भैंस के मांस से भारत की कमाई $5 अरब पार: 2027 में $6 अरब की उम्मीद; जाने 5 साल में कितना बढ़ा एक्सपोर्ट?
India Buffalo Meat Export 2025-26 Revenue: भारत के भैंस के मांस का निर्यात में तेजी से बढ़ रहा है। 2025-26 में पहली बार इसका एक्सपोर्ट 5.1 अरब डॉलर के पार पहुंच गया। यह पिछले साल के मुकाबले 25.6% ज्यादा है। निर्यात की रफ्तार इस साल भी तेज बनी हुई है। अप्रैल-जून 2026 में भारत ने करीब 1.5 अरब डॉलर का भैंस का मांस विदेश भेजा। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 896.8 मिलियन डॉलर था। यानी एक साल में एक्सपोर्ट 66.6% बढ़ गया।
सरकार का अनुमान है कि अगर यह रफ्तार जारी रही तो 2026-27 में भारत का भैंस के मांस का निर्यात 6 अरब डॉलर से भी ज्यादा हो सकता है। जानिए पिछले 5 साल में कितना बढ़ा भैंस के मांस का एक्सपोर्ट, इससे किसानों और डेयरी कारोबार को क्या फायदा हुआ और विदेशों में इसकी डिमांड बढ़ने की वजह क्या है?
5 साल में 2.45 लाख टन बढ़ा एक्सपोर्ट
पिछले पांच साल में भारत के भैंस के मांस के निर्यात की मात्रा में भी बढ़ोतरी हुई है। 2021-22 में भारत ने करीब 11.75 लाख टन भैंस का मांस निर्यात किया था। 2022-23 में यह लगभग 11.76 लाख टन रहा। इसके बाद 2023-24 में निर्यात बढ़कर 12.95 लाख टन पहुंच गया, हालांकि 2024-25 में इसमें थोड़ी गिरावट के साथ यह 12.55 लाख टन रहा। 2025-26 में फिर तेज उछाल आया और निर्यात 14.20 लाख टन तक पहुंच गया। यानी पांच साल में भारत के भैंस के मांस के निर्यात की मात्रा करीब 2.45 लाख टन बढ़ी है, जो बताता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय भैंस के मांस की मांग लगातार मजबूत हो रही है।
5 साल में 1.80 अरब डॉलर बढ़ी कमाई
पिछले पांच साल में भैंस के मांस के निर्यात से होने वाली कमाई लगातार बढ़ी है। 2021-22 में यह करीब 3.30 अरब डॉलर थी, जो 2022-23 में मामूली घटकर 3.19 अरब डॉलर रही। इसके बाद 2023-24 में कमाई बढ़कर 3.74 अरब डॉलर, 2024-25 में 4.06 अरब डॉलर और 2025-26 में रिकॉर्ड 5.10 अरब डॉलर पहुंच गई। यानी पांच साल में एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई करीब 1.80 अरब डॉलर बढ़ी है।
प्रति टन भी बढ़ी कमाई
इस कारोबार की खास बात सिर्फ निर्यात बढ़ना नहीं है। भारत को अब एक टन भैंस के मांस के लिए पहले से ज्यादा कीमत भी मिल रही है। 2024-25 में एक टन की औसत कीमत 3,236 डॉलर थी। 2025-26 में यह बढ़कर 3,591 डॉलर हो गई। वहीं अप्रैल-जून 2026 में यह करीब 4,392 डॉलर प्रति टन पहुंच गई। इससे पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय भैंस के मांस की मांग बढ़ रही है।
कई देशों में बढ़ी मांग
भारतीय भैंस का मांस अब सिर्फ कुछ देशों तक सीमित नहीं है। वियतनाम, मिस्र, मलेशिया, UAE और सऊदी अरब इसके बड़े खरीदार हैं। इसके अलावा उज्बेकिस्तान, रूस, ओमान और जॉर्जिया जैसे बाजारों में भी इसकी मांग बढ़ रही है। यानी भारत अब ज्यादा देशों को मांस बेच रहा है और किसी एक बाजार पर उसकी निर्भरता भी कम हो रही है।
बर्गर से नगेट्स तक में होता है इस्तेमाल
भारतीय भैंस के मांस का इस्तेमाल कई तरह के प्रोसेस्ड फूड में होता है। इससे बर्गर पैटी, सॉसेज, नगेट्स और रेडी-टू-ईट फूड बनाए जाते हैं। अब निर्यातक बड़े 20-30 किलो के पैकेट के साथ-साथ 1 किलो या उससे छोटे पैकेट में मांस बेचने पर भी जोर दे रहे हैं। इससे सीधे ग्राहकों तक पहुंचने और ज्यादा कीमत पाने में मदद मिल सकती है।
किसानों को भी फायदा
इस कारोबार का फायदा सिर्फ एक्सपोर्ट कंपनियों को नहीं मिलता। इसका सीधा संबंध डेयरी किसानों से भी है। किसान भैंस को मुख्य रूप से दूध के लिए पालते हैं। जब कोई भैंस बूढ़ी हो जाती है या बहुत कम दूध देने लगती है, तो उसे पालने का खर्च किसान के लिए बढ़ जाता है। ऐसी भैंस को बेचकर किसान को करीब 50,000 से 60,000 तक मिल सकते हैं। इस पैसे से वह नई और ज्यादा दूध देने वाली भैंस खरीद सकता है।
अगर मौजूदा रफ्तार बनी रहती है, तो भारत का भैंस के मांस का निर्यात 2026-27 में 6 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर सकता है। बढ़ती विदेशी मांग, बेहतर कीमत और नए बाजारों के कारण भैंस का मांस भारत के कृषि निर्यात में एक अहम भूमिका निभाता नजर आ रहा है।
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