जापान की टेक्नोलॉजी जापान ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर ऐसा दांव लगाया है जो चीन को हिलाकर रख सकता है। दरअसल चीन अगर किसी देश से डरता है तो वह देश जापान है। रूस में तैनात चीन के एक राजदूत ने कहा है कि जापान के पास 5500 परमाणु हथियार बनाने लायक प्लूटोनियम है। आपको बता दें कि अंतरराष्ट्रीय संधि की वजह से जापान ने अभी तक परमाणु हथियार नहीं बनाए हैं। लेकिन जापान के पास ऐसी टेक्नोलॉजी और वेपन ग्रेड प्लूटोनियम है जिसकी मदद से जापान चाहे तो सिर्फ 6 महीने में न्यूक्लियर वॉर हेड्स बना सकता है। इसीलिए चीन बार-बार भारत को चेतावनी देता है कि जापान से दूर रहो। लेकिन एक तरफ जापान के रक्षा मंत्री भारत के दौरे पर आ गए तो दूसरी तरफ जापान के 200 से ज्यादा लोग सीएम योगी से मिलने पहुंच गए।
जापान सीएम योगी के साथ मिलकर बहुत बड़ी प्लानिंग कर रहा है। जापान सीएम योगी के साथ मिलकर भविष्य की तैयारी में लग गया है। सीएम योगी और जापान के ताकतवर नेता और बिजनेसमैन लगातार मिल रहे हैं। कुछ समय पहले सीएम योगी जापान गए थे और अब पहली बार जापान का 200 से भी ज्यादा लोगों वाला एक डेलीगेशन सीएम योगी से मिलने आया है। जापान के इस सबसे बड़े डेलीगेशन में बड़े-बड़े सीईओस और बिजनेसमैन शामिल हैं। आपको बता दें कि जापान ऐसा देश है जो किसी के साथ डील करने से पहले पूरा सर्वे करता है। पुष्टि करता है और उसी के बाद कोई कदम उठाता है। इसी कड़ी में अब जापान के बड़े-बड़े उद्योगपति, सीएम योगी और उत्तर प्रदेश पर दांव लगा रहे हैं। हाल ही में जापान ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया जिसके तहत जापान अब दूसरे देशों को हथियार सप्लाई कर सकता है। यह जापान की डिफेंस पॉलिसी में एक बहुत बड़ा बदलाव था क्योंकि जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से ही हथियार एक्सपोर्ट करने बंद कर दिए थे। लेकिन अब जापान अपने मिसाइल, फाइटर जेट्स और वॉरशिप्स जैसे हथियार मित्र देशों को एक्सपोर्ट करना चाहता है। इनमें भारत भी शामिल है। इसी कड़ी में जापान उत्तर प्रदेश में एक बड़ा डिफेंस कॉरिडोर बना सकता है।
आपको बता दें कि जापान के डेलीगेशन और उत्तर प्रदेश की सरकार के बीच जो बातचीत चल रही है, उसमें यह निकल कर आया है कि जापान उत्तर प्रदेश में डिफेंस, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रोबोटिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स में भारी निवेश की योजना बना रहा है। सोचिए अगर जापान ने उत्तर प्रदेश में हथियार बनाने शुरू कर दिए तो यह कितनी बड़ी जिओपॉलिटिकल घटना होगी। चीन कभी नहीं चाहता कि जापान ऐसा करे। लेकिन जापान उत्तर प्रदेश में इसकी प्लानिंग कर रहा है। आपको बता दें कि जापान ने उत्तर प्रदेश को चुनने से पहले पूरी रिसर्च की है। जापान ने देखा कि उत्तर प्रदेश के कई इलाके दिल्ली एनसीआर के डोर स्टेप पर हैं। आने जाने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे है। कारगो के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। बड़े पैमाने पर काम करने के लिए वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भी है।
