Uttarakhand: जिला चिकित्सालय चंपावत में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का हुआ लोकार्पण, CM धामी ने वर्चुअली किया संबोधित
Uttarakhand: जिला चिकित्सालय चंपावत में करीब 50 लाख रुपये की लागत से तैयार ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का गुरुवार (20 अगस्त) को लोकार्पण किया गया. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया. उन्होंने कहा कि चंपावत को आदर्श जिला बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है. स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है.
आपात स्थिति में मरीजों को मिलेगा फायदा
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि चंपावत उनके लिए सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि कर्मभूमि है. जिले में पहली बार ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की सुविधा शुरू हुई है. इससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों को जरूरत के अनुसार अलग-अलग रक्त घटक समय पर मिल सकेंगे. इससे गंभीर मरीजों के इलाज में मदद मिलेगी और उन्हें रक्त के लिए दूसरे जिलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. इससे पहले कुमाऊं मंडल में यह सुविधा रुद्रपुर और पिथौरागढ़ के जिला अस्पतालों में उपलब्ध थी. मुख्यमंत्री ने बताया कि जिला चिकित्सालय चंपावत में करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से 50 बेड का आधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक तैयार किया गया है. अस्पताल में सीटी स्कैन, एमआरआई और डायलिसिस जैसी सुविधाएं भी शुरू हो चुकी हैं. करीब 11.71 करोड़ रुपये की लागत से लोअर ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग और पहली व दूसरी मंजिल पर डायग्नोस्टिक विंग तथा ऑपरेशन थिएटर का निर्माण किया जा रहा है.
VIDEO | Dehradun: Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) virtually addresses inauguration programme of the Blood Component Separation Unit at the District Hospital, Champawat.
— Press Trust of India (@PTI_News) August 20, 2026
He says, “…It is a matter of great satisfaction that an excellent initiative has been… pic.twitter.com/OMbY1xBNMi
चंपावत में तेजी से बढ़ रही सुविधाएं
धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है. चंपावत में सड़कों के निर्माण और चौड़ीकरण के साथ जाम की समस्या दूर करने के लिए आधुनिक पार्किंग सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. चंपावत रोडवेज स्टेशन पर 62 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बहुमंजिला पार्किंग और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण जल्द शुरू होगा. जिले में 66 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से आधुनिक सिटी ड्रेनेज सिस्टम बनाया जा रहा है. भूमिगत बिजली लाइनों का काम भी तेजी से चल रहा है. वहीं, 240 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से पेयजल व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है. साइंस सेंटर, महिला स्पोर्ट्स कॉलेज और आधुनिक आईएसबीटी जैसी परियोजनाओं पर भी काम हो रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चंपावत को स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और विकास के क्षेत्र में उत्तराखंड का आदर्श जिला बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. जिले के गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
#WATCH | Dehradun, Uttarakhand: CM Pushkar Singh Dhami says, "...Previously, this facility was available only in Rudrapur and Pithoragarh in the entire Kumaon division. Now, in times of emergency, patients in Champawat will be able to access essential blood components promptly,… https://t.co/zHuFL0WEuj pic.twitter.com/BtSJYGVamT
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) August 20, 2026
कार्यक्रम में मौजूद रहे कई नेता व अधिकारी
इस अवसर पर सचिव स्वास्थ्य विनय शंकर पाण्डेय, दायित्वधारी सुभाष बगौली, विधायक प्रतिनिधि (चंपावत) प्रकाश चन्द्र तिवारी, भाजपा नेता सतीश पाण्डेय, वर्चुअल माध्यम से जिला पंचायत अध्यक्ष (चंपावत) आनन्द सिंह अधिकारी, चम्पावत के भाजपा जिलाध्यक्ष गोविन्द सामन्त, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद (चंपावत) प्रेमा पाण्डेय, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद (लोहाघाट) गोविन्द वर्मा, श्याम नारायण पाण्डेय, मनोज कालाकोटी, मुकेश महराना, हेमा जोशी, किरन देवी, बलाॅक प्रमुख (चंपावत) अंचला बोहरा, भाजपा के जिला महामंत्री मुकेश कलखुड़िया एवं अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद थे.
