महाकाल मंदिर पहुंची ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर, पूजन कर नंदी के कान में बोली मनोकामना, व्यवस्थाओं की करी सराहना
12 ज्योतिर्लिंग में से एक भगवान महाकालेश्वर के दर्शन करने के लिए गुरुवार सुबह ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर उज्जैन पहुंचीं। वह यहां प्रातः कालीन होने वाली भस्म आरती में शामिल हुईं और विधि विधान से बाबा की पूजन अर्चन कर आशीर्वाद लिया।
मनु ने बताया कि पिछले कुछ समय से वह महाकाल दर्शन करने के लिए आना चाहती थी और आज उनकी इच्छा पूरी हो गई है। उन्होंने बाबा महाकाल का पूजन अर्चन करने के बाद नंदी के कान में अपनी मनोकामना भी कही। इस दौरान वो पूरी तरह से भक्ति में डूबी हुई नजर आईं।
महाकाल पहुंची मनु भाकर
बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंची मनु पूरी तरह से भक्ति में डूबी हुई नजर आईं। नंदी हॉल में बैठकर उन्होंने दर्शन किए और इसके बाद नंदी महाराज के कान में अपने मनोकामना भी बोली। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक अगर व्यक्ति नंदी जी के कान में अपनी मनोकामना बोलता है, तो वह सीधे भोलेनाथ तक पहुंचती है।
मंदिर समिति ने किया स्वागत
महाकाल मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से दर्शन करने पहुंची मनु भाकर का स्वागत कर सत्कार किया गया। अधिकारी और कर्मचारियों ने दर्शन पूजा की व्यवस्था में सहयोग किया। इस दौरान वह पारंपरिक सलवार कुर्ती पहनी हुई थी और बड़ी श्रद्धा के साथ उन्होंने पूजन पाठ किया।
मनु ने क्या कहा
महाकाल दर्शन करने के बाद मनु को मंदिर की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की भक्ति की सराहना करते हुए देखा गया। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से महाकालेश्वर मंदिर जाकर बाबा महाकाल के दर्शन करना चाहती थी। उन्होंने कहा कि उन्हें ज्यादा समय नहीं मिल पाया लेकिन कम समय में भी यहां की भक्ति और व्यवस्थाओं से उनका मन प्रसन्न हो गया है। वह महाकाल मंदिर के संचालक और कर्मचारियों की मेहनत की प्रशंसा करती नजर आईं। उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रार्थना की है कि भगवान की कृपा सभी पर बनी रहे हो सभी लोग इसी तरह मेहनत करते हुए आगे बढ़ते रहें। उन्होंने उज्जैन यात्रा को संभव बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार जताया है।
Sajjan Kumar death: 1984 सिख विरोधी दंगों के दोषी सज्जन कुमार का निधन, तिहाड़ में काट रहे थे उम्रकैद की सजा
नई दल्ली: 1984 सिख विरोधी दंगों के दोषी और पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सज्जन कुमार दंगों के मामले में कई उम्रकैद की सजाएं एक साथ काट रहे थे और फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद थे।
1984 सिख विरोधी दंगों से जुड़ा है सज्जन कुमार का नाम
1984 के सिख विरोधी दंगों के राजनीतिक असर से जुड़ी एक प्रमुख हस्ती रहे सज्जन कुमार पर इस हिंसा से संबंधित कई अलग-अलग मामले चल रहे थे। हालांकि साल 2026 की शुरुआत में उन्हें एक हाई-प्रोफाइल मामले में बरी कर दिया गया था, फिर भी वे दो अन्य अलग-अलग मामलों में दोषी करार दिए जाने और उम्रकैद की सजा मिलने के चलते जेल में ही बंद रहे।
Sajjan Kumar, former Member of Parliament and leader of the Indian National Congress, is no more. He was brought dead to Delhi's Safdarjung Hospital: Hospital sources
— ANI (@ANI) August 20, 2026
ANI File Photo pic.twitter.com/BvYJR9PXcT
दिसंबर 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा 2013 में सज्जन कुमार को बरी किए जाने के फैसले को पलट दिया था। यह मामला पालम कॉलोनी के राज नगर पार्ट-1 में पांच सिख पुरुषों की हत्या और वहां स्थित एक गुरुद्वारे को आग लगाए जाने से जुड़ा था।
हाईकोर्ट ने इस हत्याकांड में सज्जन कुमार को आपराधिक साजिश और उकसावे का दोषी ठहराते हुए उन्हें उनके शेष प्राकृतिक जीवन तक के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अपने ऐतिहासिक फैसले में अदालत ने 1984 की सिख विरोधी हिंसा को "मानवता के खिलाफ अपराध" भी करार दिया था।
सरस्वती विहार मामले में भी मिली थी उम्रकैद
फरवरी 2025 में सज्जन कुमार को सरस्वती विहार मामले में भी एक और उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। रूज एवेन्यू कोर्ट ने उस भीड़ हमले में उनकी भूमिका के लिए उन्हें दोषी ठहराया था, जिसमें एक पिता और पुत्र, जसवंत सिंह और तरुनदीप सिंह को जिंदा जला दिया गया था।
अभियोजन पक्ष ने इस मामले में सज्जन कुमार को मृत्युदंड देने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उनकी बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
गौरतलब है कि ये दोनों उम्रकैद की सजाएं एक साथ (कंकरंट) चल रही थीं, यानी इसी साल की शुरुआत में एक अन्य मामले में बरी किए जाने के बावजूद सज्जन कुमार जेल में ही बंद रहे।
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