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Explainer: वंदे मातरम पर खुलकर आमने-सामने आई कांग्रेस-BJP, अगले साल 7 राज्यों के चुनावों पर क्या पड़ेगा असर?

Vande Mataram Controversy: देश में अगले साल 7 राज्यों में विधान सभा चुनाव हैं. कुछ ही महीनों बाद चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. इससे पहले देश में वंदे मातरम को लेकर फिर विवाद शुरू हो गया है. बीजेपी ने संसद के जरिए वंदे मातरम के पूरे बोल को राष्ट्रगीत घोषित कराया. साथ ही राष्ट्रगान के बराबर दर्जा दिलााया. वहीं कांग्रेस ने पुराने नियम यानी वंदे मातरम के 2 छंद गाने का ही फैसला लिया. कांग्रेस के इस फैसले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कांग्रेस के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे देश विरोधी बताया है. अब वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और बीजेपी खुलकर आमने सामने आ गए हैं. अब सवाल उठता है कि इस विवाद से अगले साल होने वाले 7 राज्यों के चुनाव पर क्या फर्क पड़ेगा.

वंदे मातरम को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में लिए गए फैसले के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला बोला है. अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कांग्रेस के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे देश विरोधी बताया है. दरअसल, दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हुई थी. बैठक में वंदे मातरम को लेकर चर्चा हुई और कांग्रेस ने तय किया कि कार्यक्रमों में इसके दो छंद गाए जाएंगे. कांग्रेस के इस फैसले के सामने आने के बाद बीजेपी नेताओं ने पार्टी को घेरना शुरू कर दिया.

बीजेपी नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस ने राष्ट्र से जुड़े इस महत्वपूर्ण गीत को लेकर ऐसा फैसला किया है, जो उचित नहीं है. इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित शाह ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि पार्टी ने देश विरोधी फैसला लिया है. वंदे मातरम को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच शुरू हुई यह बहस अब राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है. दोनों दलों के नेताओं की ओर से बयानबाजी के बीच आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और बढ़ने के आसार हैं.

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कांग्रेस ने साफ किया रुख, 1937 के फैसले का दिया हवाला

वंदे मातरम को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस ने अपने रुख को स्पष्ट किया है. बुधवार को दिल्ली में हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई. बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी के रुख में किसी तरह का भ्रम नहीं है. वेणुगोपाल ने कहा था  कि कांग्रेस 1937 में महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे उस समय के शीर्ष नेताओं द्वारा लिए गए फैसलों को ही मानेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी इस मामले में पूरी तरह स्पष्ट है और कांग्रेस कार्यकर्ता भी उसी फैसले के अनुसार आगे बढ़ेंगे.

कांग्रेस महासचिव ने यह भी कहा कि CWC की बैठक में वंदे मातरम के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई और इसके बाद पार्टी ने अपना रुख तय किया. उनके मुताबिक, कांग्रेस के लिए 1937 में लिया गया फैसला ही इस मामले में आधार रहेगा. CWC बैठक के बाद कांग्रेस के इस रुख को लेकर बीजेपी ने सवाल उठाए हैं. वंदे मातरम को लेकर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है.

वंदे मातरम पर संसद ने कानून में किया बदलाव

राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर केंद्र सरकार ने कानूनी संरक्षण बढ़ा दिया है. संसद से पारित ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ के बाद अब वंदे मातरम के अपमान या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने पर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है. 

नए प्रावधान के तहत राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की तरह कानूनी सुरक्षा दी गई है. इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति जानबूझकर वंदे मातरम के गायन को रोकता है, उसमें बाधा डालता है या उसका अपमान करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. संशोधित कानून के मुताबिक, ऐसे मामले में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को अधिकतम तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है. यह प्रावधान राष्ट्रगान के अपमान से जुड़े नियमों के समान रखा गया है.

