोट कितने टिकाऊ साबित होते।
10-20 रुपये के पॉलिमर नोट का होगा ट्रायल
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि RBI के केंद्रीय बोर्ड ने रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 25 के तहत यह प्रस्ताव सरकार को भेजा था। सरकार ने इसे मंजूरी दे दी है। हालांकि, फिलहाल इन नोटों को बाजार में उतारने की कोई निश्चित तारीख तय नहीं हुई है।
मौजूदा नोटों के साथ जारी होंगे पॉलिमर नोट
वित्त मंत्री के मुताबिक पॉलिमर नोटों की खरीद की प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है। इसलिए अभी यह बताना संभव नहीं है कि ये नोट कब से चलन में आएंगे और इस पूरी प्रक्रिया पर कितना खर्च आएगा। ये नोट मौजूदा कागज आधारित नोटों के साथ ही जारी किए जाने का प्रस्ताव है।
इस पायलट प्रोजेक्ट के दौरान खास तौर पर यह देखा जाएगा कि पॉलिमर नोट भारतीय मौसम, गर्मी, नमी, धूल और रोजमर्रा के इस्तेमाल में कैसा प्रदर्शन करते हैं। इसके आधार पर आगे इन नोटों को बड़े स्तर पर जारी करने का फैसला लिया जा सकता है।
छोटे नोट जल्दी खराब होते हैं
RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक कम मूल्य वाले नोट सबसे ज्यादा हाथ बदलते हैं। लगातार इस्तेमाल के कारण इन पर जल्दी टूट-फूट और गंदगी आ जाती है। पॉलिमर से बने नोट ऐसे मामलों में ज्यादा टिकाऊ माने जाते हैं।
पॉलिमर नोट नमी, पानी, गंदगी और फटने के प्रति कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा मजबूत होते हैं। इनमें नकली नोटों पर रोक लगाने के लिए माइक्रो-ऑप्टिक होलोग्राम और पारदर्शी विंडो जैसे सुरक्षा फीचर भी लगाए जा सकते हैं।
60 देशों में पॉलिमर नोट हो रहे इस्तेमाल
पॉलिमर करेंसी दुनिया के करीब 60 देशों में इस्तेमाल की जाती है। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में भी इस तरह के नोट चलन में हैं। इनकी लंबी उम्र के कारण छोटे मूल्यवर्ग के नोटों की छपाई और उन्हें बार-बार बदलने की जरूरत कम हो सकती है।
RBI गवर्नर ने 5 अगस्त को कहा था कि फिलहाल यह केवल पायलट प्रोजेक्ट है। भारतीय परिस्थितियों में इनके प्रदर्शन की जांच के बाद ही तय होगा कि इन्हें बड़े स्तर पर जारी किया जाए या इनमें कुछ बदलाव किए जाएं।
(प्रियंका कुमारी)
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi









