भारत के पैसेंजर इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में दूसरी तिमाही में 102 प्रतिशत की जोरदार तेजी
नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। भारत के इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल (ईपीवी) बाजार में 2026 की दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 102 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि पैसेंजर व्हीकल (पीवी) बाजार की कुल 26 प्रतिशत वृद्धि से काफी अधिक थी। यह जानकारी गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
साइबरमीडिया रिसर्च (सीएमआर) की रिपोर्ट के अनुसार, इस तेज वृद्धि की वजह इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते विकल्प, वाहनों की बेहतर उपलब्धता और कुल स्वामित्व लागत का आकर्षक होना है।
फर्म ने अनुमान जताया है कि 2026 के अंत तक भारत के पीवी बाजार में ईवी की हिस्सेदारी 7-8 प्रतिशत हो जाएगी, जबकि कनेक्टेड वाहनों की बाजार हिस्सेदारी 40-45 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।
सीएमआर के स्मार्ट मोबिलिटी प्रैक्टिस के सीनियर एनालिस्ट अमित शर्मा ने कहा, भारत का पैसेंजर व्हीकल बाजार 2026 की दूसरी छमाही में स्थिर वृद्धि के लिए तैयार है। इसे त्योहारी सीजन, नए मॉडलों की मजबूत लॉन्च पाइपलाइन और एसयूवी एवं फीचर से भरपूर वाहनों की लगातार मांग से समर्थन मिलेगा।
ऑटो कंपनियों की ओर से नए मॉडल लॉन्च किए जाने से ग्राहकों के पास विकल्प बढ़े हैं। वहीं, पेट्रोल की ऊंची कीमतों ने ईवी के कम रनिंग कॉस्ट के फायदे को और बढ़ा दिया है। इन कारकों के चलते कई आईसीई (इंटरनल कम्बशन इंजन) वाहन खरीदार इलेक्ट्रिक सेगमेंट की ओर आकर्षित हुए।
सीएमआर की स्मार्ट मोबिलिटी प्रैक्टिस की सीनियर एनालिस्ट शिप्रा सिन्हा ने कहा, इलेक्ट्रिफिकेशन, सुरक्षा और डिजिटलीकरण तेजी से ऐसे फीचर्स से बदलकर मुख्यधारा की ग्रोथ के प्रमुख कारक बन रहे हैं, जो पहले सीमित स्तर पर इस्तेमाल होते थे। कनेक्टेड वाहन इस बदलाव का नेतृत्व कर रहे हैं।
सिन्हा ने कहा कि एसयूवी ने 58 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ मजबूत बढ़त बनाए रखी। इसमें सालाना आधार पर 33 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसकी प्रमुख वजह बेहतर ग्राउंड क्लीयरेंस, आकर्षक रोड प्रेजेंस और एसयूवी मॉडलों में एडवांस टेक्नोलॉजी तथा सुरक्षा सुविधाओं का अधिक होना रहा।
कनेक्टेड पैसेंजर व्हीकल्स में सालाना आधार पर 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इनकी बाजार पहुंच 34 प्रतिशत से बढ़कर 43 प्रतिशत हो गई। इसकी वजह ओटीए (ओवर-द-एयर) अपडेट, ईवी सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन और रियल-टाइम सुरक्षा एवं डायग्नोस्टिक्स के लिए 4जी/5जी इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार रहा।
डिजिटल क्लस्टर वाले पैसेंजर व्हीकल्स में सालाना आधार पर 63 प्रतिशत की वृद्धि हुई और इनकी हिस्सेदारी 35 प्रतिशत से बढ़कर 46 प्रतिशत हो गई। ऑटो कंपनियों ने इस फीचर को बड़े पैमाने पर बिकने वाले मॉडल्स और ईवी में शामिल किया है।
डिजिटल कॉकपिट वाले पैसेंजर व्हीकल्स में सालाना आधार पर 58 प्रतिशत की वृद्धि हुई और इनकी हिस्सेदारी बढ़कर 38 प्रतिशत हो गई। प्रीमियम और कनेक्टेड इन-केबिन अनुभवों की बढ़ती मांग, बड़े टचस्क्रीन और इंटीग्रेटेड इंफोटेनमेंट सिस्टम के बढ़ते इस्तेमाल ने इसमें योगदान दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, टचस्क्रीन डिस्प्ले वाले वाहनों में सालाना आधार पर 45 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि एडीएएस (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) से लैस वाहनों में 57 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। एडीएएस से लैस वाहनों में लेवल-2 सिस्टम की हिस्सेदारी 88 प्रतिशत रही।
भारत का पीवी बाजार अभी भी मुख्य रूप से किफायती कीमतों पर केंद्रित है। बाजार की कुल बिक्री में 98 प्रतिशत हिस्सेदारी 30 लाख रुपए से कम कीमत वाले वाहनों की रही।
--आईएएनएस
एबीएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत में त्योहारी सीजन में भर्ती में 15-20 प्रतिशत उछाल की उम्मीद, 2.5 लाख तक अस्थायी रोजगार सृजित होने की संभावना: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। भारत में त्योहारी सीजन के दौरान भर्ती में 2026 की दूसरी छमाही में 15-20 प्रतिशत तक वृद्धि होने की संभावना है, जिसके परिणामस्वरूप करीब 2-2.5 लाख तक अस्थायी, संविदा और गिग आधारित रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं। गुरुवार को जारी भर्ती समाधान तथा वर्कफोर्स मैनेजमेंट कंपनी एनएलबी सर्विसेज की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
एनएलबी सर्विसेज की रिपोर्ट के अनुसार, ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, खुदरा व्यापार, लॉजिस्टिक्स, हॉस्पिटैलिटी, ट्रैवल और उपभोक्ता सेवाओं जैसे क्षेत्रों में सबसे अधिक भर्ती होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि इस वर्ष केवल भर्ती संख्या नहीं बढ़ रही है, बल्कि कंपनियों की भर्ती रणनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जहां पहले कंपनियां त्योहारी मांग बढ़ने पर अंतिम समय में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की भर्ती करती थीं, वहीं अब वे अधिक सुनियोजित तरीके से कार्यबल की तैयारी कर रही हैं। कई कंपनियां अब त्योहारी सीजन शुरू होने से 12 से 14 सप्ताह पहले ही भर्ती प्रक्रिया शुरू कर रही हैं ताकि संचालन संबंधी चुनौतियों से बचा जा सके।
एनएलबी सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और एशिया-प्रशांत क्षेत्र (एपीएसी) प्रमुख वरुण सचदेवा ने कहा कि अब त्योहारी सीजन भारत के श्रम बाजार के लिए एक तरह की वास्तविक परीक्षा बन चुका है और इससे नियोक्ताओं के व्यवहार में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा, नियोक्ता पहले से अधिक तेजी से भर्ती कर रहे हैं, पारंपरिक प्रतिभा केंद्रों से आगे बढ़कर नए क्षेत्रों में प्रतिभा तलाश रहे हैं और प्रौद्योगिकी आधारित, लचीले तथा तुरंत काम के लिए तैयार कर्मचारियों पर अधिक भरोसा कर रहे हैं।
सचदेवा के अनुसार, जो कभी केवल मौसमी जरूरतों को पूरा करने का उपाय माना जाता था, वह अब कंपनियों के लिए नई प्रतिभाओं की पहचान करने और भविष्य के स्थायी कर्मचारियों का आधार तैयार करने का रणनीतिक अवसर बन गया है। उनका मानना है कि त्योहारी भर्ती का प्रभाव अब केवल त्योहारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लंबे समय के रोजगार अवसरों में भी बदल सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पारंपरिक रूप से डिलीवरी, गोदाम प्रबंधन, फील्ड संचालन और आतिथ्य क्षेत्र भर्ती के प्रमुख स्रोत बने रहेंगे। हालांकि तकनीक आधारित उपभोक्ता अर्थव्यवस्था के विस्तार के कारण कई नई भूमिकाओं की मांग भी तेजी से बढ़ रही है, जिनमें डार्क स्टोर इन्वेंट्री नियंत्रक, रिटर्न और रिफंड विशेषज्ञ, ग्राहक समाधान अधिकारी, मार्केटप्लेस संचालन विशेषज्ञ, धोखाधड़ी एवं लेनदेन सहायता कर्मी, कैटलॉग प्रबंधन अधिकारी और ऑर्डर प्रबंधन विशेषज्ञ जैसी नौकरियां शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव दर्शाता है कि भारत की उपभोक्ता अर्थव्यवस्था में प्रौद्योगिकी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। जो नौकरियां पहले केवल परिचालन आधारित मानी जाती थीं, वे अब डेटा, स्वचालन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और वास्तविक समय के निर्णयों पर अधिक निर्भर हो गई हैं।
एक और महत्वपूर्ण रुझान यह है कि त्योहारी भर्ती अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही। दूसरे और तीसरे श्रेणी के शहरों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुल त्योहारी भर्ती मांग का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा ऐसे शहरों से आने की संभावना है और इन बाजारों में भर्ती 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
जयपुर, लखनऊ, इंदौर, सूरत, नागपुर, भुवनेश्वर, कोयंबटूर, चंडीगढ़ और कोच्चि जैसे शहरों में रोजगार अवसर अधिक तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, संगठित खुदरा व्यापार और क्षेत्रीय वितरण नेटवर्क के विस्तार से इन शहरों में भर्ती गतिविधियों को बल मिल रहा है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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