इसके अलावा जापान देख चुका है कि उत्तर प्रदेश में ब्रह्मोस मिसाइलें बन रही हैं। AK-203 जैसी खतरनाक असॉल्ट राइफल्स बन रही हैं। इजराइल भी लगातार सीएम योगी से मिलता रहता है। ऐसे में जापान सीएम योगी और उत्तर प्रदेश पर दांव लगा रहा है। सीएम योगी अगर उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत नहीं करते तो दुनिया के देश उनके पास नहीं आते। खबर है कि जापान उत्तर प्रदेश में 3191 करोड़ का निवेश कर सकता है। जिससे उत्तर प्रदेश में 10,000 से भी ज्यादा नौकरियां पैदा होंगी और उत्तर प्रदेश ग्लोबल स्टेज पर आ जाएगा।
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भारत का रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायु सेना (IAF) सितंबर-अक्टूबर 2026 में Su-30MKI फाइटर एयरक्राफ्ट से स्वदेशी PGB-500 प्रिसिजन-गाइडेड बम का फ्लाइट टेस्ट करने वाले हैं। 500 किलोग्राम के वॉरहेड से लैस यह बम मजबूत बंकरों, कमांड सेंटरों और रणनीतिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है। ट्रायल के दौरान, एयरक्राफ्ट पर बम को ले जाने, एरोडायनामिक बैलेंस और सुरक्षित तरीके से बम गिराने जैसी बातों की जांच की जाएगी। इसके गाइडेंस सिस्टम में GPS/INS के साथ-साथ सटीक टारगेट पर निशाना लगाने की क्षमता भी शामिल होने की उम्मीद है। PGB-500 देश में बने सटीक निशाना लगाने वाले बमों की श्रेणी का हिस्सा है। यह भारी श्रेणी का हथियार है जो बहुत सटीकता के साथ मजबूत टारगेट को भेदने में सक्षम है। सफल ट्रायल के बाद, इसे सशस्त्र बलों में शामिल किया जाएगा।
पड़ोसी देशों में छिपे आतंकवादियों की रातों की नींद उड़ गई है
पाकिस्तान, बांग्लादेश या म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों में छिपे आतंकवादियों के बंकर या ज़मीन के नीचे बने ठिकानों को अब पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाएगा। Su-30MKI में पहले से ही ब्रह्मोस, अस्त्र और रुद्रम जैसे हथियार लगे हैं; इस बम के जुड़ने से विमान की हमला करने की क्षमता और बढ़ जाएगी। सफल परीक्षणों के बाद इसे सशस्त्र बलों में शामिल किया जाएगा।
एयरक्राफ्ट के पाइलन पर बम लगाए जाएंगे
शुरुआत में एक कैरिज टेस्ट किया जाएगा जिसमें बम को एयरक्राफ्ट के पाइलन पर लगाया जाएगा; इससे एरोडायनामिक लोड, ड्रैग और हैंडलिंग की विशेषताओं का पता चलेगा। इसके बाद, एक रिलीज़ टेस्ट में सुरक्षित अलग होने, नेविगेशन बैलेंस और गाइडेंस की सटीकता की जांच की जाएगी। ये टेस्ट DRDO और IAF की संयुक्त कोशिशों से किए जाएंगे। सफल टेस्टिंग के बाद ऑपरेशनल मूल्यांकन किया जाएगा। Su-30MKI जैसे मल्टी-रोल प्लेटफॉर्म पर, यह हथियार नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर में बहुत असरदार साबित होगा।
स्वदेशीकरण और रणनीतिक फ़ायदा
यह प्रोजेक्ट 'मेक इन इंडिया' पहल का हिस्सा है। DRDO, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और प्राइवेट इंडस्ट्रीज़ के साथ मिलकर काम कर रहा है। घरेलू उत्पादन से सप्लाई चेन मज़बूत होगी और लागत कम होगी। इससे भारत की सटीक हमला करने की क्षमता बढ़ेगी, जिससे सीमा सुरक्षा और रणनीतिक क्षमताएँ मज़बूत होंगी। अन्य स्वदेशी हथियारों के साथ-साथ, इससे वायु सेना और भी ज़्यादा सक्षम बनेगी। सफल परीक्षण के बाद सेना में शामिल करने और बड़े पैमाने पर उत्पादन की प्रक्रिया शुरू होगी। यह भारत की रक्षा औद्योगिक क्षमता की परिपक्वता को दर्शाता है। क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच स्वदेशी हथियारों का विकास अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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