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पुराने कानून में किया गया बदलाव

इस बदलाव के लिए ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ की धारा 3 में संशोधन किया गया है. इसके जरिए राष्ट्रीय गीत के सम्मान और उसके सार्वजनिक गायन को कानूनी संरक्षण के दायरे में लाया गया है. इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों से जुलाई 2026 में मंजूरी मिली. राज्यसभा ने इसे 29 जुलाई को पारित किया, जबकि लोकसभा से इसे 30 जुलाई को मंजूरी मिली. इसके बाद यह कानून का हिस्सा बन गया. इस बदलाव के बाद अब वंदे मातरम के सम्मान और उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने से जुड़े मामलों में पहले की तुलना में ज्यादा स्पष्ट कानूनी कार्रवाई का रास्ता तैयार हो गया है.

2027 में 7 राज्यों में विधानसभा चुनाव 

साल 2027 भारतीय राजनीति के लिए बेहद अहम रहने वाला है. इस साल देश में राष्ट्रपति चुनाव के साथ-साथ कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है. इस दौरान उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में विधानसभा चुनाव होना प्रस्तावित हैं. इनमें उत्तर प्रदेश का चुनाव खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह देश का सबसे बड़ा राज्य है और लोकसभा की सबसे ज्यादा सीटें भी यहीं से आती हैं. वहीं गुजरात, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों के चुनाव भी राष्ट्रीय राजनीति पर असर डाल सकते हैं.

वर्तामान में सभी 7 राज्यों में क्या है स्थिति?

उत्तर प्रदेश: भारतीय जनता पार्टी (मुख्यमंत्री - योगी आदित्यनाथ)
पंजाब: आम आदमी पार्टी (मुख्यमंत्री - भगवंत मान)
उत्तराखंड: भारतीय जनता पार्टी (मुख्यमंत्री - पुष्कर सिंह धामी)
गोवा: भारतीय जनता पार्टी (मुख्यमंत्री - प्रमोद सावंत)
मणिपुर: भारतीय जनता पार्टी (मुख्यमंत्री - एन. बीरेन सिंह)
हिमाचल प्रदेश: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (मुख्यमंत्री - सुखविंदर सिंह सुक्खू)
गुजरात: भारतीय जनता पार्टी (मुख्यमंत्री - भूपेंद्र पटेल)

7 राज्यों में कांग्रेस पर क्या असर पड़ सकता है?

2027 में चुनाव वाले 7 राज्यों में वंदे मातरम विवाद से कांग्रेस को बड़ा सीधा फायदा मिलने की संभावना कम है. इसके उलट, पार्टी को राष्ट्रवाद के मुद्दे पर बीजेपी के हमले और राजनीतिक ध्रुवीकरण का सामना करना पड़ सकता है.

संभावित नुकसान

राष्ट्रवाद की छवि: बीजेपी कांग्रेस पर राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर सवाल उठा सकती है. इसका असर खासकर बहुसंख्यक वोटरों पर पड़ सकता है.

बचाव की राजनीति: कांग्रेस को 1937 के फैसले और गांधी-नेहरू की परंपरा का हवाला देकर लगातार सफाई देनी पड़ सकती है. इससे रोजगार, महंगाई और विकास जैसे मुद्दे पीछे जा सकते हैं.

यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल, गुजरात और गोवा

इन राज्यों में राष्ट्रवाद और हिंदुत्व का असर ज्यादा है. बीजेपी वंदे मातरम को चुनावी मुद्दा बनाकर कांग्रेस को घेर सकती है. कांग्रेस को कुछ अल्पसंख्यक वोटों का समर्थन मिल सकता है, लेकिन बड़ा चुनावी फायदा मिलने की संभावना कम है.

पंजाब

पंजाब में किसान, रोजगार, सिख समुदाय और क्षेत्रीय मुद्दे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। इसलिए वंदे मातरम विवाद से कांग्रेस को खास फायदा नहीं दिखता, जबकि विरोधी दल इसे उसके खिलाफ इस्तेमाल कर सकते हैं.