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वित्त वर्ष 2031 तक 2 ट्रिलियन डॉलर निर्यात लक्ष्य हासिल करने के लिए भारत को करना होगा व्यापक संरचनात्मक बदलाव: वाणिज्य मंत्रालय अधिकारी
नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। भारत को वित्त वर्ष 2030-31 तक 2 ट्रिलियन डॉलर के कुल निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल करने के लिए अपने विनिर्माण और व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र में व्यापक संरचनात्मक परिवर्तन करने होंगे। वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव यशवीर सिंह ने गुरुवार को कहा कि केवल छोटे-मोटे सुधारों से यह लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता, बल्कि उत्पादन, आपूर्ति शृंखला और निर्यात क्षमता में बड़े स्तर पर बदलाव आवश्यक होंगे।
सीआईआई मैन्युफैक्चरिंग कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए यशवीर सिंह ने कहा कि भारत का कुल निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 863 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जबकि वर्ष 2014-15 में यह 468 अरब डॉलर था। यह उल्लेखनीय उपलब्धि है, लेकिन 2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए वर्तमान गति को दोगुने से अधिक करना होगा।
उन्होंने कहा, 2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर के कुल निर्यात का लक्ष्य हासिल करने के लिए हमें अपनी मौजूदा प्रगति से कहीं अधिक तेजी लानी होगी। यह केवल क्रमिक सुधारों से संभव नहीं होगा, बल्कि इसके लिए संरचनात्मक परिवर्तन आवश्यक हैं।
यशवीर सिंह ने कहा कि वैश्विक स्तर पर चर्चा में रहने वाली चीन प्लस वन रणनीति को केवल चीन पर निर्भरता कम करने के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। भारत को खुद को एक ऐसे विश्वसनीय, पारदर्शी और मजबूत विनिर्माण साझेदार के रूप में स्थापित करना होगा, जो वैश्विक कंपनियों को भरोसेमंद आपूर्ति शृंखला उपलब्ध करा सके।
उन्होंने कहा, हमें केवल चीन प्लस वन नहीं बनना है। हमें भारत बनना है, एक विश्वसनीय भागीदार, एक मजबूत निर्माता और वैश्विक विकास का अगला बड़ा इंजन।
सिंह ने कहा कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था इस समय बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। व्यापार अब केवल आर्थिक गतिविधि नहीं रह गया है, बल्कि कई देशों द्वारा इसे भू-राजनीतिक रणनीति के एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के हालिया घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली चुनौतियों का सामना कर रही है। डब्ल्यूटीओ के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में मतभेद और उसके अपीलीय निकाय की लंबे समय से जारी निष्क्रियता इस बदलते परिदृश्य के उदाहरण हैं।
उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र व्यवस्था भी अब दबाव में है। पारस्परिक शुल्क, एकतरफा प्रतिबंध और सुरक्षा संबंधी अपवादों के विस्तार ने पारंपरिक व्यापार ढांचे को प्रभावित किया है।
यशवीर सिंह ने कहा, महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात प्रतिबंधों का रणनीतिक हथियार के रूप में उपयोग किया जा रहा है। प्रौद्योगिकी तक पहुंच को सीमित करने के लिए कृत्रिम बाधाएं खड़ी की जा रही हैं। व्यापार अब केवल आर्थिक साधन नहीं रहा, बल्कि भू-राजनीतिक नीति का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।
उन्होंने बताया कि वैश्विक विनिर्माण और महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं का अत्यधिक केंद्रीकरण अब आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी बड़ी चिंता बन चुका है। वर्ष 1990 में वैश्विक विनिर्माण मूल्यवर्धन में चीन की हिस्सेदारी लगभग 3 प्रतिशत थी, जो बढ़कर 2024 में करीब 28 प्रतिशत हो गई। इसके अलावा दुर्लभ मृदा तत्वों, ग्रेफाइट और मैग्नीशियम जैसे कई महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण और परिशोधन में भी चीन का मजबूत प्रभुत्व है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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