भारत निर्वाचन आयोग पूरे देश में SIR करा रहा है इसके लिए एक कार्यक्रम तैयर किया गया है जिसके तहत अलग अलग राज्यों में एक तय अवधि में एसआईआर पूरी करनी है, इस समय उत्तराखंड में भी एसआईआर चल रही है लेकिन अन्य राज्यों की तरह उत्तराखंड में भी कांग्रेस ने गड़बड़ी के आरोप लगाये हैं, कांग्रेस नेता आज नईदिल्ली में भारत निर्वाचन आयोग के कार्यालय पर पहुंचे और कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया।
कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री एवं उत्तराखंड प्रभारी लोकसभा सांसद शैलजा के नेतृत्व में कोच्न्ग्रेस नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल आज नई दिल्ली में निर्वाचन आयोग के कार्यालय पर ज्ञापन देने पहुंचा, उन्होंने आरोप लगाया कि चुँव आयोग के कार्यालय में उन्हें जाने से रोका गया और मजबूरन उन्हें वहां प्रदर्शन करना पड़ा नारे लगाने पड़े।
कांग्रेस नेत्री शैलजा, राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा और कुछ विधायकों और नेताओं के साथ आज चुनाव आयोग के कार्यालय पर पहुंची, उनके हाथ में एक ज्ञापन में जिसमें उत्तराखंड में चल रही एसआईआर प्रक्रिया में धांधली के आरोप लगाये थे।
निर्वाचन आयोग के व्यवहार पर भड़कीं शैलजा
मीडिया से बात करते हुए शैलजा ने कहा हम एक ज्ञापन देने गए थे लेकिन हमें अन्दर जाने से रोक दिया गया, वहां बहुत फ़ोर्स था गेट पर बड़ा सा ताला लगा था, हमने कहा कि आप लोग हमें जानते हो हम यहाँ एक ज्ञापन देने आये हैं तो रोका क्यों जा रहा है जब वे नहीं माने तो हम वहीं धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करने पर मजबूर हुए।
शैलजा ने बताया कि हमारे विरोध करने पर एक अधिकारी आये और कहने लगे गेट के बाहर से ही दे दो लेकिन हम नहीं माने तो उन्होंने अन्दर जाकर आदेश लिया फिर हमसे गेट खोलकर ज्ञापन लिया, शैलजा ने कहा ये बहुत दुखद है कि चुनाव आयोग को हमसे खतरा लगा और हमें रोक दिया।
कांग्रेस ने SIR में धांधली के लगाये आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में हो रही एसआईआर में धांधली हो रही है, SIR के नाम पर योग्य मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं और इन गलत कामों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। दुख की बात यह है कि चुनाव आयोग अपने अधिकार का इस्तेमाल करने और सरकार की गलत नीतियों से ऊपर उठकर खड़े होने में नाकाम रहा है।
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा लोकतंत्र में चुनाव आयोग से निष्पक्षता और पारदर्शिता की उम्मीद रखी जाती है लेकिन जैसे महाराष्ट्र और बिहार सहित कई राज्यों में BJP ने ‘वोट चोरी’ कर सत्ता हासिल की, वैसा ही वो उत्तराखंड में भी करना चाहती है। ऐसे में हम सभी SIR के नाम पर हो रही धांधली को चुनाव आयोग के संज्ञान में लाना चाहते थे, लेकिन हमें मिलने का समय नहीं दिया गया।
SIR को BJP द्वारा कांग्रेस के वोटरों को काटने की साजिश कहा
उन्होंने कहा हालात इतने बुरे हैं कि उत्तराखंड में हजारों नाम वोटर लिस्ट से निरस्त करने का आवेदन दिया जा रहा है और चुनाव आयोग उस पर संज्ञान ले रहा है। वहीं, नाम काटने का आवेदन देने वाले शिकायतकर्ताओं को इस बारे में कोई जानकारी ही नहीं है। इससे साफ होता है कि ये BJP के द्वारा कांग्रेस के वोटरों को काटने की एक साजिश है। हम BJP को साफ संदेश देना चाहते हैं कि उत्तराखंड में कांग्रेस मजबूत है। हम सभी मिलकर उनका सामना करेंगे।
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सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर भारत में इंतजार अब लंबा होता जा रहा है। देश में पहली बार इस सेवा के लिए लाइसेंस जारी होने के चार साल से ज्यादा समय बाद भी व्यावसायिक शुरुआत नहीं हो पाई है। सरकारी अधिकारियों और उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह विदेशी उपग्रह कंपनियों के नेटवर्क को लेकर सुरक्षा और नियंत्रण से जुड़ी चिंताएं हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, सरकार को आशंका है कि विदेशी उपग्रह कंपनियां भारतीय प्रवेश केंद्रों को दरकिनार करके इंटरनेट यातायात को दूसरे देशों में मौजूद केंद्रों के जरिये भेज सकती हैं। हालांकि कंपनियों का कहना है कि उनके पास ऐसी तकनीक मौजूद है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि भारत के प्रवेश केंद्रों को दरकिनार न किया जाए। कंपनियों ने सुरक्षा से जुड़े परीक्षण भी पूरे किए हैं और भारतीय नियमों के मुताबिक अपनी व्यवस्था में बदलाव करने के साथ अनुपालन का भरोसा भी दिया है।
