Sugar Price Increase: त्योहारों से पहले चीनी ने बिगाड़ा स्वाद! 60 के पार पहुंचा भाव, सरकार ने बनाई नई रणनीति
Sugar Price Increase: त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने घर का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। कई बाजारों में चीनी का खुदरा भाव 60 रुपये किलो के ऊपर पहुंच गया है, जबकि कुछ शहरों में हाल के दिनों में कीमत में तेज उछाल दर्ज किया गया है।
चीनी की कीमतों में अगस्त के दौरान लगातार तेजी देखने को मिली है। कई प्रमुख बाजारों में थोक कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। महाराष्ट्र के कोल्हापुर जैसे प्रमुख चीनी बाजार में थोक भाव अगस्त की शुरुआत से करीब 20 फीसदी तक बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
इसका सीधा असर खुदरा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। कुछ जगहों पर चीनी 60 रुपये किलो या उससे ऊपर बिक रही है। इससे चाय, मिठाई और घर में रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीनी की लागत बढ़ गई है।
कीमत बढ़ने की वजह क्या है?
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। त्योहारी सीजन में मिठाइयों की मांग बढ़ने वाली है। वहीं, गन्ने का एक हिस्सा एथेनॉल उत्पादन की ओर जाने से चीनी की उपलब्धता को लेकर बाजार में चिंता बढ़ी है।
इसके अलावा, कुछ बाजारों में सीमित स्थानीय सप्लाई और स्टॉक को लेकर भी दबाव बना हुआ है। सरकार पहले ही जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए चीनी व्यापारियों पर स्टॉक सीमा लागू कर चुकी है।
1 सितंबर से और सख्त होगी स्टॉक लिमिट
बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने थोक चीनी उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने के नियम और सख्त करने का फैसला किया है। 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक प्रति महीने 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले थोक खरीदार 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। सरकार को उम्मीद है कि इससे त्योहारी सीजन के दौरान सप्लाई बनी रहेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा।
आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर?
चीनी के दाम बढ़ने का असर सिर्फ घर के मासिक बजट तक सीमित नहीं रहता। चाय, मिठाई, बेकरी और कई दूसरे खाद्य उत्पादों की लागत भी बढ़ सकती है।
ऐसे में आने वाले त्योहारों के दौरान चीनी की बढ़ती कीमत आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। सरकार ने स्टॉक लिमिट कड़ी करने के साथ सप्लाई बढ़ाने के लिए आयात जैसे विकल्पों पर भी विचार शुरू किया है।
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Tehelka editor Tarun Tejpal: बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत पहुंचे तरुण तेजपाल, रेप केस में सजा को दी चुनौती
Tehelka editor Tarun Tejpal Rape Case: तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल ने साल 2013 के चर्चित यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट ने उन्हें इस मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में निचली अदालत के उस आदेश को पलट दिया था जिसमें 2021 में उन्हें बरी कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने यह भी माना था कि ट्रायल कोर्ट ने मामले के अहम सबूतों का सही ढंग से आकलन नहीं किया था।
दूसरी ओर, गोवा सरकार ने भी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। राज्य सरकार ने याचिका दायर कर मांग की है कि तरुण तेजपाल की 10 साल की सजा को बढ़ाकर उम्रकैद में तब्दील किया जाए। सरकार का तर्क है कि अदालत द्वारा स्थापित किए गए अपराध और गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए यह सजा काफी कम है।
सजा की अवधि और हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल
गोवा सरकार की यह चुनौती मुख्य रूप से सजा की मात्रा (quantum of punishment) और हाईकोर्ट के उस निर्देश तक सीमित है जिसमें दोनों मामलों की सजा को एक साथ (concurrently) चलाने को कहा गया था। राज्य सरकार का पक्ष है कि अलग-अलग दिनों में हुई दोनों घटनाएं अलग-अलग आपराधिक कृत्य थीं, जिन्हें बढ़ी हुई सजा के जरिए दर्शाया जाना चाहिए था।
अपनी याचिका में गोवा सरकार ने उल्लेख किया कि हाईकोर्ट ने अपराध को बीते हुए 13 साल और इस बात को आधार बनाया था कि आरोपी और पीड़िता दोनों अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुके हैं, जिसके चलते न्यूनतम सजा दी गई। राज्य ने दलील दी कि केवल समय बीतने का फायदा अपराधी को नहीं मिलना चाहिए, खासकर तब जब इस देरी के लिए पीड़िता जिम्मेदार नहीं थी। इसके अलावा, हाईकोर्ट ने ट्रायल के दौरान पीड़िता के साथ हुए बर्ताव की भी आलोचना की थी और बचाव पक्ष पर उसे असहज करने का आरोप लगाया था।
गौरतलब है कि 62 वर्षीय तरुण तेजपाल को गोवा में तहलका द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान होटल के लिफ्ट में एक सहकर्मी के यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया गया था। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने 2021 में उन्हें बरी कर दिया था, जिसे बॉम्बे हाईकोर्ट ने 6 अगस्त को पलटते हुए उन्हें दोषी करार दिया।
हाईकोर्ट ने तेजपाल को दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया था, जिसे बाद में वकीलों के अनुरोध पर बढ़ाकर चार सप्ताह कर दिया गया था। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आ गया है, जहां एक तरफ तरुण तेजपाल ने अपनी दोषसिद्धि को चुनौती दी है, वहीं गोवा सरकार ने सजा को उम्रकैद तक बढ़ाने की मांग की है।
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