Milk Protein: भैंस, गाय या सोया… किस दूध में है ज्यादा प्रोटीन? कैल्शियम से भरपूर 5 विकल्पों पर डालें नजर
Highest Protein Milk: दूध को प्रोटीन, कैल्शियम और कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माना जाता है। लेकिन हर दूध का पोषण प्रोफाइल एक जैसा नहीं होता। भेड़ के दूध से लेकर सोया और बादाम मिल्क तक, हर विकल्प की अपनी खासियत है। जानें इन 6 तरह के दूध में क्या खास है और इनके क्या फायदे हो सकते हैं।
1. भैंस का दूध
गाय के दूध की तुलना में भैंस के दूध में प्रोटीन और फैट दोनों अधिक होते हैं। करीब 3.7-4.5 ग्राम प्रोटीन प्रति 100 ml मिल सकता है। इसका टेक्सचर गाढ़ा और क्रीमी है। इसी कारण इससे पनीर, दही और खोया बनाए जाते हैं। हालांकि, इसमें फैट ज्यादा होने के कारण कैलोरी भी अधिक हो सकती है।
2. गाय का दूध
गाय का दूध रोजमर्रा की डाइट में सबसे आसानी से शामिल किए जाने वाले विकल्प है। इसमें लगभग 3.2-3.5 ग्राम प्रोटीन प्रति 100 ml हो सकता है। इसमें प्रोटीन के साथ कैल्शियम जैसे पोषक तत्व भी मिलते हैं। इसे सीधे पीने के अलावा चाय, कॉफी, स्मूदी या सीरियल के साथ भी लिया जा सकता है।
3. बकरी का दूध
बकरी के दूध में करीब 3-3.5 ग्राम प्रोटीन प्रति 100 ml हो सकता है। इसका पोषण प्रोफाइल गाय के दूध के काफी करीब माना जाता है। इसमें प्रोटीन और कैल्शियम समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। कुछ लोगों को इसका स्वाद और टेक्सचर गाय के दूध से अलग लग सकता है।
4. सोया मिल्क
जो लोग डेयरी दूध नहीं लेते, उनके लिए सोया मिल्क प्रोटीन वाला प्लांट-बेस्ड विकल्प हो सकता है। इसमें करीब 3-4 ग्राम प्रोटीन प्रति 100 ml मिल सकता है। सोया प्रोटीन की खासियत यह है कि इसमें शरीर के लिए जरूरी सभी आवश्यक अमीनो एसिड पाए जाते हैं। पैक्ड सोया मिल्क खरीदते समय लेबल जरूर देखें।
5. बादाम मिल्क
बादाम मिल्क हल्का और प्लांट-बेस्ड ड्रिंक है, लेकिन प्रोटीन के मामले में यह दूसरे विकल्पों से पीछे रहता है। कई कमर्शियल बादाम मिल्क में करीब 0.5-1 ग्राम प्रोटीन प्रति 100 ml ही हो सकता है। इसका फायदा यह है कि यह डेयरी-फ्री विकल्प चाहने वालों के लिए एक विकल्प देता है।
कौन सा दूध आपके लिए बेहतर है?