इसके बावजूद पिछले कुछ महीनों से दूरसंचार विभाग की ओर से मंजूरी की स्थिति, अतिरिक्त जानकारी या स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इस कारण सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही कंपनियों का इंतजार बढ़ता जा रहा है।
बता दें कि एलन मस्क की स्टारलिंक, भारती समूह समर्थित यूटेलसैट वनवेब और जियो प्लेटफॉर्म्स की पूर्ण स्वामित्व वाली जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस इस क्षेत्र में प्रमुख कंपनियां हैं। जेफ बेजोस की कंपनी अमेजन लियो भी भारत में सेवा शुरू करने के लिए लाइसेंस की दौड़ में है।
यूटेलसैट वनवेब इंडिया को अप्रैल 2022 में वैश्विक मोबाइल व्यक्तिगत संचार उपग्रह लाइसेंस मिला था। इसके बाद अक्टूबर 2022 में जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस और जून 2025 में स्टारलिंक को लाइसेंस मिला। यूटेलसैट और वनवेब का 2023 में विलय हो चुका है। इस संयुक्त कंपनी में भारती समूह के साथ फ्रांस और ब्रिटेन की सरकारों समेत कई अन्य निवेशकों की हिस्सेदारी है।
गौरतलब है कि सरकार की चिंता सिर्फ लाइसेंस देने तक सीमित नहीं है। अधिकारियों के बीच हुई चर्चा में यह सवाल भी उठा है कि विदेशी कंपनियों के उपग्रह नेटवर्क पर भारत का कितना नियंत्रण रहेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने हुई एक प्रस्तुति के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने कथित तौर पर कहा कि जब तक भारत के पास इन प्रणालियों पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं हो, तब तक मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए।
इस चिंता को स्टारलिंक के ईरान युद्ध के दौरान अनुभव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे हालात में किसी विदेशी कंपनी के नियंत्रण वाले उपग्रह नेटवर्क को सीमित करना सरकारों के लिए कितना मुश्किल हो सकता है, इस पर दुनिया भर में चर्चा हुई है।
दूसरी तरफ जियो भारत के लिए अपनी अलग निम्न कक्षा वाली उपग्रह प्रणाली तैयार कर रही है। कंपनी करीब 1,600 उपग्रहों का नेटवर्क बनाने की योजना पर काम कर रही है और इसके लिए भारतीय अंतरिक्ष नियामक संस्था तथा दूरसंचार विभाग से मदद मांग रही है। जियो को अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ से आवृत्ति और कक्षा से जुड़े अधिकारों के समन्वय की भी जरूरत होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक इस व्यवस्था को पूरी तरह तैयार होने में करीब तीन साल लग सकते हैं।
सरकार विदेशी और भारतीय उपग्रह कंपनियों के बीच समान समन्वय अधिकार देने की व्यवस्था पर भी विचार कर रही है, ताकि भारतीय कंपनियों पर पहले से दर्ज विदेशी उपग्रह प्रणालियों की हर स्थिति में सुरक्षा की कानूनी जिम्मेदारी न आ जाए।
हालांकि इस देरी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट शुरू होने से दूरदराज के इलाकों में तेज इंटरनेट पहुंचाने के साथ उन सेवाओं को भी बढ़ावा मिल सकता है, जिनमें मोबाइल फोन सीधे उपग्रह से जुड़ सकते हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे देशों में ऐसी सेवाएं पहले से उपलब्ध हैं।
ब्रिटेन के संचार नियामक कार्यालय के डेविड विल्स के मुताबिक भारत जैसे देशों को सुरक्षा और उपभोक्ता सुविधा के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। ब्रिटेन में निम्न कक्षा वाले उपग्रहों के जरिये एक लाख से ज्यादा ब्रॉडबैंड कनेक्शन मौजूद हैं। हालांकि सरकार की प्राथमिकता फिलहाल सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का जोखिम न लेने की है। ऐसे में स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो जैसी कंपनियों को भारत में सेवा शुरू करने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है और अंतिम फैसला सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की संतुष्टि के बाद ही होने की उम्मीद है।
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