टीसीपीएल को वित्त वर्ष 2026-27 में दोहरे अंक में राजस्व वृद्धि की उम्मीद
टीसीपीएल को वित्त वर्ष 2026-27 में दोहरे अंक में राजस्व वृद्धि की उम्मीदबड़ों के पैर छूना क्यों माना जाता है सम्मान की सबसे बड़ी निशानी? जानें इसका धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व
Badon ke paon chhoone ka mahatva: भारतीय संस्कृति में बड़े-बुजुर्गों और गुरुजनों के पैर छूकर आशीर्वाद लेने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसे "चरण स्पर्श" कहा जाता है, और यह सिर्फ एक औपचारिक अभिवादन नहीं, बल्कि इसे सम्मान, विनम्रता और श्रद्धा व्यक्त करने का सबसे गहरा माध्यम माना जाता है। यही कारण है कि किसी भी शुभ अवसर, त्योहार या यात्रा पर निकलने से पहले घर के बड़ों का चरण स्पर्श करना एक अनिवार्य परंपरा मानी जाती है।
पैर छूने के पीछे की धार्मिक मान्यता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, हिंदू धर्म में माता-पिता, गुरु और बड़े-बुजुर्गों को भगवान के समान पूजनीय माना जाता है। मान्यता है कि जब कोई व्यक्ति उनके चरण स्पर्श करता है, तो वह उनके भीतर मौजूद अनुभव, ज्ञान और आशीर्वाद को ग्रहण करता है। कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि बड़ों के पैरों में समस्त तीर्थों का वास माना जाता है, इसी वजह से चरण स्पर्श करने को तीर्थ यात्रा के समान पुण्यदायी बताया गया है।
ऊर्जा के आदान-प्रदान से जुड़ी है यह परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब छोटा व्यक्ति बड़े के चरण स्पर्श करता है, तो यह माना जाता है कि इससे दोनों के बीच सकारात्मक ऊर्जा का आदान-प्रदान होता है। बड़ों के आशीर्वाद से जो सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है, वह छोटों के जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता लाने में सहायक मानी जाती है। यही कारण है कि आशीर्वाद देते समय बड़े-बुजुर्ग अक्सर छोटों के सिर पर हाथ रखते हैं, जिसे ऊर्जा हस्तांतरण की प्रक्रिया माना जाता है।
चरण स्पर्श करने का सही तरीका
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, चरण स्पर्श करते समय झुककर दोनों हाथों से बड़ों के पैर छूने चाहिए और उसके बाद अपने हाथों को अपने माथे या हृदय के पास लाना चाहिए। मान्यता है कि यह क्रिया विनम्रता और श्रद्धा भाव को और गहरा करती है। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि चरण स्पर्श करते समय मन में किसी भी तरह के नकारात्मक भाव नहीं होने चाहिए।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी है इसका तर्क
धार्मिक महत्व के साथ-साथ चरण स्पर्श करने की इस परंपरा को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी समझाया जाता है। कहा जाता है कि जब व्यक्ति झुककर पैर छूता है, तो इससे शरीर में विनम्रता और सम्मान का भाव मजबूत होता है, जो मानसिक स्तर पर संबंधों को मजबूत बनाने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा यह क्रिया रीढ़ की हड्डी को झुकाने के कारण शारीरिक रूप से भी लाभकारी बताई जाती है।
किन मौकों पर विशेष रूप से निभाई जाती है यह परंपरा
हिंदू परंपरा में शादी-विवाह, त्योहार, यात्रा पर जाने से पहले, परीक्षा या किसी नए कार्य की शुरुआत से पहले बड़ों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। मान्यता है कि इससे कार्य में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
आज भी हर भारतीय परिवार में जीवित है यह परंपरा
समय के साथ भले ही जीवनशैली में कई बदलाव आए हों, लेकिन बड़ों के चरण स्पर्श करने की यह परंपरा आज भी अधिकतर भारतीय परिवारों में उतनी ही श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। यह परंपरा न सिर्फ भारतीय संस्कृति की पहचान है, बल्कि यह पीढ़ियों के बीच सम्मान और आत्मीयता बनाए रखने का भी एक अहम माध्यम मानी जाती है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है।
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