दूध का चुनाव सिर्फ प्रोटीन की मात्रा देखकर नहीं करना चाहिए। आपकी डाइट, स्वाद, फैट की जरूरत, कैलोरी और एलर्जी को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
अगर ज्यादा प्रोटीन पर फोकस है तो सोया मिल्क जैसे विकल्प ध्यान में रखे जा सकते हैं। वहीं रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए गाय और भैंस का दूध ज्यादा आसानी से उपलब्ध विकल्प हैं।
(Disclaimer): यह जानकारी सामान्य पोषण संबंधी जानकारी के लिए है। किसी बीमारी, एलर्जी या विशेष डाइट की जरूरत होने पर डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन की सलाह लें।
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Malai Ghevar Recipe: सावन और त्योहारों के मौसम में घेवर का स्वाद हर किसी को पसंद आता है। खासतौर पर जब कुरकुरे घेवर के ऊपर मलाईदार रबड़ी, बादाम, पिस्ता और केसर की टॉपिंग हो, तो मिठाई का स्वाद और भी खास हो जाता है। अगर आप इस सावन घर पर राजस्थानी स्टाइल मलाई घेवर बनाना चाहते हैं, तो यहां जानें इसे बनाने की आसान रेसिपी।
मलाई घेवर बनाने के लिए सामग्री
- घेवर के लिए
- 2 कप मैदा
- 1/2 कप घी
- 1/2 कप दूध
- 4-5 कप बर्फ का ठंडा पानी
- 2-3 चम्मच नींबू का रस
- तलने के लिए घी या तेल
- चाशनी के लिए
- 1½ कप चीनी
- 1 कप पानी
- 1/2 चम्मच इलायची पाउडर
- 1 चुटकी केसर
मलाई टॉपिंग के लिए
- 1 कप रबड़ी
- 2 बड़े चम्मच कंडेंस्ड मिल्क
- 2 बड़े चम्मच कटे बादाम
- 2 बड़े चम्मच कटे पिस्ता
- सजाने के लिए गुलाब की पंखुड़ियां
- 1 चुटकी केसर
ऐसे बनाएं राजस्थानी मलाई घेवर
1.घेवर का बैटर तैयार करें
एक बड़े बर्तन में घी और बर्फ डालकर अच्छी तरह फेंटें। अब इसमें मैदा डालकर मिलाएं। इसके बाद धीरे-धीरे दूध और बर्फ का ठंडा पानी डालते हुए पतला बैटर तैयार करें। बैटर को इतना पतला रखें कि वह आसानी से बह सके। आखिर में नींबू का रस डालकर अच्छी तरह मिला लें।
2. घेवर को कुरकुरा होने तक तलें
एक गहरी और चौड़ी कड़ाही में घी या तेल गर्म करें। तेल अच्छी तरह गर्म होने के बाद घेवर का बैटर पतली धार में कड़ाही के बीच में डालें। बैटर डालते ही उसमें छेद बनने लगेंगे। कुछ देर रुककर फिर थोड़ा बैटर डालें। इसी तरह धीरे-धीरे लेयर बनाते जाएं। जब घेवर सुनहरा और कुरकुरा हो जाए तो उसे सावधानी से निकालकर अतिरिक्त तेल निकलने दें।
3. एक तार की चाशनी तैयार करें
एक पैन में चीनी और पानी डालकर उबालें। इसे करीब एक तार की चाशनी तक पकाएं। अब इसमें इलायची पाउडर और केसर डालकर मिला दें।
4. घेवर पर चाशनी लगाएं
तैयार घेवर को हल्की गर्म चाशनी में करीब 1-2 मिनट के लिए डुबोएं। इसके बाद उसे निकालकर प्लेट या जाली पर रखें, ताकि अतिरिक्त चाशनी निकल जाए।
5. रबड़ी और ड्राई फ्रूट्स से सजाएं
जब घेवर अच्छी तरह ठंडा हो जाए, तब उसके ऊपर रबड़ी की मोटी परत लगाएं। इसके ऊपर कंडेंस्ड मिल्क, कटे बादाम, पिस्ता और केसर डालें। आखिर में गुलाब की पंखुड़ियों से सजाकर इसे कुछ देर ठंडा करें। राजस्थानी मलाई घेवर तैयार है।
मलाई घेवर को स्वादिष्ट बनाने की टिप
घेवर का बैटर जितना पतला और ठंडा होगा, घेवर में उतने ही अच्छे छेद और कुरकुरापन आने में मदद मिलेगी। मलाई लगाने के बाद इसे कुछ देर ठंडा करने से स्वाद और टेक्सचर बेहतर हो सकता है।
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