मणिपुर

मणिपुर में शांति, सुरक्षा और जातीय तनाव जैसे मुद्दे ज्यादा अहम हैं। ऐसे में वंदे मातरम विवाद कांग्रेस के लिए स्थानीय मुद्दों से ध्यान भटका सकता है और अलग-अलग समुदायों के बीच उसके समीकरण प्रभावित हो सकते हैं. चुनाव तक विवाद जारी रहने पर कांग्रेस के लिए यह मुद्दा फायदे से ज्यादा चुनौती बन सकता है, खासकर उन राज्यों में जहां राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पहचान मजबूत चुनावी मुद्दे हैं.

7 राज्यों में बीजेपी को कितना फायदा-नुकसान?

राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को कानूनी संरक्षण देने और इसे राष्ट्रगान के समान दर्जा देने के फैसले का 2027 में होने वाले सात राज्यों के चुनावों पर राजनीतिक असर पड़ सकता है. बीजेपी को इससे राष्ट्रवाद के मुद्दे पर फायदा मिल सकता है, लेकिन कुछ राज्यों में अल्पसंख्यक और क्षेत्रीय वोटों के बीच विरोध भी बढ़ सकता है.

बीजेपी को संभावित फायदे

राष्ट्रवादी वोट मजबूत: उत्तर प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में वंदे मातरम का मुद्दा बीजेपी के राष्ट्रवादी और हिंदुत्व समर्थक वोटरों को एकजुट कर सकता है.

विपक्ष पर हमला: बीजेपी कांग्रेस के रुख को मुद्दा बनाकर उसे राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के सवाल पर घेर सकती है.

गोवा-मणिपुर में ध्रुवीकरण: गोवा और मणिपुर में बीजेपी इसे सांस्कृतिक गौरव से जोड़कर बहुसंख्यक वोटरों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकती है.

बीजेपी को संभावित नुकसान

अल्पसंख्यक वोटों की नाराजगी: यूपी, गोवा और पंजाब जैसे राज्यों में इस मुद्दे से अल्पसंख्यक मतदाताओं में बीजेपी के खिलाफ एकजुटता बढ़ सकती है.

पंजाब में सीमित फायदा: पंजाब की राजनीति में स्थानीय, किसान और पंथिक मुद्दे ज्यादा अहम हैं. इसलिए वंदे मातरम का मुद्दा यहां बीजेपी को बड़ा चुनावी फायदा शायद न दे.

बुनियादी मुद्दों से ध्यान हटने का आरोप: विपक्ष इसे बेरोजगारी, महंगाई और विकास जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बता सकता है. अगर मतदाता इन मुद्दों को ज्यादा महत्व देते हैं तो बीजेपी को नुकसान हो सकता है.

राज्यवार असर

यूपी, गुजरात, उत्तराखंड और हिमाचल: बीजेपी को वैचारिक और राष्ट्रवादी मुद्दे पर फायदा मिलने की संभावना ज्यादा.
गोवा और मणिपुर: असर मिला-जुला रह सकता है; ध्रुवीकरण से फायदा भी और विरोध से नुकसान भी संभव.
पंजाब: चुनावी फायदा सीमित रहने की संभावना, क्योंकि यहां स्थानीय और क्षेत्रीय मुद्दे ज्यादा प्रभावी हैं.

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योगी सरकार ने पॉलीटेक्निक में प्रवेश से वंचित छात्रों को दी सौगात, ऐसे मिलेगा डिप्लोमा इंजीनियरिंग एडमिशन

UP News: अगर आपको भी उत्तर प्रदेश की संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद UPJEE (Polytechnic)-2026 की परीक्षा दी लेकिन आपको किसी भी संस्थान में एडमिशन नहीं मिल पाया तो योगी सरकार ने आपके लिए एक और मौका दिया है. दरअसल, यूपीजेईई 2026 के तहत प्रवेश से वंचित अथवा प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण न कर पाने वाले अभ्यर्थियों को यूपी सरकार एक और मौका देने जा रही है.

बता दें कि परिषद द्वारा डिप्लोमा इंजीनियरिंग एवं अन्य पाठ्यक्रमों (फार्मेसी को छोड़कर) में छठे और सातवें चरण की अतिरिक्त काउंसलिंग का आयोजन किया जाएगा. ये काउंसलिंग 21 अगस्त से शुरू होगी. ऐसे में जिन छात्रों ने अब तक एडमिशन नहीं लिया है ये वे प्रवेश से वंचित रह गए हैं तो 14 सितंबर 2026 तक अपनी काउंसलिंग करा कर एडमिशन ले सकते हैं.

25 जून को शुरू हुई थी काउंसलिंग

सचिव संजीव कुमार सिंह ने बताया कि संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद की ओर से 25 जून को काउंसलिंग शुरू की गई थी. डिप्लोमा इंजीनियरिंग एवं अन्य पाठ्यक्रमों की मुख्य एवं विशेष काउंसलिंग 14 अगस्त 2026 तक कराई गई. इसके बाद भी प्रवेश से वंचित रह गए या प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं करने वाले अभ्यर्थियों को एआईसीटीई के नए एकेडमिक कैलेंडर के मुताबिक अतिरिक्त अवसर दिया जा रहा है.

उन्होंने आगे बताया कि 21 अगस्त से 10 सितंबर 2026 तक छठे एवं सातवें चरण की अतिरिक्त ऑनलाइन काउंसलिंग कराई जाएगी. इसमें उत्तर प्रदेश एवं अन्य राज्यों के सभी नॉन-एडमिटेड (QUALIFIED) अभ्यर्थी शामिल हो सकेंगे. यह काउंसलिंग ग्रुप-A, B, C, D, F, G, H, I, K1 से K8 एवं L के लिए आयोजित की जाएगी.

छठे और सातवें चरण की अहम तारीखें जारी

जेईईसीयूपी काउंसलिंग के छठे चरण में शामिल होने वाले पात्र अभ्यर्थी 21 से 23 अगस्त तक ऑनलाइन च्वाइस फिलिंग कर सकेंगे. इसके बाद 24 अगस्त को सीट आवंटन किया जाएगा. सीट मिलने पर अभ्यर्थियों को 25 से 28 अगस्त के बीच ऑनलाइन फ्रीज विकल्प चुनने के साथ सिक्योरिटी और काउंसलिंग फीस जमा करनी होगी. इस चरण में फ्लोट का विकल्प नहीं दिया जाएगा.

छठे चरण में केवल सीट फ्रीज करने वाले अभ्यर्थियों का दस्तावेज सत्यापन किया जाएगा. यह प्रक्रिया 25 से 29 अगस्त तक जिला सहायता केंद्रों पर शाम 6 बजे तक चलेगी. आवंटित सीट से नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 30 अगस्त है, जबकि संबंधित संस्था में रिपोर्टिंग 31 अगस्त तक करनी होगी.

सातवें चरण का शेड्यूल भी जारी

सातवें चरण के लिए अभ्यर्थी 1 से 3 सितंबर तक अपनी पसंद की सीटों के लिए च्वाइस फिलिंग कर सकेंगे. सीट आवंटन 4 सितंबर को होगा. इस चरण की खास बात यह है कि सभी अभ्यर्थियों की सीट ऑटो फ्रीज मानी जाएगी.

सिक्योरिटी और काउंसलिंग फीस 5 से 7 सितंबर तक जमा की जा सकेगी. इसी अवधि में दस्तावेज सत्यापन भी शुरू होगा, जो 8 सितंबर को शाम 6 बजे तक जारी रहेगा. सातवें चरण में आवंटित सीट से नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 9 सितंबर है. चयनित अभ्यर्थियों को 10 सितंबर तक संबंधित संस्था में रिपोर्ट करना होगा.

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परिषद ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे तय तारीखों का ध्यान रखते हुए काउंसलिंग से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी करें. विस्तृत जानकारी और पूरा कार्यक्रम जेईईसीयूपी के आधिकारिक पोर्टल jeecup.admissions.nic.in पर देखा जा सकता है.

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